घर में RO है फिर भी उबालकर पिएं पानी… जानिए मानसून में पीलिया से बचने के लिए डॉक्टर की 5 बड़ी सलाह

Monsoon Health Tips: बारिश का मौसम आते ही जहां लोगों को गर्मी से राहत मिलती है, वहीं दूसरी तरफ दूषित पानी और खानपान में लापरवाही कई बीमारियों को न्योता दे सकती है. दरअसल बरसात के दिनों में जलभराव, सीवर लाइन की लीकेज और पेयजल पाइपलाइन में गंदगी मिलने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. यही वजह है कि इन दिनों पीलिया और लिवर से जुड़ी समस्याओं को लेकर लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. बता दें कि अंबाला के शहजादपुर क्षेत्र में पीलिया के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय है. वहीं नागरिक अस्पतालों में भी बारिश के दौरान लिवर इंफेक्शन और पीलिया से जुड़े मरीज पहुंच रहे हैं.
इस बारे में लोकल 18 की टीम ने अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में कार्यरत होम्योपैथिक डॉ. रजिता से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि पीलिया के कई मामलों में दूषित पानी और खराब स्वच्छता अहम कारण बनते हैं. खासकर बारिश के दौरान जब कहीं पेयजल पाइपलाइन में सीवर का पानी मिल जाता है या पानी की सप्लाई दूषित हो जाती है, तो हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस-ई जैसे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में लोगों को बारिश के दिनों में पानी को लेकर बिल्कुल भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. उन्होंने सलाह दी कि घर में आरओ या वॉटर फिल्टर लगा होने के बावजूद पानी को उबालकर पीना सुरक्षित आदत हो सकती है, क्योंकि बाहर से आने वाले पानी की गुणवत्ता को लेकर थोड़ी भी शंका हो तो उसे सीधे पीने के बजाय उबालकर इस्तेमाल करना बेहतर है.
बाहर का खुला खाना और अधपका भोजन करने से बचेंडॉ. रजिता के अनुसार बारिश के मौसम में वायरल और जलजनित संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं. ऐसे में खुले में बिकने वाला खाना, कटे हुए फल और अस्वच्छ स्थानों पर तैयार खाद्य पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए. बाजार से सब्जियां और फल खरीदकर लाने के बाद उन्हें अच्छी तरह धोना चाहिए. उन्होंने कहा कि भोजन को अच्छी तरह पकाकर ही खाना चाहिए. अधपका या लंबे समय तक रखा हुआ खाना शरीर के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. इस मौसम में ताजा, हल्का और घर का बना भोजन लेना ज्यादा बेहतर है. तली-भुनी और ज्यादा मसालेदार चीजों से भी दूरी बनानी चाहिए.
पीलिया के प्रमुख लक्षण: इन्हें बिल्कुल न करें नजरअंदाजउन्होंने बताया कि पीलिया के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी होता है. इसलिए आंखों का सफेद हिस्सा पीला होना और त्वचा का रंग पीला पड़ना इसके प्रमुख संकेत हैं. इसके अलावा पेशाब का रंग सामान्य से ज्यादा गहरा होना, भूख कम लगना, जी मिचलाना, उल्टी, थकान और कमजोरी महसूस होना भी पीलिया के लक्षण हो सकते हैं. कुछ मरीजों को पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में हल्का दर्द भी महसूस हो सकता है. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपचार के भरोसे रहने के बजाय डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए, क्योंकि पीलिया के अलग-अलग कारण हो सकते हैं और इलाज भी कारण के अनुसार तय किया जाता है.
पीलिया में कैसा हो खानपान और परहेज?डॉ. रजिता ने बताया कि पीलिया या लिवर संक्रमण के दौरान भोजन हल्का और आसानी से पचने वाला होना चाहिए. मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया, हल्की दाल और ताजा घर का बना भोजन लिया जा सकता है. शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए पर्याप्त स्वच्छ तरल पदार्थ लेना जरूरी है. नारियल पानी और सादा नींबू पानी जैसे पेय भी लिए जा सकते हैं. हालांकि गन्ने का रस, कच्ची सब्जियों का रस या किसी घरेलू नुस्खे को पीलिया का इलाज नहीं समझना चाहिए, क्योंकि बाहर मिलने वाले पेय पदार्थों में स्वच्छता का अभाव संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है.
बचाव ही सबसे बड़ा इलाज: डॉक्टर की अंतिम सलाहउन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में पीलिया से बचाव का सबसे बड़ा तरीका साफ पानी, स्वच्छ भोजन और हाथों की सफाई है. इसलिए पानी को उबालकर पीना, बाहर का खुला खाना न खाना, फल-सब्जियों को अच्छी तरह धोना और भोजन को पूरी तरह पकाना जरूरी है. इसके साथ ही अगर आंखों या त्वचा में पीलापन नजर आए या पेशाब का रंग लगातार गहरा रहे तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए.



