Udaipur News | Udaipur Muharram

Last Updated:June 26, 2026, 13:56 IST
Udaipur News: उदयपुर में मेवाफरोश समाज का अभ्रक से बना अनोखा ताजिया मोहर्रम का मुख्य आकर्षण, रियासतकाल से चली परंपरा, सालभर नक्काशी और मरम्मत का काम चलता है. कुरैशी महासभा के अध्यक्ष रेहान कुरैशी के अनुसार मेवाड़ में ताजियादारी की परंपरा रियासतकाल से चली आ रही है. इसका उल्लेख मेवाड़ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक ग्रंथ ‘वीर विनोद’ में भी मिलता है. उस समय महाराणा की सेना में मुस्लिम सिपाहियों की भी एक पलटन थी. इसी पलटन के नाम पर चेतक सर्किल क्षेत्र में स्थित पलटन मस्जिद प्रसिद्ध हुई, जहां वर्षों से बड़ा ताजिया बनाया जाता रहा है.
उदयपुर. मोहर्रम के अवसर पर निकलने वाले ताजियों की अपनी-अपनी विशेष पहचान होती है, लेकिन उदयपुर का मेवाफरोश समाज द्वारा तैयार किया जाने वाला अभ्रक का ताजिया पूरे राजस्थान में अपनी तरह का इकलौता ताजिया माना जाता है. बारीक नक्काशी, पारंपरिक शिल्पकला और सालभर की मेहनत से तैयार होने वाला यह ताजिया हर वर्ष लोगों के आकर्षण का केंद्र बनता है.
मोहर्रम के दौरान शहर में करीब 20 लाइसेंसी ताजिए निकाले जाते हैं, लेकिन मेवाफरोश समाज का ताजिया अपनी अनूठी बनावट के कारण अलग पहचान रखता है. इसे थर्माकोल, प्लास्टिक या अन्य सजावटी सामग्री से नहीं, बल्कि अभ्रक की परतों से तैयार किया जाता है. यही वजह है कि इसे पूरे प्रदेश का इकलौता अभ्रक का ताजिया कहा जाता है.
रियासतकाल से जुड़ी है ताजियादारी की परंपराकुरैशी महासभा के अध्यक्ष रेहान कुरैशी के अनुसार मेवाड़ में ताजियादारी की परंपरा रियासतकाल से चली आ रही है. इसका उल्लेख मेवाड़ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक ग्रंथ ‘वीर विनोद’ में भी मिलता है. उस समय महाराणा की सेना में मुस्लिम सिपाहियों की भी एक पलटन थी. इसी पलटन के नाम पर चेतक सर्किल क्षेत्र में स्थित पलटन मस्जिद प्रसिद्ध हुई, जहां वर्षों से बड़ा ताजिया बनाया जाता रहा है. अभ्रक का ताजिया तैयार करना बेहद मेहनत और धैर्य का काम होता है. इसके निर्माण में अभ्रक की बड़ी-बड़ी परतों पर छोटी परतों से फूल, बेल-बूटे और अन्य आकृतियां बनाई जाती हैं. इसके बाद उन पर और भी महीन परतों से नक्काशी की जाती है. ताजिए में बारादरी, मेहराब, सूरजमुखी के फूल और पारंपरिक मेवाड़ी स्थापत्य कला की झलक दिखाई देती है.
सालभर चलता है सजावट और मरम्मत का कामताजिया बनाने वाले कारीगर पूरे साल इसकी सजावट और मरम्मत का कार्य करते हैं. प्रत्येक वर्ष इसमें नई कलात्मक डिजाइन और नक्काशी जोड़ी जाती है. यही वजह है कि यह केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि मेवाड़ की शिल्प विरासत का भी शानदार नमूना माना जाता है. मोहर्रम में ताजिया हजरत इमाम हुसैन के कर्बला स्थित रोजे का प्रतीक माना जाता है. अकीदतमंद इसे श्रद्धा और सम्मान के साथ देखते हैं. शहर में लाइसेंसी ताजियों के अलावा 40 से अधिक मन्नत के ताजिए भी निकाले जाते हैं. समय के साथ अधिकांश ताजियों में थर्माकोल और हल्की सामग्री का उपयोग बढ़ा है, ताकि उन्हें उठाने और ले जाने में आसानी हो. इसके बावजूद मेवाफरोश समाज ने अभ्रक से ताजिया बनाने की अपनी पारंपरिक कला को आज भी जीवित रखा है. यही वजह है कि मोहर्रम के दौरान यह ताजिया उदयपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का सबसे खास आकर्षण बन जाता है.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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Location :
Udaipur,Rajasthan



