सिर्फ 1 सेंटीमीटर के तिरंगे में दिखी भारत की एकता, ओम, अल्लाह, खंडा और क्रॉस से दिया कौमी एकता का अनोखा संदेश

Last Updated:August 12, 2026, 14:04 IST
Udaipur Hindi News: इस अनोखे तिरंगे को तैयार करने में डॉ. सक्का ने करीब 1 ग्राम चांदी और 1 ग्राम तांबे का इस्तेमाल किया है. इतनी छोटी कलाकृति में धार्मिक प्रतीकों को बारीकी से उकेरना आसान नहीं था. इसे तैयार करने में करीब 36 घंटे का समय लगा। बेहद छोटे आकार और बारीक कारीगरी के कारण यह कलाकृति अपने आप में खास बन गई है.
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उदयपुर: उदयपुर के अंतरराष्ट्रीय शिल्पी और प्रोफेसर डॉ. इकबाल सक्का ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपनी अनोखी कला के जरिए एक बार फिर कौमी एकता और विश्व शांति का संदेश दिया है. डॉ. सक्का ने महज 1 सेंटीमीटर आकार का तिरंगा झंडा चांदी पर तैयार किया है. यह इतना छोटा है कि इसे सामान्य आंखों से देख पाना मुश्किल है और इसके लिए लेंस की मदद लेनी पड़ती है.
इस छोटी सी कलाकृति की सबसे खास बात इसमें बनाए गए धार्मिक प्रतीक हैं. डॉ. सक्का ने चांदी पर राई के दाने से भी छोटी कटिंग करते हुए हिंदू धर्म के ओम, इस्लाम के अल्लाह, सिख धर्म के खंडा और ईसाई धर्म के क्रॉस को उकेरा है. इन चारों धार्मिक प्रतीकों को तिरंगे के साथ जोड़कर उन्होंने देश की विविधता और एकता को दर्शाने की कोशिश की है.
पूरी दुनिया में भी शांति और सद्भाव कायमडॉ. सक्का का कहना है कि भारत की पहचान ही अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोगों के मिलजुलकर रहने से है. हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी देश की एकता का हिस्सा हैं। इसी सोच को उन्होंने अपनी इस कलाकृति के जरिए सामने रखा है. उनका संदेश है कि जिस तरह भारत में अलग-अलग धर्मों के लोग प्रेम और भाईचारे के साथ रहते हैं, उसी तरह पूरी दुनिया में भी शांति और सद्भाव कायम होना चाहिए.
बारीक कारीगरी के कारण यह कलाकृति अपने आप में खासइस अनोखे तिरंगे को तैयार करने में डॉ. सक्का ने करीब 1 ग्राम चांदी और 1 ग्राम तांबे का इस्तेमाल किया है. इतनी छोटी कलाकृति में धार्मिक प्रतीकों को बारीकी से उकेरना आसान नहीं था.इसे तैयार करने में करीब 36 घंटे का समय लगा. बेहद छोटे आकार और बारीक कारीगरी के कारण यह कलाकृति अपने आप में खास बन गई है.
सामाजिक और राष्ट्रीय संदेश का माध्यमडॉ. सक्का इससे पहले भी अपनी सूक्ष्म कला के जरिए कई अनोखी कलाकृतियां तैयार कर चुके हैं. उनकी पहचान ऐसी कलाकृतियां बनाने के लिए है, जिनमें बेहद छोटे आकार में अलग-अलग आकृतियों और संदेशों को उकेरा जाता है. इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्होंने तिरंगे को कौमी एकता के संदेश से जोड़कर अपनी कला को एक सामाजिक और राष्ट्रीय संदेश का माध्यम बनाया है.
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तैयार की गई यह छोटी सी कलाकृतिडॉ. सक्का की इच्छा है कि इस अनमोल कलाकृति को राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर को भेंट किया जाए.इसके लिए उन्होंने न्यायालय से पत्र के माध्यम से संपर्क भी किया है. उनका कहना है कि यह कलाकृति केवल एक तिरंगा नहीं है, बल्कि देश की एकता, भाईचारे और विश्व शांति का संदेश देने वाली कला है. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तैयार की गई यह छोटी सी कलाकृति अपने संदेश के मामले में बेहद बड़ी दिखाई देती है.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Udaipur,Rajasthan
First Published :
August 12, 2026, 14:04 IST



