Rajasthan

संघर्ष से सफलता तक! RAS में भावेश देसाई ने रचा इतिहास, दिव्यांग श्रेणी में हासिल किया दूसरा स्थान

Last Updated:April 21, 2026, 12:59 IST

Bhavesh Desai RAS Success: उदयपुर के दृष्टिबाधित शिक्षक भावेश देसाई ने आरएएस परीक्षा-2024 में 97वीं रैंक हासिल कर सफलता की मिसाल पेश की है. बचपन से दृष्टिबाधित होने के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को कमजोर नहीं होने दिया. मूल रूप से डूंगरपुर जिले के रहने वाले भावेश वर्तमान में अंग्रेजी के वरिष्ठ अध्यापक हैं. आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने अहमदाबाद में पढ़ाई की और सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय किया. दिन में पढ़ाई और रात में भजन गायन कर वे अपने खर्च चलाते थे. उन्होंने दिव्यांग श्रेणी में पूरे राजस्थान में दूसरा स्थान भी प्राप्त किया. उनके इंटरव्यू में दिया गया संतुलित जवाब ज्यूरी को काफी पसंद आया. उनकी सफलता में समिधा दृष्टि दिव्यांग मिशन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिसने उन्हें बेहतर माहौल और मार्गदर्शन दिया.

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उदयपुर. मजबूत इरादे और अटूट मेहनत हो तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती. इसका जीता-जागता उदाहरण बने हैं उदयपुर के दृष्टिबाधित शिक्षक भावेश देसाई, जिन्होंने बिना आंखों की रोशनी के ही आरएएस (RAS) परीक्षा-2024 में शानदार सफलता हासिल कर इतिहास रच दिया. भावेश बचपन से ही दृष्टिबाधित हैं, लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया.उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई अहमदाबाद से की और आगे की शिक्षा पूरी करने के बाद सिविल सर्विस में जाने का सपना देखा. वे मूल रूप से डूंगरपुर जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले हैं और फिलहाल अंग्रेजी के वरिष्ठ अध्यापक के रूप में कार्यरत हैं.

उनके पिता किसान हैं, ऐसे में आर्थिक चुनौतियां भी उनके सामने थीं.कॉलेज के दिनों से ही भावेश ने ठान लिया था कि उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाना है. इस लक्ष्य को पाने के लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की. दिन में पढ़ाई और रात में भजन गायन कर वे अपने खर्चे खुद उठाते थे. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने हौसले को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया और आखिरकार अपने सपने को सच कर दिखाया. आरएएस परीक्षा-2024 के परिणाम में भावेश ने अनुसूचित क्षेत्र (TSP) के सामान्य वर्ग में 97वीं रैंक हासिल की है.

दिव्यांग श्रेणी में दूसरे स्थान पर रहे भावेश

भावेश देसाई दिव्यांग श्रेणी में पूरे राजस्थान में दूसरे स्थान पर रहे. उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है. इंटरव्यू के दौरान भी भावेश ने अपनी समझदारी और संतुलित सोच का परिचय दिया. उन्होंने बताया कि उनसे पूछा गया कि अगर वे अमेरिका के राष्ट्रपति की जगह होते तो क्या करते. इस पर उन्होंने जवाब दिया कि अमेरिका एक महाशक्ति है और उसे दुनिया में शांति और सौहार्द बनाए रखने की दिशा में काम करना चाहिए.उनका यह जवाब ज्यूरी को काफी पसंद आय.

समिधा दृष्टि दिव्यांग मिशन का भी रहा बड़ा योगदान

भावेश की सफलता में उदयपुर के सेक्टर-14 स्थित समिधा दृष्टि दिव्यांग मिशन का भी बड़ा योगदान रहा है. इस संस्थान ने उन्हें पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल दिया. संस्थान के अध्यक्ष डॉ. चंद्रगुप्त सिंह चौहान ने बताया कि यह छात्रावास बिना सरकारी मदद के समाज के सहयोग से चल रहा है और यहां ऐसे बच्चों को आगे बढ़ने का मौका मिलता है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. भावेश की सफलता की खबर मिलते ही छात्रावास में खुशी का माहौल बन गया. उनके साथी छात्रों ने एक-दूसरे को गले लगाकर जश्न मनाया. यह सफलता सिर्फ भावेश की नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की जीत है, जो मुश्किल हालात में भी अपने सपनों को जिंदा रखते हैं. भावेश देसाई आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं, जो किसी भी कारण से खुद को कमजोर समझते हैं.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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Location :

Udaipur,Rajasthan

First Published :

April 21, 2026, 12:59 IST

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