UGC के नोटिफिकेशन से जयपुर में बवाल! अपर कास्ट के लोग कर रहे प्रोटेस्ट, क्या है नियम, क्यों किया गया था लागू

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UGC के नोटिफिकेशन से बवाल! अपर कास्ट के लोग कर रहे प्रोटेस्ट, क्या है नियम?
Last Updated:August 04, 2026, 10:54 IST
जयपुर में यूजीसी के खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं. इस प्रदर्शन के दौरा छात्रों पर लाठी चार्ज हुआ. वाटर कैनन का इस्तेमाल हुआ. छात्र यह प्रदर्शन इस साल जनवरी में आए यूजीसी के नए नियम Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 के खिलाफ हो रहे हैं. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट पहले इस पर स्टे लगा चुका है. लेकिन यूजीसी इसे फिर से लागू करना चाह रही है, जिसके बाद से जयपुर में कई सवर्ण समाज यानी अपर कास्ट से आने वाले छात्र और संगठन इसका विरोध कर रहे हैं.
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यूजीसी के खिलाफ जयपुर में प्रोटेस्ट चल रहा है. (फोटो साभार एक्स)
कॉलेज और यूनिवर्सिटीज जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव रोकने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने इस साल जनवरी Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 नोटिफिकेशन जारी किया. इस नोटिफिकेशन से विवाद हुआ और देशभर में अपर कास्ट (उच्च जाति) के छात्रों ने प्रदर्शन किया. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और इस पर स्टे लगाया. आदेश में साल 2012 रेगुलेशन को बनाए रखने का आदेश दिया. लेकिन अब फिर से UGC इस नियम को लागू करने जा रही है, जिसे लेकर एक बार फिर विवाद शुरू हो चुका है.
राजस्थान की राजधानी जयपुर में इन नए नियमों के विरोध में करणी सेना समेत सवर्ण समाज के कई संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, बैरिकेड तोड़े गए और हालात संभालने के लिए वॉटर कैनन और लाठीचार्ज तक करना पड़ा. यह विरोध केवल जयपुर तक सीमित नहीं है. इससे पहले दिल्ली, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भी इन नियमों के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे. सवाल यह है कि आखिर UGC के नए नियम क्या हैं, इन्हें क्यों लागू किया गया और सवर्ण समाज इनका विरोध क्यों कर रहा है?
क्या हैं UGC के नए नियम?
यह इमेज एआई द्वारा बनाई गई है.
इन नियमों के तहत हर उच्च शिक्षण संस्थान में:
समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centre-EOC) स्थापित करना होगा.
समता समिति (Equity Committee) और Equity Ambassador नियुक्त किए जाएंगे.
भेदभाव से जुड़ी शिकायतों के लिए हेल्पलाइन और शिकायत निवारण तंत्र बनाया जाएगा.
शिकायत मिलने पर समयबद्ध जांच और कार्रवाई की व्यवस्था होगी.
नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों के खिलाफ UGC प्रशासनिक कार्रवाई कर सकता है.
ये नियम क्यों लाए गए थे?
इकोनॉमिक्स टाइम्स के मुताबिक, UGC का कहना है कि इन नियमों का मकसद उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाओं को रोकना है. पिछले कुछ वर्षों में कॉलेज-यूनिवर्सिटी में कथित जातीय भेदभाव और उससे जुड़े गंभीर मामलों ने चिंता बढ़ाई थ. इसी पृष्ठभूमि में शिकायत निवारण व्यवस्था को अधिक मजबूत और संस्थागत बनाने के लिए ये नियम बनाए गए.
विरोध क्यों हो रहा है?
जयपुर में प्रदर्शन कर रहे संगठनों का आरोप है कि नए नियम बैलेंस्ड नहीं हैं और इनमें सामान्य (उच्च जाति) वर्ग के छात्रों के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं की गई है. प्रदर्शनकारियों की प्रमुख आपत्तियां हैं:
समता कमिटी में जनरल कैटेगरी का प्रतिनिधित्व नहीं है.
झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ दंड का क्लियर प्रावधान नहीं है.
शिकायत दर्ज होते ही आरोपी (सवर्ण) पक्ष पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है.
संस्थानों पर कार्रवाई के प्रावधान से विश्वविद्यालय प्रशासन भय के माहौल में काम करेगा.
प्रदर्शनकारी इन नियमों को भेदभावपूर्ण बताते हुए इनमें संशोधन या इन्हें वापस लेने की मांग कर रहे हैं.



