‘यह युद्ध की खुली तैयारी’, NATO ने ऐसा क्या किया कि भड़क गया एक और कुंभकर्ण – north korea angry over nato fuel supply chain capability programe plan

Last Updated:August 01, 2026, 12:36 IST
NATO vs North Korea: दुनिया फिलहाल दो युद्ध के दौर से गुजर रही है. एम तरफ रूस-यूक्रेन और दूसरी तरफ अमेरिका-ईरान के बीच जंच चल रही है. इस बीच NATO ने ऐसा कदम उठाया जिससे नॉर्थ कोरिया भड़क गया है. यह एक और युद्ध की चेतावनी तो नहीं है?उत्तर कोरिया ने NATO के एक कदम से बौखला गया है. (फाइल फोटो)
NATO vs North Korea: रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान जंग अभी तक समाप्त नहीं हुई है, लेकिन तीसरे युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है. उत्तर कोरिया अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में जी जान से लगा है. हाल ही में उसने कई लंबी दूरी के मिसाइलों का परीक्षण भी किया. इन सबके बीच, नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) की ओर से कुछ ऐसा फैसला लिया गया है, जिससे वो नाराज हो गया है. NATO की हाल ही में स्वीकृत ‘फ्यूल सप्लाई चेन कैपेबिलिटी प्रोग्राम प्लान’ की कड़ी आलोचना करते हुए इसे युद्ध की पूरी तैयारी और गठबंधन के अधिक आक्रामक सैन्य गुट में बदलने का प्रमाण बताया है.
नॉर्थ कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी KCNA की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब NATO ने पिछले महीने ‘फ्यूल सप्लाई चेन कैपेबिलिटी प्रोग्राम प्लान को मंजूरी दी. इस योजना का उद्देश्य यूरोप में शीत युद्ध काल के सैन्य ईंधन पाइपलाइन और स्टोरेज नेटवर्क का आधुनिकीकरण और विस्तार करना है. योनहाप समाचार एजेंसी के अनुसार, यह टिप्पणी संकेत देती है कि यूक्रेन युद्ध में रूस के समर्थन के लिए अपने सैनिक भेजने वाले उत्तर कोरिया की नजर NATO की सैन्य गतिविधियों पर लगातार बनी हुई है. दूसरी ओर, NATO यूक्रेन को सैन्य सहायता देना जारी रखे हुए है. केसीएनए की टिप्पणी में कहा गया, ‘शुरुआत में सदस्य देशों के बीच भारी लागत को लेकर मतभेद थे, लेकिन आखिरकार उन्हें दूर कर लिया गया. इससे स्पष्ट होता है कि नाटो युद्ध के लिए रणनीतिक ईंधन भंडार को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हुए उस पर जोर दे रहा है.’
उत्तर कोरिया का दावा
उत्तर कोरिया ने यह भी दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया NATO की इस योजना को रूस के साथ युद्ध की तैयारी के रूप में देख रहा है. केसीएनए ने आरोप लगाया कि इस पहल का वास्तविक उद्देश्य भविष्य के संघर्षों के लिए ईंधन और अन्य सैन्य सामग्री का बड़े पैमाने पर भंडारण करना है. इसमें कहा गया है कि संक्षेप में NATO की मंशा पर्याप्त ईंधन और अन्य युद्ध सामग्री जमा कर दुनिया के किसी भी हिस्से में कभी भी युद्ध की आग भड़काने की है. NATO की स्थापना के बाद कई दशक बीत चुके हैं, लेकिन उसने पहले कभी इतनी खुली तरह युद्ध की तैयारी नहीं की थी. उत्तर कोरिया ने NATO पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का भी आरोप लगाया. उसके अनुसार, गठबंधन “डीपीआरके (उत्तर कोरिया) के प्रति शत्रुतापूर्ण देशों के साथ मिलकर कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास लगातार उकसावे वाले सैन्य प्रदर्शन करता है.
सैन्य अभ्यास का हवाला
नॉर्थ कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी न हाल ही में हवाई द्वीपसमूह और उसके आसपास संपन्न द्विवार्षिक रिम ऑफ द पैसिफिक (रिमपैक) सैन्य अभ्यास का भी उल्लेख किया गया, जिसमें जर्मनी, इटली सहित कई नाटो सदस्य देशों ने हिस्सा लिया था. उत्तर कोरिया ने इसे इस बात का प्रमाण बताया कि नाटो एशिया-प्रशांत क्षेत्र को भी संभावित युद्धक्षेत्र के रूप में देखता है. केसीएनए ने कहा, ‘युद्ध को लेकर खासा उत्साहित सैन्य गुट के रूप में नाटो का वास्तविक स्वरूप अब और अधिक स्पष्ट होता जा रहा है. युद्ध को बढ़ावा देना, नाटो के अपने पतन को तेज करना है.’
About the AuthorManish Kumar
बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…
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August 01, 2026, 12:36 IST



