जयपुर का छोटा मंदिर बना आकर्षण का केंद्र! 18वीं सदी से यहां बाहर खड़े होकर होते हैं भगवान राम-सीता के दर्शन

Last Updated:June 16, 2026, 13:10 IST
Jaipur Ram Sita Mandir: जयपुर अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और भव्य मंदिरों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है, लेकिन गुलाबी नगरी में स्थित एक छोटा सा मंदिर अपनी अनूठी विशेषता के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करता है. 18वीं सदी में निर्मित यह मंदिर भगवान राम और माता सीता को समर्पित है और इसे जयपुर के सबसे छोटे मंदिरों में गिना जाता है. इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं पड़ती, बल्कि बाहर से ही भगवान राम-सीता के सहज दर्शन हो जाते हैं. मंदिर का स्थापत्य, ऐतिहासिक महत्व और आध्यात्मिक वातावरण इसे विशेष बनाते हैं. जयपुर आने वाले पर्यटक इस अद्भुत धरोहर को देखने जरूर पहुंचते हैं.
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जयपुर: जयपुर अपने ऐतिहासिक मंदिरों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं जहां खासतौर पर जयपुर के चारदीवारी बाजार में ऐसे सैकड़ों मंदिर हैं जो वर्षों पुराने हैं जिनकी वास्तुकला और मंदिर की प्राचीन मान्यताओं के चलते यहां लोगों की जमकर भीड़ उमड़ती हैं. ऐसे चारदीवारी में भगवान राम-सीता के भी कई प्राचीन मंदिर हैं जहां भगवान राम अलग-अलग स्वरूपों में स्थापित हैं. वैसे तो चारदीवारी बाजार में अधिकारी मंदिर 18 से 19वीं सदी के समय के हैं, जहां आज भी मंदिर की वास्तुकला बेजोड़ स्थापत्य कला और प्राचीन शैली के साथ नज़र आती हैं. ऐसे ही जयपुर के चौड़ा रास्ता में स्थित 18वीं सदी का सीताराम मंदिर जो एकमात्र ऐसा अनोखा मंदिर हैं जो जयपुर के प्राचीन मंदिरों में सबसे छोटा मंदिर हैं.
जहां भगवान राम-सीता के दर्शन मंदिर के बाहर सड़क से ही हो जाते हैं. यह मंदिर 18वीं सदी में बना जयपुर का सबसे कम क्षेत्रफल में बना मंदिर हैं, जिसकी वास्तुकला में प्राचीन शैली और बेजोड़ स्थापत्य की झलक आज भी नज़र आती हैं.
1805 में महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय के समय हुआ था मंदिर निर्मित लोकल-18 ने चौड़ा रास्ता स्थित सीताराम मंदिर में पहुंच कर यहां के पुजारी से मंदिर के इतिहास को लेकर बात की तो वह बताते हैं कि यह मंदिर जयपुर के प्राचीन मंदिरों में से एक हैं. जिसका निर्माण 1805 विक्रम सम्बत् में जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय के समय किया गया था. मंदिर में भगवान श्री राम और सीता जी की मुर्तियां स्थापित है, जिसकी प्राण प्रतिष्ठा फाल्गुन सुदी तीज विक्रम सम्वत 1816 को श्री ब्राह्मण स्वर्णकार समाज द्वारा की गई थी. आज भी मंदिर के निमार्ण और प्राण प्रतिष्ठा का उल्लेख मंदिर में रखी गई मूर्तियों के नीचे लिखे अभिलेख में लिखी हुई हैं. मंदिर में हनुमान जी साथ दक्षिण मुखी हनुमानजी भी विराजमान हैं. मंदिर में हर दिन स्थानीय और जयपुर घूमने आने वाले पर्यटक दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
बेजोड़ वास्तुकला में बना जयपुर का सबसे छोटा मंदिर लोकल-18 से बात करते हुए मंदिर के पुजारी बताते हैं कि जयपुर में क कई प्राचीन राम मंदिर हैं, जो 18 से लेकर 19वीं सदी के समय या उससे पहले के बने हैं लेकिन यह मंदिर सभी मंदिरों से छोटा होने के बावजूद मंदिर की वास्तुकला हिंदू मंदिर की तर्ज़ पर ही बनी हैं. जिसमें मंदिर का गर्भग्रह और मण्डप सहित ऊपरी शिखर आज भी बेजोड़ स्थापत्य कला के साथ दिखाई पड़ता हैं. मंदिर इतना प्राचीन वास्तुकला के साथ बना हैं लेकिन इतना छोटा हैं जहां ज्यादा लोग एकसाथ मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते है. इसलिए इस मंदिर में लोग को सीताराम के दर्शन मंदिर के बाहर से ही होते हैं. हालांकि इसी मंदिर के समय बने अन्य मंदिर में बड़े-बड़े प्रांगण और हॉल बने हैं लेकिन इसकी वास्तुकला वैसी नहीं हैं.
About the AuthorJagriti Dubey
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें
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