समंदर में दुश्मनों की खैर नहीं, अफ्रीकी देश ने उतारा अपना नया ब्रह्मास्त्र ‘काली-3’, नेवी को दिया सबसे बड़ा हथियार

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समंदर में दुश्मनों की खैर नहीं, अफ्रीकी देश ने उतारा अपना नया ब्रह्मास्त्र
Last Updated:October 14, 2026, 19:36 IST
नाइजीरिया के लिए समुद्री सुरक्षा रणनीतिक रूप से बेहद अहम है. उसके तटीय क्षेत्र और तेल-गैस से जुड़े समुद्री संसाधन आर्थिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्र हैं. ऐसे में स्थानीय स्तर पर समुद्री सुरक्षा पोत तैयार करने की क्षमता देश को अपने औद्योगिक आधार को मजबूत करने का अवसर देती है.‘काली-3’ नाइजीरिया की समुद्री शक्ति के लिए बहद अहम है.
समंदर में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए अब नाइजीरिया भी बड़ा दांव खेल रहा है. तेल और गैस के विशाल भंडार वाले इस अफ्रीकी देश ने समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर अपनी औद्योगिक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए ‘काली-3’ सिक्योरिटी सपोर्ट वेसल तैयार किया है. नाइजीरियाई नौसेना के साथ साझेदारी में बना यह पोत सिर्फ एक जहाज नहीं, बल्कि स्थानीय इंजीनियरिंग, तकनीकी कौशल और घरेलू संसाधनों के दम पर रक्षा एवं समुद्री निर्माण क्षेत्र में आगे बढ़ने की कोशिश का प्रतीक है.
नाइजीरिया के लिए समुद्री सुरक्षा रणनीतिक रूप से बेहद अहम है. उसके तटीय क्षेत्र और तेल-गैस से जुड़े समुद्री संसाधन आर्थिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्र हैं. ऐसे में स्थानीय स्तर पर समुद्री सुरक्षा पोत तैयार करने की क्षमता देश को अपने औद्योगिक आधार को मजबूत करने का अवसर देती है. हालांकि, ‘काली-3’ की वास्तविक सैन्य क्षमता, हथियारों और परिचालन प्रदर्शन से जुड़े विवरणों की पुष्टि के बिना इसे निर्णायक युद्धक हथियार कहना उचित नहीं होगा.
‘काली-3’ की सबसे बड़ी अहमियत यही है कि नाइजीरिया समुद्री निर्माण के क्षेत्र में अपनी घरेलू क्षमता विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. अगर ऐसी परियोजनाएं बड़े पैमाने पर आगे बढ़ती हैं, तो देश के लिए स्थानीय रोजगार, तकनीकी विशेषज्ञता और समुद्री सुरक्षा से जुड़े उद्योगों को मजबूत करने के नए रास्ते खुल सकते हैं.
इस परियोजना में नितिन संदेसरा के स्वामित्व वाली ऊर्जा कंपनी SEEPCO की भूमिका भी अहम रही है. कंपनी ने अपने पारंपरिक ऊर्जा कारोबार से आगे बढ़कर समुद्री इंजीनियरिंग और जहाज निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा है. डेल्टा स्टेट के ओकेपाई स्थित HM शिपयार्ड में तैयार किए गए ‘काली-3’ के निर्माण में स्थानीय संसाधनों और प्रतिभाओं का इस्तेमाल किया गया है. यह पहल दिखाती है कि ऊर्जा क्षेत्र में विकसित औद्योगिक क्षमता को समुद्री बुनियादी ढांचे के निर्माण में भी लगाया जा सकता है.
First Published :
October 10, 2026, 18:39 IST



