कचरे से कमाल तक का सफर! उदयपुर की इन अनोखी डायरियों की देश-विदेश में बढ़ी मांग, जानिए क्या है खासियत

Last Updated:June 18, 2026, 16:39 IST
Udaipur Handmade Diaries: झीलों की नगरी उदयपुर अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और खूबसूरत पर्यटन स्थलों के साथ-साथ अब अनोखी हस्तनिर्मित डायरियों के लिए भी पहचान बना रही है. खास बात यह है कि इन डायरियों को कपड़े की बची हुई कतरनों और पुनर्चक्रित सामग्री से तैयार किया जाता है. स्थानीय कारीगर अपनी रचनात्मकता और पारंपरिक कला का उपयोग कर इन्हें आकर्षक रूप देते हैं. पर्यटक इन्हें केवल एक स्टेशनरी उत्पाद नहीं, बल्कि उदयपुर की संस्कृति और हस्तकला की याद के रूप में खरीदते हैं. पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने वाली ये डायरियां देश-विदेश के पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रही हैं. रंग-बिरंगे डिजाइन, हस्तनिर्मित कवर और पारंपरिक राजस्थानी कला की झलक इन्हें खास बनाती है.
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उदयपुर: झीलों की नगरी उदयपुर अपनी खूबसूरत झीलों, महलों और हस्तशिल्प के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. यहां आने वाले पर्यटक स्थानीय कला और हस्तनिर्मित उत्पादों को भी काफी पसंद करते हैं. इन्हीं में एक खास पहचान उदयपुर में बनने वाली हस्तनिर्मित डायरी की है, जो देशी-विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है.इन डायरियों की खास बात यह है कि इन्हें रीसायकल सामग्री और पारंपरिक हस्तकला के जरिए तैयार किया जाता है.
लोकल 18 की टीम शहर के नजदीक बुजड़ा क्षेत्र पहुंची, जहां इन विशेष डायरियों का निर्माण किया जाता है. यहां कारीगरों ने बताया कि डायरी बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह मेहनत और हुनर पर आधारित होती है. इसकी शुरुआत कपड़े की बारीक कतरनों से होती है, जिन्हें सबसे पहले 2 से 3 दिनों तक पानी में भिगोया जाता है. इसके बाद भीगी हुई कतरनों को अच्छी तरह पीसकर और छानकर गूदे का रूप दिया जाता है. इस गूदे से बेहद पतला और मजबूत कागज तैयार किया जाता है. कागज बनने के बाद उसे खुले वातावरण में 2 से 3 दिनों तक सुखाया जाता है. पूरी प्रक्रिया के बाद तैयार कागज को फैक्ट्री से गोदाम में भेजा जाता है, जहां इसे डायरी का आकार देने का काम शुरू होता है. गोदाम में कागज की कटिंग कर उसे अलग-अलग आकार और डिजाइन में तैयार किया जाता है. इसके बाद महिलाओं द्वारा हाथों से सिलाई की जाती है. यही हस्तनिर्मित प्रक्रिया इन डायरियों को बाजार में उपलब्ध सामान्य डायरियों से अलग बनाती है. कारीगरों के अनुसार, हर डायरी में हाथों की मेहनत और कलात्मकता साफ नजर आती है.
उदयपुर में वर्षों से यह काम किया जा रहाडायरियों को आकर्षक बनाने के लिए उन पर विभिन्न प्रकार की डिजाइन, पारंपरिक प्रिंट, रंगीन कवर और सजावटी सामग्री का उपयोग किया जाता है. कई ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार इन्हें कस्टमाइज भी करवाते हैं. नाम, लोगो या विशेष संदेश के साथ तैयार की जाने वाली डायरी कॉर्पोरेट गिफ्ट और स्मृति चिन्ह के रूप में भी काफी लोकप्रिय है. डायरी निर्माता कूपन सोनी ने बताया कि उदयपुर में वर्षों से यह काम किया जा रहा है.
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचानस्थानीय बाजार के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी इन डायरियों की अच्छी मांग है. खासकर विदेशी पर्यटक इन्हें अपने साथ स्मृति के रूप में ले जाना पसंद करते हैं. पर्यटकों को यह उत्पाद इसलिए भी आकर्षित करता है क्योंकि यह पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों की कला को भी दर्शाता है. उन्होंने बताया कि उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में कई इकाइयों में इस तरह की हस्तनिर्मित डायरियां तैयार की जाती हैं. इससे बड़ी संख्या में महिलाओं और स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है. पर्यटन नगरी उदयपुर की यह अनूठी कला आज न केवल शहर की पहचान को मजबूत कर रही है, बल्कि स्थानीय हस्तशिल्प को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान दिला रही है.
About the AuthorJagriti Dubey
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें
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Udaipur,Rajasthan



