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राजाओं की रसोई से निकली बीकानेर की ये मिठाई आज भी क्यों कहलाती है ‘शाही’ I bikaner news I rajasthan news

Last Updated:June 27, 2026, 15:56 IST

बीकानेर का नाम आते ही भुजिया और रसगुल्ले याद आते हैं, लेकिन इस शहर की शाही बालूशाही और सुरशाही लड्डू भी अपनी अलग पहचान रखते हैं. कभी राजघराने की रसोई में बनने वाली ये पारंपरिक मिठाइयां आज आम लोगों की पसंद बन चुकी हैं. बेहतरीन स्वाद, अनोखी बनाने की विधि और शाही विरासत से जुड़ी कहानी इन्हें खास बनाती है. यही वजह है कि बीकानेर आने वाले पर्यटक भी इन लजीज मिठाइयों का स्वाद चखे बिना नहीं लौटते.

बीकानेर. बीकानेर का नाम आते ही सबसे पहले भुजिया और रसगुल्ले की चर्चा होती है, लेकिन इस शहर की पहचान कुछ ऐसी पारंपरिक मिठाइयों से भी जुड़ी है, जिनके नाम के साथ आज भी ‘शाही’ शब्द गर्व से जुड़ा हुआ है. बालूशाही और सुरशाही लड्डू सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि अपने इतिहास और राजघराने से जुड़े संबंधों के कारण भी खास माने जाते हैं. वर्षों पहले बीकानेर राजपरिवार की शाही रसोई में बनने वाली ये मिठाइयां आज आम लोगों की थाली तक पहुंच चुकी हैं, लेकिन इनके नाम के साथ जुड़ा ‘शाही’ आज भी उनकी विरासत की कहानी बयां करता है.

समय के साथ मिठाइयों की कई नई किस्में बाजार में आई, लेकिन बीकानेर की बालूशाही और सुरशाही लड्डू ने अपनी अलग पहचान कायम रखी है. स्वाद, परंपरा और राजसी इतिहास का अनूठा संगम इन मिठाइयों को आज भी खास बनाता है. यही वजह है कि बीकानेर की इन पारंपरिक मिठाइयों के नाम के साथ जुड़ा ‘शाही’ शब्द केवल एक विशेषण नहीं, बल्कि शहर की समृद्ध सांस्कृतिक और राजसी विरासत का प्रतीक है.

क्यों लगा नाम के साथ शाही शब्द

बीकानेर के मिठाई व्यवसायी जोरावर सिंह ने बताया कि पुराने समय से शहर में कई तरह की पारंपरिक मिठाइयां बनती रही हैं. सबसे पहले बालूशाही का प्रचलन था. इसके बाद बूंदी के लड्डू बनने शुरू हुए और फिर सुरशाही लड्डू तैयार किए जाने लगे. यह दोनों मिठाइयां बीकानेर के राजा-महाराजाओं की शाही रसोई में बनाई जाती थी. राजपरिवार की पसंद होने और वहीं से आम लोगों तक पहुंचने के कारण इनके नाम के साथ ‘शाही’ शब्द जुड़ गया.  उनके अनुसार, बालूशाही आज भी पूरे साल बनाई जाती है और इसकी मांग हर मौसम में बनी रहती है. वहीं सुरशाही लड्डू एक मौसमी मिठाई है, जिसे खासतौर पर गर्मियों में तैयार किया जाता है. गर्म तासीर वाले मौसम में यह मिठाई शरीर को ठंडक देने वाली मानी जाती है, इसलिए इसकी मांग गर्मियों के दौरान सबसे अधिक रहती है.

15 दिन तक रख सकते है सुरक्षितजोरावर सिंह बताते हैं कि बालूशाही की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें मावा का उपयोग नहीं किया जाता. यही वजह है कि यह लंबे समय तक सुरक्षित रहती है और जल्दी खराब नहीं होती. वहीं सुरशाही लड्डू भी पारंपरिक विधि से तैयार किए जाते हैं और इन्हें भी करीब 15 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है. दोनों मिठाइयां बिना स्वाद और गुणवत्ता खोए लंबे समय तक खाने योग्य रहती हैं.  आज भी बीकानेर की पारंपरिक मिठाई की दुकानों पर इन शाही मिठाइयों की अच्छी मांग रहती है. स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटक भी इनका स्वाद लेने और इन्हें अपने साथ ले जाने में रुचि दिखाते हैं. वर्तमान में बालूशाही और सुरशाही लड्डू करीब 480 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहे हैं.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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