agriculture news I pali news I rajasthan news I पत्थरचट्टा की खेती

होमफोटोकृषि
Agriculture tips: गेहूं-धान छोड़िए! इस औषधीय पौधे से बिना बीज के होगी कमाई
Last Updated:June 16, 2026, 20:59 IST
Agriculture tips: पत्थरचट्टा एक ऐसा औषधीय पौधा है जिसकी बाजार में सालभर भारी मांग रहती है. इसकी खासियत यह है कि एक पत्ती से ही कई नए पौधे तैयार हो जाते हैं, जिससे खेती की लागत बेहद कम हो जाती है. आयुर्वेदिक कंपनियां, नर्सरियां और आम उपभोक्ता इसकी पत्तियों व पौधों को अच्छे दामों पर खरीदते हैं, जिससे किसान कम निवेश में शानदार मुनाफा कमा सकते हैं.
<br />यदि आप भी एक किसान हैं और अपनी कृषि भूमि से कम से कम समय में अच्छी इनकम करना चाहते हैं, तो ‘पत्थरचट्टा’ का पौधा आपके लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है. पत्थरचट्टा एक ऐसा चमत्कारिक औषधीय पौधा है, जो अपने अनोखे स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है और जिसकी बाजार में 12 महीने भारी मांग बनी रहती है. इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी खेती करने के लिए किसी बड़े निवेश या भारी-भरकम बजट की आवश्यकता नहीं होती है. बल्कि इसे एक छोटे से स्तर पर शुरू करके भी सालाना लाखों रुपए का मुनाफा किसान आराम से कमा सकते है.
<br />पत्थरचट्टा की खेती की जो बात इसे दूसरी पारंपरिक फसलों से बिल्कुल अलग और किफायती बनाती है. वह है इसका अनोखा प्रोपेगेशन इस पौधे को उगाने के लिए महंगे बीजों को खरीदने की कोई जरूरत नहीं होती है, बल्कि इसकी एक परिपक्व पत्ती से ही कई नए पौधे खुद-ब-खुद तैयार हो जाते हैं. अगर आप पत्थरचट्टा की सिर्फ एक पत्ती को भी हल्की गीली मिट्टी पर रख दें, तो कुछ ही दिनों में उस पत्ती के किनारों से छोटे-छोटे नए पौधे निकलने लगते हैं. इस तकनीक की बदौलत किसान एक ही पौधे से हजारों नए पौधे बिना किसी अतिरिक्त खर्च के मुफ्त में तैयार कर सकते हैं, जिससे बीज की लागत शून्य हो जाती है.
<br />अगर देखा जाए तो पत्थरचट्टा को उगाने के लिए किसी विशेष या अत्यधिक उपजाऊ जमीन की बंदिश नहीं है. यह सामान्य दोमट मिट्टी से लेकर मारवाड़ की हल्की रेतीली मिट्टी में भी बेहद आसानी से और तेजी से फलता-फूलता है. इसे बड़े खेतों के साथ-साथ नर्सरी या गमलों में भी लगाया जा सकता है. इस पौधे के विकास के लिए रोजाना केवल 4 से 5 घंटे की सामान्य धूप काफी होती है. सिंचाई के मामले में तो यह किसानों के लिए वरदान है, क्योंकि इसे बहुत ही कम पानी की जरूरत होती है. ज्यादा पानी देने से इसकी जड़ें गल सकती हैं, इसलिए जब मिट्टी पूरी तरह सूखी लगे, तभी इसमें हल्की सिंचाई करनी चाहिए.
Add as Preferred Source on Google
<br />अब किसानों के मन में सवाल होगा कि इनको बेचने आखिर जाएंगे कहा? देश की बड़ी-बड़ी आयुर्वेदिक दवा निर्माता कंपनियां, पतंजलि, डाबर और बैद्यनाथ जैसे हर्बल प्रोडक्ट्स बनाने वाले उद्योग और स्थानीय सरकारी व प्राइवेट नर्सरियां इन पौधों और इनकी पत्तियों को हाथों-हाथ थोक के भाव खरीद लेती हैं. इसके अलावा, आम लोग भी वास्तु और घरेलू उपचार के लिए इसे अपने घरों में लगाना पसंद करते हैं, जिससे खुदरा बाजार में इसका एक छोटा सा पौधा भी 30 से 50 रुपए में बहुत आसानी से बिक जाता है.



