कानपुर मेडिकल कॉलेज में गर्भवती महिलाओं के योग से 80 प्रतिशत नॉर्मल डिलीवरी, पांच शोध पत्रों में दर्ज हुई सफलता

Last Updated:June 21, 2026, 11:14 IST
वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. सीमा द्विवेदी ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की शारीरिक और मानसिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए विभाग की ओर से विशेष प्रयास किए गए. अस्पताल में इलाज के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच के साथ-साथ योग और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने की सलाह दी गई.पिछले तीन वर्षों में 36 कार्यशालाओं का आयोजन किया गया, जिनमें हजारों महिलाओं ने हिस्सा लिया. औसतन छह महीने से अधिक समय तक योग करने वाली महिलाओं में प्रसव के दौरान काफी अच्छे परिणाम देखने को मिले.
कानपुरः अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर जहां देशभर में लोगों ने स्वस्थ रहने के लिए योग किया, वहीं कानपुर मेडिकल कॉलेज से योग को लेकर एक ऐसी कहानी सामने आई है. जिसने चिकित्सा जगत का ध्यान खींचा है. कानपुर मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एलएलआर अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में पिछले तीन वर्षों के दौरान करीब पांच हजार गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से योग कराया गया.इसका परिणाम यह रहा कि इनमें लगभग 80 प्रतिशत महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी हुई और जन्म लेने वाले बच्चे भी पूरी तरह स्वस्थ पाए गए.
विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. सीमा द्विवेदी ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की शारीरिक और मानसिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए विभाग की ओर से विशेष प्रयास किए गए. अस्पताल में इलाज के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच के साथ-साथ योग और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने की सलाह दी गई.पिछले तीन वर्षों में 36 कार्यशालाओं का आयोजन किया गया, जिनमें हजारों महिलाओं ने हिस्सा लिया. औसतन छह महीने से अधिक समय तक योग करने वाली महिलाओं में प्रसव के दौरान काफी अच्छे परिणाम देखने को मिले.
तीन साल की मेहनत से मिले सकारात्मक परिणाम
प्रो. सीमा द्विवेदी के अनुसार गर्भावस्था के दौरान योग करने से शरीर लचीला बनता है, तनाव कम होता है और महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है.इससे प्रसव के समय होने वाली परेशानियां कम होती हैं और सामान्य प्रसव की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि कई महिलाओं ने योग के कारण प्रसव के दौरान कम दर्द और कम तनाव महसूस किया.डॉक्टरों का कहना है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाता है. गर्भवती महिलाओं के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी साबित हुआ है.
नॉर्मल डिलीवरी से बच्चों को भी मिला लाभ
प्रो. सीमा द्विवेदी ने बताया कि सामान्य प्रसव को प्रकृति का सबसे बेहतर तरीका माना जाता है. जब बच्चा मां के शरीर से सामान्य रूप से जन्म लेता है, तो उसे कई लाभकारी बैक्टीरिया और प्राकृतिक हार्मोनल सहयोग मिलता है. इससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है और शुरुआती विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.उन्होंने बताया कि इस अभियान के दौरान जन्म लेने वाले अधिकांश बच्चों का वजन ढाई से तीन किलोग्राम के बीच रहा, जो स्वस्थ शिशु का संकेत माना जाता है.वहीं सामान्य प्रसव के बाद मां भी जल्दी स्वस्थ हो जाती है और आसानी से बच्चे को स्तनपान करा पाती है.
पांच शोध पत्रों में भी दर्ज हुई सफलता
कानपुर मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ने इस पूरे अभियान पर पांच शोध पत्र भी तैयार किए हैं. इनमें गर्भावस्था के दौरान योग के प्रभाव और सामान्य प्रसव की बढ़ती दर का अध्ययन किया गया है. डॉक्टरों का मानना है कि यदि अधिक से अधिक महिलाएं विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार गर्भावस्था में योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, तो सिजेरियन डिलीवरी की आवश्यकता कम हो सकती है और मां व बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रह सकता है. चिकित्सकों के अनुसार योग को केवल एक दिन तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए. गर्भवती महिलाओं के लिए यह स्वस्थ और सुरक्षित मातृत्व की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हो सकता है.
About the AuthorRajneesh Kumar Yadav
मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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