तालियों के पीछे छिपी सर्कस कलाकारों की दर्दभरी कहानी, बच्चों के भविष्य के लिए सालों से घर से दूर ये दंपती

जोधपुर. सर्कस की रंग-बिरंगी रोशनी और तालियों की गूंज के पीछे कलाकारों की जिंदगी की एक ऐसी कहानी छिपी है, जिसे देखकर शायद हर किसी की आंखें नम हो जाएं. रैंबो सर्कस में काम करने वाला एक दंपती वर्षों से अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा है. दोनों पति-पत्नी ने बचपन से ही सर्कस की दुनिया को अपना घर बना लिया और इसी हुनर के सहारे परिवार की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं. बच्चों की पढ़ाई, उनके सपने और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने की चाहत ही उनकी मेहनत की सबसे बड़ी वजह है.
कई बार बच्चों से दूर रहना पड़ता है और त्योहार व खास मौके भी परिवार के साथ नहीं मना पाते, लेकिन बच्चों के बेहतर भविष्य की चाहत उन्हें लगातार मेहनत करने की ताकत देती है. पति-पत्नी दोनों मिलकर सर्कस में अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं और जो कमाई होती है, उससे परिवार चलाने के साथ बच्चों की पढ़ाई और दूसरी जरूरतें पूरी करते हैं. उनके लिए सबसे बड़ा सपना यही है कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा हासिल करें और आगे चलकर उनसे बेहतर जिंदगी जिएं.
दिल में दर्द, लेकिन मंच पर आते ही चेहरे पर मुस्कानकलाकारों की जिंदगी जितनी रंगीन मंच पर नजर आती है, असल जिंदगी में उतनी ही संघर्षों से भरी है. बच्चों से दूर रहने का गम हो या परिवार की कोई चिंता, मंच पर कदम रखते ही वे अपनी हर परेशानी भूल जाते हैं. दर्शकों की तालियां और उनके चेहरों की खुशी ही कलाकारों के लिए सबसे बड़ी खुशी बन जाती है. लोगों का मनोरंजन करना ही उनका जुनून और उनकी रोजी-रोटी दोनों है.
देश के हुनर को दे रहे हैं मौका, विदेशी कलाकारों से बनाई दूरीरैंबो सर्कस के कलाकारों का कहना है कि सर्कस में सभी कलाकार भारत के ही हैं. उनका मानना है कि हमारे देश में टैलेंट की कोई कमी नहीं है, इसलिए पिछले दो-तीन वर्षों से वे किसी विदेशी कलाकार को नहीं रखते. भारतीय कलाकारों को ही प्रशिक्षण देकर मंच पर उतारा जाता है. कई कलाकार बचपन से सर्कस की दुनिया से जुड़े हैं और आज इसी कला के दम पर अपने परिवारों का पालन-पोषण कर रहे हैं.
उम्र ढलने पर कलाकारों को चाहिए सरकार का सहाराकलाकारों की एक बड़ी चिंता उनके भविष्य को लेकर भी है. उनका कहना है कि पूरी जिंदगी लोगों का मनोरंजन करने वाले सर्कस कलाकारों को उम्र बढ़ने के बाद आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सरकार से सर्कस को अपेक्षित समर्थन नहीं मिलता. ऐसे में उनकी मांग है कि बुजुर्ग सर्कस कलाकारों के लिए पेंशन या आर्थिक सहायता की विशेष योजना शुरू की जाए, ताकि जीवनभर अपनी कला से लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाने वाले कलाकार वृद्धावस्था में सम्मान के साथ जीवन बिता सकें.
तालियों के बीच छिपा है एक बेहतर कल का सपनाइन कलाकारों की कहानी सिर्फ सर्कस और मनोरंजन की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन माता-पिता के संघर्ष की कहानी है, जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए अपनी खुशियां और आराम तक कुर्बान कर देते हैं. मंच पर कुछ मिनटों की प्रस्तुति के लिए घंटों मेहनत करने वाले ये कलाकार हर दिन यही उम्मीद लेकर आगे बढ़ते हैं कि उनके बच्चों की जिंदगी उनसे बेहतर होगी.
मोबाइल छोड़िए, परिवार के साथ सर्कस का आनंद लीजिएकलाकारों ने दर्शकों से अपील करते हुए कहा कि आज बच्चे हों या बड़े, हर कोई मोबाइल की दुनिया में व्यस्त है. ऐसे समय में परिवार के साथ कुछ पल बिताना बेहद जरूरी है. मोबाइल में खोए रहने के बजाय बच्चों और परिवार को लेकर बाहर निकलें, सर्कस देखें, कलाकारों की मेहनत को महसूस करें और उनके साथ खुशी के कुछ पल साझा करें.



