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फेसबुक-इंस्‍टाग्राम के आख‍िरी द‍िन आ गए? भारत के गर्दन मरोड़ते ही अमेर‍िका में नई मुसीबत, Gen-Z वहां भी फोकस में

फेसबुक-इंस्‍टाग्राम चलाने वाली कंपनी मेटा की बदमाशी भारत में उजागर हो गई. सरकार ने गर्दन पकड़ी तो खुद मेटा के माल‍िक मार्क जुकरबर्ग को माफी मांगनी पड़ी. लेकिन अब रॉयटर्स का सर्वे कह रहा क‍ि खुद अमेर‍िकी इन कंपन‍ियों पर डंडा चलाना चाहते हैं. कई तो इन्‍हें बंद करने के पक्ष में भी हैं. सर्वे में शाम‍िल लोगों का मानना है क‍ि ये कंपन‍ियां ऐसे ऐसे टूल्‍स का उपयोग करती हैं, जिससे बच्‍चे और युवा यानी Gen-Z इनकी लत के श‍िकार हो जाते हैं और फ‍िर इनके इशारे पर चलने लगते हैं.

Reuters और Ipsos के इस सर्वे में 61% अमेरिकियों ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों पर सरकार को ज्यादा सख्त नियम लागू करने चाहिए. सबसे ज्यादा समर्थन 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए age verification लागू करने को मिला. सर्वे में 66% लोगों ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों के लिए ऐसा सिस्टम जरूरी होना चाहिए, जिससे 16 साल से कम उम्र के बच्चे इन प्लेटफॉर्म पर आसानी से अकाउंट न बना सकें. रिपब्लिकन में 74% और डेमोक्रेट में 69% लोगों ने इसका समर्थन किया. अमेरिका के एक दर्जन से ज्यादा राज्यों में नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर कानून भी बनाए जा चुके हैं.

मेटा पर भारी जुर्माना लगाने की भी मांग

इस बहस के बीच Meta पर युवाओं को अपने प्लेटफॉर्म का आदी बनाने के आरोप भी लगे हैं. कंपनी इन आरोपों से इनकार करती है. एक मामले में अमेरिकी राज्यों की ओर से Meta पर भारी जुर्माने की मांग की गई है और कंपनी ने कहा है कि मामला हारने पर उस पर 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक की पेनल्टी लग सकती है. इसके अलावा न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने हाल ही में Meta को किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य फंड में 567 मिलियन डॉलर देने और युवा यूजर्स के लिए अपने प्लेटफॉर्म में बदलाव करने का आदेश दिया है.

Meta, TikTok की कोर्ट में चल रही जांच

अमेरिका में सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ कानूनी लड़ाई भी चल रही है. Meta, TikTok और Snap जैसी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाला NetChoice उम्र की जांच अनिवार्य करने वाले कुछ कानूनों को अदालत में चुनौती दे रहा है. उसका तर्क है कि ऐसे नियम यूजर्स की स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार का उल्लंघन कर सकते हैं. वहीं, अमेरिकी कांग्रेस ने अभी तक बच्चों को सोशल मीडिया के नुकसान से बचाने के लिए कोई व्यापक संघीय कानून पारित नहीं किया है.

मानस‍िक रूप से बीमार कर रही

सर्वे में सोशल मीडिया के बच्चों पर असर को लेकर भी लोगों की चिंता साफ दिखी. 85% अमेरिकियों का मानना है कि सोशल मीडिया बच्चों के लिए लत लगाने वाला हो सकता है. लगभग इतनी ही बड़ी संख्या इसे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह मानती है. हालांकि, लोग सोशल मीडिया को पूरी तरह छोड़ना भी नहीं चाहते. 70% लोगों ने कहा कि सोशल मीडिया पर बिताया समय उन्हें मनोरंजक लगता है, जबकि 35% ने इसे तनाव देने वाला बताया. 52% लोगों को लगता है कि वे सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा समय बिताते हैं.

क‍ितने लोगों पर क‍िया गया सर्वे

यह सर्वे 4,505 अमेरिकी वयस्कों के बीच ऑनलाइन किया गया और इसमें गलती की संभावित सीमा करीब 2 प्रतिशत अंक है. सर्वे में शामिल लोगों ने सरकार की बड़ी भूमिका को लेकर अलग-अलग राय रखी, लेकिन बच्चों की सुरक्षा के मामले में एक बात काफी साफ रही क‍ि लोग चाहते हैं कि सोशल मीडिया कंपनियों पर कुछ और लगाम लगे. सर्वे में शामिल टेनेसी के 60 वर्षीय जेम्स बोसरडेट ने कहा कि सरकार की भूमिका कम होनी चाहिए, लेकिन बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कोई तो रोक लगाए. वहीं वॉशिंगटन डीसी के 34 वर्षीय क्रिस्टोफर चेन ने कहा कि टेक कंपनियों का किशोरों पर बहुत ज्यादा प्रभाव है और सरकार को लोगों की सुरक्षा के लिए कुछ करना चाहिए.

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