कभी घरों में दवा की तरह इस्तेमाल होती थी ये कड़वी चीज, आज लोग नाम तक भूल गए, जानें कैसे खाते थे दादी-नानी

आज घर में छोटी-मोटी परेशानी होने पर तुरंत दवा की तरफ हाथ जाता है, लेकिन कुछ दशक पहले भारतीय रसोई में ही कई ऐसे मसाले और चीजें रखी होती थीं, जिन्हें पारंपरिक तौर पर घरेलू नुस्खों में इस्तेमाल किया जाता था. इन्हीं में से एक है पीपली. स्वाद में तीखी और थोड़ी कड़वी लगने वाली पीपली का इस्तेमाल आयुर्वेदिक परंपरा में लंबे समय से किया जाता रहा है. दादी-नानी के समय में इसे सिर्फ मसाले की तरह नहीं, बल्कि कई घरेलू तैयारियों का हिस्सा माना जाता था.
पीपली को Long Pepper भी कहा जाता है. इसका आकार सामान्य काली मिर्च से अलग और लंबा होता है. इसका स्वाद तेज, गर्म और थोड़ा कड़वा-तीखा होता है. पुराने समय में इसे घर की मसाला डिब्बी में रखा जाता था और जरूरत के हिसाब से बहुत कम मात्रा में इस्तेमाल किया जाता था.
भारतीय पारंपरिक चिकित्सा में पीपली को खास महत्व मिला है. इसे खासकर सर्दी-जुकाम, गले से जुड़ी परेशानी और पाचन से जुड़े पारंपरिक नुस्खों में इस्तेमाल किए जाने का उल्लेख मिलता है. हालांकि किसी बीमारी का इलाज करने के लिए इसे खुद से इस्तेमाल करना सही नहीं है.
दादी-नानी कैसे करती थीं इस्तेमाल?
पुराने घरों में पीपली को अक्सर कूटकर या पीसकर इस्तेमाल किया जाता था. इसे चुटकी भर मात्रा में शहद के साथ लेने की घरेलू परंपरा कुछ जगहों पर रही है. कुछ लोग इसे अदरक और दूसरी मसालों के साथ गर्म पेय में भी डालते थे.
एक आसान पारंपरिक तरीका यह है कि पीपली को हल्का कूटकर बहुत कम मात्रा में गर्म पानी में उबाला जाए. इसमें अदरक या सौंफ भी मिलाई जा सकती है. इसे छानकर गुनगुना पिया जाता था. इसका स्वाद काफी तेज होता है, इसलिए ज्यादा मात्रा डालना जरूरी नहीं है.
कड़वी-तीखी होने के बावजूद क्यों थी इतनी खास?
पुराने समय में रसोई और घरेलू देखभाल का रिश्ता काफी गहरा था. मौसम बदलने पर घर में इस्तेमाल होने वाले मसालों को सिर्फ स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं देखा जाता था. पीपली, अजवाइन, सोंठ और काली मिर्च जैसी चीजें इसी पारंपरिक सोच का हिस्सा थीं.
हालांकि यह समझना जरूरी है कि पारंपरिक इस्तेमाल और आधुनिक चिकित्सा में किसी बीमारी के इलाज के प्रमाण एक ही बात नहीं हैं. पीपली को किसी गंभीर समस्या की दवा समझकर लेना उचित नहीं है.
इस्तेमाल करते समय रखें सावधानी
पीपली का स्वाद और प्रभाव तेज माना जाता है, इसलिए इसे अधिक मात्रा में लेने से बचना चाहिए. गर्भवती महिलाओं, बच्चों, पेट या लिवर से जुड़ी समस्या वाले लोगों और नियमित दवाएं लेने वालों को इसे घरेलू उपचार के तौर पर इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए



