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स्वाद ऐसा कि… एक बार चखा तो भूल नहीं पाएंगे, मुल्तानी मिट्टी और सफेद चूना में पककर तैयार होते हैं सफेद चने

Last Updated:July 01, 2026, 12:55 IST

Barmer Multani Mitti Chana: बाड़मेर के पारंपरिक और स्वादिष्ट सफेद चनों की मांग अब राजस्थान के साथ-साथ गुजरात तक बढ़ गई है. इन चनों को किसी फैक्ट्री में नहीं, बल्कि भट्टी पर मुल्तानी मिट्टी और सफेद चूने के मिश्रण में पारंपरिक तरीके से भूनकर तैयार किया जाता है. इस देसी तकनीक से चनों में अनोखा कुरकुरापन और सौंधी खुशबू आती है. नारायण अग्रवाल के अनुसार, 200 रुपये प्रति किलो बिकने वाले इन चनों की रोजाना करीब 300 किलो तक बिक्री होती है.

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Barmer: पश्चिमी राजस्थान की धरती सिर्फ अथाह रेत और तपती गर्मी के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनोखे व पारंपरिक स्वादों के लिए भी दुनिया भर में जानी जाती है. इस रेतीले इलाके के बाड़मेर जिले में मुल्तानी मिट्टी में विशेष तरीके से पकाए जाने वाले सफेद चने इन दिनों लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं. पूरी तरह से देसी और पारंपरिक तकनीक से तैयार होने वाले इन चनों का स्वाद और कुरकुरापन इतना लाजवाब होता है कि इनकी मांग अब राजस्थान की सीमाओं को पार कर पड़ोसी राज्य गुजरात तक पहुंच गई है.

रेगिस्तान की यह अनमोल धरती अपनी अनूठी संस्कृति, खानपान और ऐतिहासिक परंपराओं के लिए विख्यात है. इन्हीं विशिष्ट परंपराओं में शामिल हैं बाड़मेर के प्रसिद्ध सफेद चने, जिनका स्वाद और बनाने का तरीका दोनों ही अपने आप में बेहद अनूठे हैं. सबसे खास बात यह है कि ये चने किसी आधुनिक मशीन या फैक्ट्री में नहीं, बल्कि सदियों पुराने पारंपरिक तरीके से मुल्तानी मिट्टी और भट्टी की आंच में पकाकर तैयार किए जाते हैं. यही वजह है कि बाड़मेर के इन चनों का स्वाद चखने वाले लोग इसके मुरीद हो जाते हैं.

मुल्तानी मिट्टी में सफेद चूना मिलाकर भट्टी पर पकाते हैं चनेइन स्वादिष्ट सफेद चनों को तैयार करने की प्रक्रिया बेहद रोचक और कड़ी मेहनत से भरी होती है. सबसे पहले चनों को एक बड़े मिक्सर में सादे नमक और पानी के साथ अच्छी तरह से मिलाया जाता है. इसके बाद इन्हें कड़क धूप में सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है. जब ये चने पूरी तरह से सूख जाते हैं, तब इन्हें भट्टी पर मुल्तानी मिट्टी के साथ पकाया जाता है.

इस पकाने की प्रक्रिया के दौरान मिट्टी में विशेष रूप से सफेद चूना भी मिलाया जाता है. चूना मिलाने की वजह से ही चनों का रंग एकदम निखरकर सफेद हो जाता है और उनमें एक विशेष सौंधी खुशबू व बेहतरीन कुरकुरापन आ जाता है.

200 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकते हैं चने, रोजाना 300 किलो की भारी बिक्रीबाड़मेर में चने का बड़े स्तर पर व्यापार करने वाले नारायण अग्रवाल के मुताबिक, सही मात्रा में मुल्तानी मिट्टी, चूने का लेप और भट्टी की गर्मी का सटीक संतुलन ही इन चनों के असली स्वाद का सबसे बड़ा राज है. वे बताते हैं कि यह प्रीमियम सफेद चने बाजार में करीब 200 रुपये प्रति किलो के भाव से बिकते हैं. अपने अनोखे स्वाद और बेहतरीन गुणवत्ता के कारण स्थानीय बाजारों और प्रवासियों में इसकी मांग लगातार बनी रहती है.

इस पारंपरिक व्यवसाय से क्षेत्र के कई परिवार पिछले कई दशकों से जुड़े हुए हैं. पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही यह कला आज भी अपने मूल और पारंपरिक स्वरूप में जीवित है. नारायण अग्रवाल के अनुसार, बाड़मेर के ये सफेद चने पूरे राजस्थान में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं और वे बाड़मेर में इसके मैन्युफैक्चरिंग का बड़े पैमाने पर काम करने वाले एकमात्र शख्स हैं. उनके मुताबिक, उनकी दुकान से रोजाना करीब 300 किलो सफेद चनों की धड़ल्ले से बिक्री हो जाती है, जो इसकी लोकप्रियता को साबित करता है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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