अंबाला में क्यों बढ़ रहे कानों के मरीज? ये 2 गलतियां घातक, आप भी तो नहीं कर रहे ये काम

Last Updated:June 29, 2026, 22:42 IST
Ambala News : कानों की सफाई को लेकर अपनाए जा रहे गलत तरीके लोगों को संक्रमण की ओर धकेल रहे हैं. अंबाला के सरकारी अस्पताल में कान संबंधी शिकायतों के साथ पहुंचने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. लोकल 18 से अंबाला के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. जितेंद्र वर्मा बताते हैं कि अक्सर लोग लोग कानों की सफाई के लिए ईयर बड्स (कॉटन स्टिक) और हाइड्रोजन पेरॉक्साइड का इस्तेमाल करते हैं, जो कई बार फायदे की बजाय नुकसान पहुंचाता है. ईयर बड्स का अधिक इस्तेमाल कान की नली में छोटे-छोटे घाव बना सकता है.
अंबाला. बदलती जीवनशैली के साथ लोगों की छोटी-छोटी लापरवाहियां अब उनकी सेहत पर भारी पड़ने लगी हैं. खासकर कानों की सफाई को लेकर अपनाए जा रहे गलत तरीके लोगों को संक्रमण और सुनने की क्षमता में कमी जैसी गंभीर समस्याओं की ओर धकेल रहे हैं. अंबाला छावनी के नागरिक अस्पताल में इन दिनों कान संबंधी शिकायतों के साथ पहुंचने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. अस्पताल की ओपीडी में रोजाना ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जो कान दर्द, संक्रमण, कम सुनाई देना और कान में मैल जमने जैसी परेशानियों से जूझ रहे हैं.
पानी चला जाए तो…
लोकल 18 से अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. जितेंद्र वर्मा बताते हैं कि अधिकांश लोग कानों की सफाई के लिए ईयर बड्स (कॉटन स्टिक) और हाइड्रोजन पेरॉक्साइड का बिना चिकित्सकीय सलाह के इस्तेमाल करते हैं, जो कई बार फायदे की बजाय नुकसान पहुंचाता है. कान बेहद संवेदनशील अंग है और इसकी सफाई गलत तरीके से करने पर कान की नली और पर्दे दोनों को नुकसान पहुंच सकता है. डॉ. वर्मा के मुताबिक, कानों का सबसे बड़ा दुश्मन पानी है. नहाते समय लोग अक्सर कानों में सीधे पानी डालते हैं या तेज धार से पानी पहुंच जाता है, जिससे कान के भीतर नमी बनी रहती है. यही नमी आगे चलकर बैक्टीरिया और फंगस के संक्रमण का कारण बनती है. अगर कान में पानी चला जाए तो उसे प्राकृतिक तरीके से बाहर निकलने देना चाहिए. किसी भी नुकीली वस्तु से सफाई करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.
डॉ. वर्मा बताते हैं कि ईयर बड्स का अधिक इस्तेमाल कान की नली में छोटे-छोटे घाव बना सकता है. कई बार इससे कान का मैल बाहर निकलने के बजाय और अंदर चला जाता है, जिससे सुनने में दिक्कत होने लगती है. हाइड्रोजन पेरॉक्साइड का उपयोग भी केवल विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए. यदि कान में पहले से घाव, संक्रमण या पर्दे में कोई समस्या हो तो इसका इस्तेमाल स्थिति को और गंभीर बना सकता है. डॉ. जितेंद्र वर्मा बताते हैं कि आयुर्वेद में कानों की देखभाल के लिए कर्णपूरण नामक प्रक्रिया का वर्णन मिलता है. इसमें औषधीय तेलों के माध्यम से कानों की सफाई और देखभाल की जाती है.
फिर क्या करें
डॉ. वर्मा कहते हैं कि शार्क तेल और अंबामर तेल जैसे आयुर्वेदिक तेल कानों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं, लेकिन इनका उपयोग भी चिकित्सकीय सलाह के बाद ही करना चाहिए. अगर कान में दर्द, लगातार खुजली, कम सुनाई देना या मैल जमा होने की समस्या महसूस हो तो घरेलू उपाय अपनाने की बजाय तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ या चिकित्सक से जांच करानी चाहिए. समय पर सही उपचार और सावधानी अपनाकर कानों से जुड़ी गंभीर समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है.
About the AuthorPriyanshu Gupta
प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें
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