शर्मिला टैगोर ने बच्चों को दी इस्लाम की तालीम, बेटी सबा पटौदी ने बताया क्यों नहीं अपनाया हिंदू धर्म- ‘घर में कोई मंदिर नहीं था’

Last Updated:August 15, 2026, 20:01 IST
सोनाक्षी सिन्हा ने जहीर इकबाल से शादी की, मगर इस्लाम धर्म कुबूल नहीं किया. वे शादी के बाद भी हिंदू धर्म की रीति-रिवाजों को अपनाती हैं. हालांकि, जब शर्मिला टैगोर ने मंसूर अली खान पटौदी से शादी की थी, तब अपना धर्म भी बदल लिया था. उन्होंने अपने बच्चों को भी इस्लाम की तालीम दी. हालांकि, सैफ और सोहा धार्मिक मान्यताओं को लेकर थोड़ा उदारवादी हैं. मगर उनकी बहन सबा पटौदी सिर्फ इस्लाम को मानती हैं. उन्होंने अब अपनी मां की तालीम और हिंदू धर्म को न अपनाने की वजह बताई.
नई दिल्ली: सोनाक्षी सिन्हा सहित कई हीरोइनों ने दूसरे धर्म में शादी की, जिसे समाज आसानी से स्वीकार नहीं कर पाया. नतीजतन, उन्हें वक्त-बेवक्त लोगों की आलोचनाओं और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा. हालांकि, कुछ रिश्ते वक्त के साथ मजबूत हुए. उन्होंने तमाम दावों को गलत साबित किया. शर्मिला टैगोर भी उन शख्सियतों में शामिल हैं. उन्होंने दिग्गज क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी से निकाह किया था. उन्होंने सोनाक्षी सिन्हा के उलट शादी के बाद इस्लाम को अपनाया. अब एक्ट्रेस की बड़ी बेटी सबा पटौदी ने बताया कि उनकी मां शर्मिला टैगोर ने उन्हें और उनके भाई-बहन को क्यों इस्लाम की तालीम दी थी. (फोटो साभार: Instagram@sabapataudi)
शर्मिला टैगोर ने ही अपने बच्चों को इस्लाम से परिचित कराया. सबा पटौदी ने यूट्यूब चैनल ‘बिग बॉलीवुड बफ्स’ पर कहा कि चूंकि सैफ और सोहा अली खान ने अलग धर्म के लोगों से शादी की है, इसलिए वे धर्म को लेकर बहुत सख्त नहीं हैं. वे आगे कहती हैं, ‘अपने लिए कहूंगी कि मेरा धर्म इस्लाम है और मैं इससे जुड़ाव महसूस करती हूं. मैं आध्यात्मिक हूं क्योंकि अगर मैं भगवान के बारे में सोचूं, तो शायद मैं अल्लाह का नाम लूंगी. इसका मतलब यह नहीं है कि मैं दूसरे धर्मों का सम्मान नहीं करती.'(फोटो साभार: Instagram@sabapataudi)
शर्मिला टैगोर ने शादी के बाद इस्लाम कुबूल किया और अपने बच्चों को इसकी तालीम दी. सबा ने फिर हिंदु धर्म न अपनाने की वजह बताई. वे बोलीं, ‘उन्होंने तालीम दी, ताकि हम उलझन में न पड़ें और हमारी मजबूत नींव हो. इसलिए हमारे घर में कोई मंदिर नहीं था और न ही हम हिंदू धर्म का पालन करते थे.’ (फोटो साभार: Instagram@sabapataudi)
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सबा पटौदी आगे कहती हैं, ‘मां ने असल में मुझे मेरे धर्म के बारे में सिखाया और इस्लाम, रमजान और ऐसी चीजों की समझ दी. फिर हमारी मर्जी थी कि हम क्या मानना चाहते हैं.’ उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता ने कभी भी उन पर या उनके भाई-बहनों पर किसी धर्म को मानने के लिए दबाव नहीं डाला. (फोटो साभार: Instagram@sabapataudi)
सबा के भाई-बहनों ने अलग धर्म के लोगों से शादी की है. सबा कहती हैं, ‘मुझे नहीं लगता कि कोई भी किसी चीज का बहुत सख्ती से पालन कर रहा है. लेकिन मुझे लगता है कि आस्था एक बहुत ही निजी चीज है. यह ऐसी चीज नहीं है जिसे कोई किसी पर थोप सके. यह आपकी मर्जी है कि आप किस चीज को अपनाते हैं.’ (फोटो साभार: Instagram@sabapataudi)
सबा पटौदी अपने भाई-बहनों के साथ क्रिसमस, दिवाली, होली सहित तमाम त्योहार मनाते हुए बड़ी हुई हैं. वे कहती हैं, ‘मुझे लगता है कि मेरे माता-पिता ने कभी भी कोई खास धर्म हम पर नहीं थोपा. मुझे लगता है कि यह सही है. मुझे लगता है कि हर माता-पिता को अपने बच्चे के साथ ऐसा ही करना चाहिए.’ (फोटो साभार: Instagram@sabapataudi)
सबा पटौदी का जन्म 1 मई 1976 को हुआ था और वह 50 साल की हैं. अपनी एक्टर मां और भाई-बहनों के उलट सबा पटौदी ने एक्टर न बनने का फैसला किया. वे एक ज्वेलरी डिजाइनर हैं. वे एक टैरो रीडर और स्पिरिचुअल हीलर भी हैं. वे भोपाल के रॉयल एंडोमेंट ट्रस्ट की चीफ कस्टोडियन भी हैं. (फोटो साभार: Instagram@sabapataudi)
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August 15, 2026, 20:01 IST



