कौन है विकास गुप्ता? जो ‘सिरेमिक शिक्षा सेतु’ के जरिए 1000 बच्चों को दे रहे फ्री कोचिंग, जानिए पूरी कहानी

जयपुर: राजस्थान में उन बच्चों के लिए सरकारी अधिकारी बनने की राह अब आसान हो गई है, जो प्रतिभावान तो हैं, लेकिन आर्थिक अभाव की वजह से अपने सपने को पूरा नहीं कर पाते हैं. जयपुर में सरकारी नौकरियों की भर्ती करवाने वाले एक संस्थान ने “सिरेमिक शिक्षा सेतु” नाम से एक अभियान शुरू किया है. इस कैंपेन के तहत प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों से अच्छे अंकों के साथ 12वीं कक्षा उत्तीर्ण कर चुके विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं. निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बीपीएल या दिव्यांग श्रेणी के बच्चे भी इस अभियान का लाभ उठा सकते हैं. इनके अलावा शहीदों के आश्रितों को भी इस कैंपेन के तहत आवेदन के योग्य माना गया है.
“सिरेमिक शिक्षा सेतु” अभियान से जुड़ने वाला बच्चा, सिर्फ एक या दो नहीं, बल्कि हर उस भर्ती की क्लासेज ले सकता है, जिनके लिए वह आवेदन करना चाहता है. साथ ही इस अभियान की खास बात है कि इसके प्रत्येक कोर्स की वैधता तब तक के लिए तय की गई है, जब तक कि बच्चे का सलेक्शन सरकारी नौकरी में ना हो जाए.
बच्चे बाकी दुनिया के साथ कैसे कंप्टीशन कर पाएंगे?इस पूरे कैंपेन के पीछे आरएएस भर्ती परीक्षा की तैयारी करवाने वाले शिक्षक विकास गुप्ता का विचार छुपा है. वे कहते हैं, “मैं जब भी किसी सरकारी स्कूल में जाता हूं, हमेशा यही विचार मन में आता है कि एक तरफ दुनिया एआई अवतार से पढ़ाने की बात कर रही है, स्मार्ट एजुकेशन की बात कर रही है, और एक तरफ ये बच्चे हैं, जिनके लिए सामान्य ब्लैकबोर्ड तक उपलब्ध नहीं. ऐसे में ये बच्चे बाकी दुनिया के साथ कैसे कंप्टीशन कर पाएंगे?”
गुप्ता आगे कहते हैं, “इंफ्रास्ट्रक्चर का ये अभाव बच्चों के मनोबल को तोड़ता है. और समस्या इस अभाव की भी नहीं है. समस्या हमारी अप्रोच की है. हमें इन बच्चों की अहमियत ही नहीं पता. इन बच्चों को ज़रूरत है तो सिर्फ मौके की. यह मौका देने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि समाज की भी है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमने “सिरेमिक शिक्षा सेतु” अभियान शुरू किया.”
बच्चे भी कच्ची मिट्टी जैसे ही होते हैंइस अभियान के नाम के पीछे छिपे संदेश को लेकर विकास गुप्ता बताते हैं. वे कहते हैं, “अंग्रेजी भाषा के Ceramic शब्द का अर्थ होता है, कच्ची मिट्टी को पकाकर उसे आकार देना. बच्चे भी कच्ची मिट्टी जैसे ही होते हैं. यदि उन्हें सही समय पर रास्ता दिखाया जाए तो वे सही आकार में ढल जाते हैं.”
गुप्ता कहते हैं, “हमारा तो लक्ष्य है कि इस अभियान से जुड़ने वाला हर बच्चा राजस्थान की सबसे बड़ी परीक्षा RAS में उत्तीर्ण होकर अधिकारी बने. लेकिन कोई बच्चा यदि दूसरी नौकरियों जैसे- ईओ/आरओ, सब इंस्पेक्टर या स्कूल व्याख्याता जैसी भर्तियों की तैयारी करना चाहे, तो हम उसे ये कोर्स भी उपलब्ध करवाएंगे.”
प्रदेश के 1000 बच्चों को पूरी तरह नि:शुल्क तैयारी करवाएंगेबच्चों की संख्या से जुड़े सवाल पर वे कहते हैं, “हम पिछले कुछ वर्षों से लगातार अपनी क्षमता के अनुसार ऐसे मेधावी बच्चों की किसी ना किसी रूप में मदद की कोशिश कर रहे थे, जो अभाव से ग्रस्त हों. ताकि उसकी तैयारी में रुकावट ना आए. पिछले साल ये संख्या 100 के आस-पास थी. लेकिन इस बार हमने यह अभियान शुरू करने के साथ तय किया है कि हम प्रदेश के 1000 बच्चों को पूरी तरह नि:शुल्क तैयारी करवाएंगे. इसमें कंटेंट और गाइडेंस भी शामिल हैं.”
“हमारा लक्ष्य है कि राजस्थान के हर जिले से औसतन 20 बच्चे इस अभियान से जुड़ सकें. ये सिर्फ अंक नहीं है, बल्कि एक बड़े बदलाव की शुरुआत है.” विकास गुप्ता आगे जोड़ते हैं, “बच्चों की सहूलियत के लिए हमने इस कोर्स का माध्यम ऑनलाइन तय किया है. ताकि वे अपने गांव-कस्बे में रहकर ही पढ़ाई कर सकें और उन पर किसी तरह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ ना पड़े.”
नव्या मीणा इस अभियान से जुड़ने वाली पहली स्टूडेंट12वीं कक्षा में 99.6% अंक हासिल कर आर्ट्स विषय में राजस्थान टॉप करने वाली नव्या मीणा इस अभियान से जुड़ने वाली पहली स्टूडेंट हैं. जयपुर के पास एक गांव में रहने वाली नव्या कहती हैं कि उनके पिता गुजरात में टाइल फैक्ट्री में काम करते हैं. घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए आरएएस की तैयारी मुश्किल थी. लेकिन विकास सर की इस पहल से जुड़ने के बाद परिवार की उम्मीद जागी है कि वह भी अधिकारी बन सकती है.
सपना अधूरा नहीं छोड़ना पड़ेगाभरतपुर की राजकुमारी शर्मा इस मुहिम से जुड़ने वाली एक और छात्रा हैं. राजकुमारी ने इस साल 12वीं में 99% अंक हासिल किए हैं. वह कहती है, “मन तो आरएएस अधिकारी बनने का ही था. लेकिन फीस नही होने की वजह से टीचर बनने की तैयारी शुरू करने वाली थी. लेकिन अब मुझे अपना सपना अधूरा नहीं छोड़ना पड़ेगा.”
विकास गुप्ता ज़ोर देकर कहते हैं कि तमाम प्रयास के बाद वे किसी एक भी बच्चे की ज़िंदगी बदल पाए तो उनकी यह पूरी कवायद सार्थक हो जाएगी. हालांकि अपनी तरह की ये इकलौती मुहिम नहीं है, जिसे विकास गुप्ता ने सरकारी स्कूलों में बदलाव लाने के लिए शुरू किया है. उन्होंने ‘हर महीने, एक शौचालय’ नाम से भी एक अन्य अभियान शुरू किया है.
एक सरकारी स्कूल में टॉयलेट का निर्माण करवाएंगेवे कहते हैं, “कई सरकारी स्कूलों में शिक्षिकाओं और बच्चियों को वॉशरूम्स न होने की स्थिति में घंटों तक टॉयलेट रोककर रहना पड़ता है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि इससे यूरिन इंफेक्शन से लेकर पथरी तक की बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए हमने प्रण लिया है कि हर महीने किसी भी एक सरकारी स्कूल में टॉयलेट का निर्माण करवाएंगे.” गुप्ता ने इस पहल की शुरुआत अपने गृहजिले श्रीगंगानगर से पिछले महीने की है.
इन संवेदनशील मुहिमों के अलावा विकास गुप्ता सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के बीच खासे चर्चित हैं. RAS भर्ती परीक्षा 2024 में शीर्ष रैंक पर आने वाले दिनेश विश्नोई अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर अपनी इस सफलता के लिए गुप्ता को श्रेय दे चुके हैं. विश्नोई की ही तरह टॉप 100 में से करीब 20 नव-चयनित अधिकारियों ने अपनी सफलता के लिए विकास गुप्ता की गाइडेंस को श्रेय दिया है.
तीन बार यूपीएससी इंटरव्यू दे चुके विकास गुप्ता कहते हैं कि उनका सपना है कि उनसे जुड़ने वाला हर स्टूडेंट बड़ा अधिकारी बने. विकास गुप्ता राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सादुलशहर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे एक प्रेरणादायक शिक्षक, मार्गदर्शक और समाजसेवी हैं. खालसा कॉलेज, श्रीगंगानगर से बी.एससी. (गणित) करने के बाद वे 2016 में जयपुर आए और सिविल सेवा की तैयारी शुरू की.
8 वर्षों से सिविल सेवा अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहेवे तीन बार यूपीएससी मेन्स परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं. यद्यपि साक्षात्कार चरण में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने असफलता को निराशा का कारण नहीं बनने दिया. इसके विपरीत, उन्होंने अपने अनुभव को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया और पिछले लगभग 8 वर्षों से सिविल सेवा अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं.
500 से अधिक विद्यार्थी RAS में चयनित हो चुकेवर्तमान में वे सेरेमिक एकेडमी के प्रमुख मार्गदर्शक हैं. अब तक उनके पढ़ाए 500 से अधिक विद्यार्थी RAS में चयनित हो चुके हैं, जिनमें RAS-2024 में ही कम से कम 150 चयन शामिल हैं. टॉपर दिनेश विश्नोई सहित टॉप 100 में करीब 20 अभ्यर्थियों ने सार्वजनिक रूप से अपनी सफलता का श्रेय उन्हें दिया है.
हर वर्ष लगभग 1000 बच्चों को लाभ मिलेगाशिक्षा के साथ-साथ वे सामाजिक जिम्मेदारियों को भी सक्रिय रूप से निभा रहे हैं. ‘सिरेमिक शिक्षा सेतु’ अभियान के माध्यम से वे आर्थिक रूप से कमजोर, बीपीएल, दिव्यांग एवं शहीदों के आश्रित बच्चों को निशुल्क कोचिंग प्रदान कर रहे हैं, जिससे हर वर्ष लगभग 1000 बच्चों को लाभ मिलेगा. इसके अलावा ‘हर महीने, एक शौचालय’ पहल के जरिए वे सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं के सुधार की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं.



