शादी तय, गहने तय… लेकिन PM की अपील के बाद परिवारों ने रोक दी खरीदारी, उदयपुर बाजार में हलचल

उदयपुर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोना नहीं खरीदने को लेकर चल रही चर्चाओं का असर अब उदयपुर के सर्राफा बाजार में भी दिखाई देने लगा है. शहर के सोना-चांदी व्यापारियों का कहना है कि पहले ही सोने और चांदी के दाम काफी बढ़े हुए हैं, ऊपर से इस तरह की चर्चाओं के बाद लोग खरीदारी करने से बच रहे हैं. इसका असर बाजार की रौनक पर साफ नजर आ रहा है और व्यापारियों की चिंता भी बढ़ने लगी है.
जब लोकल-18 की टीम उदयपुर के बड़ा बाजार इलाके में पहुंची तो कई दुकानदार ग्राहकों की कमी को लेकर परेशान दिखाई दिए. बड़ा बाजार स्थित पोरवाल ज्वेलर्स के संचालक राजेंद्र पोरवाल ने बताया कि महंगे दामों की वजह से पहले ही व्यापार धीमा चल रहा था, लेकिन अब ग्राहक खरीदारी करने से पहले कई बार सोच रहे हैं. उन्होंने कहा कि लोग दुकान तक तो आ रहे हैं, लेकिन पहले जैसी खरीदारी नहीं कर रहे, जिससे कारोबार पर असर पड़ रहा है.
कारीगरों पर भी पड़ रहा असर
बंगाल से उदयपुर आए कारीगर रमेश ने बताया कि वह पिछले दो साल से यहां गहने बनाने का काम कर रहे हैं. रमेश का कहना है कि जैसे ही यह चर्चा शुरू हुई, पिछले तीन दिनों से उनके पास एक भी नया काम नहीं आया. उन्होंने कहा कि अगर इसी तरह काम बंद रहा तो बाहर रहकर परिवार चलाना मुश्किल हो जाएगा. कारीगरों की रोजी-रोटी पूरी तरह बाजार पर निर्भर होती है और मंदी का असर सबसे पहले उन्हीं पर दिखाई देता है.
उदयपुर शहर की रहने वाली पुष्पा कुंवर ने बताया कि जब प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की है तो उन्होंने इस साल नया सोना नहीं खरीदने का फैसला किया है. उनका कहना है कि घर में रखा पुराना सोना ही जरूरत के समय इस्तेमाल किया जाएगा. उन्होंने कहा कि शादी-ब्याह और दूसरे कामों में पुराने गहनों को दोबारा काम में लिया जा सकता है.
लोगों में दिख रहा अलग-अलग नजरियाउदयपुर के व्यापारी जयेश चंपावत ने बताया कि उनके घर में शादी है और उन्हें भी गहने खरीदने थे, लेकिन जिस तरह परिवार का मुखिया हर समस्या पर सोच-समझकर फैसला करता है, उसी तरह प्रधानमंत्री ने भी देशहित में कोई बात कही होगी. उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की है तो उसके पीछे जरूर कोई बड़ा कारण होगा, इसलिए वह भी उनकी बात मानेंगे.
वहीं उदयपुर निवासी गोरखपुर वाले ने कहा कि जब लोगों ने मोदी जी के कहने पर थालियां बजाईं, दीपक जलाए और कई अपीलों का समर्थन किया, तो अगर देशहित में एक साल सोना नहीं खरीदने की बात कही जा रही है, तो लोग उसका भी समर्थन कर सकते हैं. उनका कहना है कि अगर इससे देश को फायदा होता है तो यह फैसला गलत नहीं माना जाएगा.
उधर शहर के एडवोकेट विशाल अग्रवाल ने बताया कि उनके घर में शादी है और उन्हें बहू के लिए गहने खरीदने थे, लेकिन अभी बाजार का माहौल देखकर लोग असमंजस में हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय परिवारों में शादी और शुभ अवसरों पर सोने-चांदी के गहनों का खास महत्व होता है, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों और अब इस तरह की चर्चाओं ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि अगर यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो आने वाले दिनों में कारोबार पर और ज्यादा असर पड़ सकता है. वहीं दूसरी तरफ कारीगरों को भी रोजगार और कामकाज की चिंता सताने लगी है.



