हैदराबाद का अनदेखा खजाना! जानें 400 साल पुराने शिव मंदिर की अनोखी बनावट का राज

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हैदराबाद का अनदेखा खजाना! जानें 400 साल पुराने शिव मंदिर की अनोखी बनावट का राज
Last Updated:April 21, 2026, 01:52 IST
Hyderabad Famous Temples: हैराबाद गचीबोवली में रोड नंबर 1 पर 1662 में बना प्राचीन शिवालयम, रथनुमा ढांचा, समुद्र मंथन की नक्काशी, विशाल मूर्तियां और गौशाला के साथ शांति का बड़ा केंद्र. इस मंदिर का इतिहास बेहद पुराना और गौरवशाली है. मंदिर की दीवारों पर दर्ज जानकारी के अनुसार इसका निर्माण सन् 1662 में हुआ था. यानी जब हैदराबाद के कई आधुनिक इलाके अस्तित्व में भी नहीं थे तब से यह मंदिर यहाँ अपनी आध्यात्मिक आभा बिखेर रहा है.
हैदराबाद का गचीबोवली इलाका अपनी गगनचुंबी इमारतों और भागती-दौड़ती कॉरपोरेट लाइफ के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. लेकिन इसी शोर-शराबे के बीच एक ऐसी जगह छिपी है जो आपको सदियों पीछे ले जाती है. रोड नंबर 1 की गलियों में स्थित यह प्राचीन शिवालयम किसी हिडन जेम से कम नहीं है. स्थानीय लोगों और आईटी प्रोफेशनल्स के लिए यह मंदिर मानसिक शांति का एक बड़ा केंद्र बनता जा रहा है.
इस मंदिर का इतिहास बेहद पुराना और गौरवशाली है. मंदिर की दीवारों पर दर्ज जानकारी के अनुसार इसका निर्माण सन् 1662 में हुआ था. यानी जब हैदराबाद के कई आधुनिक इलाके अस्तित्व में भी नहीं थे तब से यह मंदिर यहाँ अपनी आध्यात्मिक आभा बिखेर रहा है. 400 साल पुराना होने के बावजूद इसकी बनावट आज भी मजबूती से खड़ी है जो प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करती है.
मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका रथनुमा ढांचा है. मंदिर का एक मुख्य हिस्सा इस तरह डिजाइन किया गया है जैसे कोई विशाल पत्थर का रथ खड़ा हो. प्राचीन काल में रथ के आकार के मंदिर बहुत कम बनाए जाते थे जो इस मंदिर को विशेष श्रेणी में खड़ा करता है. इस रथ को बारीक नक्काशी और कलाकृतियों से सजाया गया है जिसे देखकर भक्त मंत्रमुग्ध हो जाते हैं.
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रथ की दीवारों पर पौराणिक कथाओं को बहुत ही सजीव तरीके से उकेरा गया है. इसके एक ओर यानी समुद्र मंथन का पूरा दृश्य पत्थरों पर तराशा गया है. इसमें देवताओं और असुरों द्वारा वासुकी नाग की मदद से समुद्र को मथते हुए दिखाया गया है. साथ ही बीच में भगवान शिव द्वारा संसार की रक्षा के लिए विष पीने के दृश्य को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया है.
मंदिर के भीतर कदम रखते ही भक्त यहाँ की विशाल मूर्तियों को देखकर दंग रह जाते हैं. यहाँ स्थापित देवी-देवताओं की प्रतिमाएं सामान्य से काफी बड़ी हैं जिनकी ऊंचाई 12 से 15 फीट तक है. गर्भगृह में भगवान राम की प्रतिमा के साथ-साथ भगवान गणेश और हनुमान जी के भव्य विग्रह मौजूद हैं. मंदिर के चारों ओर मुक्कोटी करोड़ों.देवताओं की उपस्थिति का अनुभव होता है.
मुख्य शिवालय के ठीक बगल में कालिका माता का एक अत्यंत प्रभावशाली और बड़ा विग्रह स्थापित है. इस मंदिर की एक और खास बात यहाँ की परंपरा है. कई बड़े मंदिरों में भक्तों को गर्भगृह में जाने की अनुमति नहीं होती लेकिन यहाँ श्रद्धालु स्वयं अपने हाथों से शिवलिंग और कालिका माता का अभिषेक कर सकते हैं. विशेष पूजा के दौरान यह अनुभव भक्तों को भगवान से सीधा जोड़ता है.
मंदिर परिसर में केवल मूर्तियां ही नहीं बल्कि एक छोटी और सुंदर गौशाला भी बनाई गई है. गचीबोवली जैसे कंक्रीट के जंगल में गायों की सेवा और उनकी मौजूदगी यहाँ आने वालों को ग्रामीण भारत की शुद्धता का एहसास कराती है. मंदिर के चारों ओर का वातावरण इतना शांत है कि यहाँ बैठकर आप शहर के शोर को पूरी तरह भूल जाते हैं.
यदि आप इस मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं, तो यह गचीबोवली से कोंडापुर जाने वाले मार्ग पर रोड नंबर 1 के पास स्थित है. एएमबी मॉल और सेंट्रल यूनिवर्सिटी इसके पास के प्रमुख लैंडमार्क हैं. चूंकि मंदिर तक जाने वाली गलियां थोड़ी संकरी हैं इसलिए दोपहिया वाहन से जाना सबसे अच्छा विकल्प है. वर्तमान में मंदिर के विस्तार का काम भी चल रहा है जिससे इसकी भव्यता और बढ़ने वाली है.
First Published :
April 21, 2026, 01:52 IST



