कौन हैं अजमेर सेंट्रल जेल का जेलर सद्दाम, जिनके कारनामों से खुल रही जेल प्रशासन की परतें?

अजमेर. देश की हाई सिक्योरिटी जेलों में शामिल अजमेर सेंट्रल जेल इन दिनों एक के बाद एक सामने आ रहे मामलों को लेकर सवालों के घेरे में है. सबसे ताजा मामला जेलर सद्दाम हुसैन से जुड़ा है. आरोप है कि उन्होंने अपने मोबाइल फोन से जेल में बंद तीन कैदियों की 1992 के चर्चित अजमेर ब्लैकमेल कांड के दोषी नफीस चिश्ती से वीडियो कॉल पर बातचीत कराई. सामने आए वीडियो में जेलर के कार्यालय में बंदी आराम से नफीस चिश्ती से बातचीत करते नजर आ रहे हैं. बातचीत के दौरान नफीस ने कैदियों का ध्यान रखने की बात भी कही. वीडियो के आखिर में जेलर की ओर से नफीस को “ओके चाचा” कहते हुए सुना जा रहा है. इस पूरे मामले ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामला सामने आने के बाद जेल विभाग ने इसे गंभीरता से लिया और पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी. जांच के बाद जेलर सद्दाम हुसैन को निलंबित कर दिया गया.
सामने आए वीडियो के मुताबिक यह बातचीत किसी कैदी द्वारा चोरी-छिपे मोबाइल से नहीं की गई थी. आरोप है कि जेलर सद्दाम हुसैन ने अपने मोबाइल फोन से नफीस चिश्ती को वीडियो कॉल की और जेल में बंद तीन कैदियों से उसकी बातचीत कराई. सबसे पहले जेल में बंद तारीक चिश्ती की नफीस से बात कराई गई. बातचीत के दौरान नफीस ने तौसीफ के बारे में पूछा, जिसके बाद जेलर ने अपने कार्यालय में मौजूद तौसीफ से भी उसकी बात कराई. इसके बाद फखर जमाली की भी नफीस से बातचीत कराई गई. जेल प्रशासन के मुताबिक कैदियों को मोबाइल फोन रखने की अनुमति नहीं है, लेकिन ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के पास मोबाइल हो सकता है. ऐसे में सवाल यह है कि अधिकारी के मोबाइल का इस्तेमाल जेल में बंद कैदियों को बाहरी व्यक्ति से वीडियो कॉल कराने के लिए कैसे हुआ.
तीनों कैदी कौन हैं?
जिन तीन बंदियों की नफीस चिश्ती से बातचीत कराई गई, उनमें तारीक चिश्ती, तौसीफ चिश्ती और फखर जमाली शामिल हैं. तारीक चिश्ती तौसीफ चिश्ती के पिता हैं, जबकि फखर जमाली उसका भांजा बताया जा रहा है. इनमें तौसीफ का नाम आतंकी संगठन बब्बर खालसा से कथित संबंधों को लेकर भी सामने आ चुका है. उस पर आतंकियों को पनाह देने और हथियार व ड्रग्स उपलब्ध कराने जैसे आरोप बताए गए हैं. वीडियो में नफीस चिश्ती इन कैदियों से बातचीत करता नजर आ रहा है. बातचीत के दौरान उसका यह कहना भी सामने आया कि “इनका ध्यान रखना”. साथ ही उसने नरेंद्र को वहां भेजने की बात भी कही. इन्हीं बातचीत के अंशों ने जेल प्रशासन और नफीस चिश्ती के बीच कथित संपर्क को लेकर सवाल खड़े किए हैं. हालांकि इन दावों और वीडियो में सामने आई बातचीत की पूरी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
जेलर सद्दाम पर अब जांच
अजमेर सेंट्रल जेल के अधीक्षक अंतेश्वर ने मामले की जांच की पुष्टि की है. उनका कहना है कि जेलर सद्दाम हुसैन ने तीन बंदियों की नफीस चिश्ती से बात कराई. उन्होंने माना कि कैदियों को मोबाइल फोन रखने की अनुमति नहीं है और जिस अधिकारी के पास मोबाइल था, उसी ने उसका दुरुपयोग किया. अधीक्षक के अनुसार पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी. जांच के बाद जेलर सद्दाम हुसैन को निलंबित कर दिया गया. निलंबन के बाद उन्हें श्रीगंगानगर जिले में अटैच किया गया है. इसके साथ ही मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है.
दो दिन पहले महिला जेलर का मामला भी आया था सामने
सद्दाम से जुड़े वीडियो कॉल मामले से ठीक पहले अजमेर सेंट्रल जेल में महिला बंदियों को नियमों के खिलाफ जेल से बाहर ले जाने का मामला भी सामने आया था. आरोप है कि 12 जुलाई को हत्या के मामलों में बंद दो महिला बंदियों को कोर्ट की अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया के बिना जेल परिसर से बाहर ले जाया गया. जांच में तत्कालीन प्रभारी महिला जेलर दिव्या चौधरी और महिला प्रहरी सोनिया चौधरी की भूमिका सामने आई. दोनों महिला पुलिसकर्मियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है और अब सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज की गई है. आरोप है कि दोनों बंदियों को निजी वाहन से बाहर ले जाया गया और जेल रिकॉर्ड में बाहर जाने का कारण, बंदियों के नाम और वापसी का समय निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दर्ज नहीं किया गया.
29 जून को जेल में हुई थी जगन गुर्जर की हत्या
अजमेर जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल इसलिए भी गंभीर हैं क्योंकि 29 जून को इसी जेल में चंबल के कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या कर दी गई थी. अब जेल के भीतर मोबाइल के कथित दुरुपयोग और बंदियों को बाहरी व्यक्ति से वीडियो कॉल कराने का मामला सामने आने के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल उठ रहे हैं. कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि जेल अधिकारियों की मिलीभगत के कारण जेलों में अपराधियों का हौसला बढ़ रहा है. उन्होंने जेल में अपराधियों की गतिविधियों और जगन गुर्जर की हत्या को भी इसी व्यवस्था से जोड़ते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं.
कौन है नफीस चिश्ती?
नफीस चिश्ती अजमेर के बहुचर्चित ब्लैकमेल कांड का दोषी है. 1990 के दशक में सामने आए इस मामले में 100 से अधिक लड़कियों को ब्लैकमेल कर उनका यौन शोषण करने और उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें प्रसारित करने के गंभीर आरोप लगे थे. 2024 में मामले में फैसला आया, जिसमें नफीस चिश्ती समेत छह आरोपियों को दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. अब जेल के अंदर से सामने आए वीडियो ने एक बार फिर अजमेर के इसी चर्चित मामले को सुर्खियों में ला दिया है. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जेल के भीतर अधिकारी के मोबाइल से बंदियों की वीडियो कॉल किसकी अनुमति से हुई और इस पूरी व्यवस्था में और कौन-कौन लोग शामिल थे. जांच के बाद ही इन सवालों के जवाब सामने आएंगे.



