सावन आते ही क्यों बदल जाता खान-पान? बैंगन-दही से दूरी की वजह जानकर चौंक जाएंगे!

Last Updated:August 12, 2026, 08:29 IST
Sawan food rules : सावन में खान-पान को लेकर बुजुर्गों की कई पुरानी मान्यताएं हैं, जिनमें बैंगन, हरी पत्तेदार सब्जियां और दही से दूरी की सलाह दी जाती है. इसके पीछे मानसून का मौसम भी एक वजह माना जाता है. बारिश में नमी बढ़ने से सब्जियों पर कीट और गंदगी लगने की संभावना रहती है, जबकि दूध-दही जैसे खाद्य पदार्थ जल्दी खराब हो सकते हैं. पुराने समय में खाद्य संरक्षण की सुविधाएं सीमित थीं, इसलिए ऐसी सावधानियां अपनाई जाती थीं. हालांकि आज ताजी सब्जियों को अच्छी तरह धोकर और डेयरी उत्पादों को सुरक्षित तरीके से रखकर खाया जा सकता है. प्रयागराज के हेल्थ एक्सपर्ट डॉ राजेश कुमार ने जरूरी सुझाव दिया है.
Sawan food rules : सावन का महीना आते ही घरों में खान-पान को लेकर कई तरह की सावधानियां शुरू हो जाती हैं. बुजुर्ग अक्सर इस दौरान बैंगन, हरी पत्तेदार सब्जियां, दही और कुछ अन्य चीजें खाने से बचने की सलाह देते हैं. कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर इन खाद्य पदार्थों को सावन में क्यों नहीं खाने की बात कही जाती है? क्या इसके पीछे सिर्फ धार्मिक मान्यता है या इसका मौसम और सेहत से भी कोई संबंध है?
दरअसल, सावन का समय देश के ज्यादातर हिस्सों में मानसून के दौरान आता है. इस मौसम में वातावरण में नमी और उमस बढ़ जाती है. ऐसे माहौल में भोजन के जल्दी खराब होने और कुछ खाद्य पदार्थों पर सूक्ष्मजीवों की वृद्धि का जोखिम बढ़ सकता है. आयुर्वेद में भी वर्षा ऋतु के दौरान पाचन क्षमता प्रभावित होने की बात कही गई है और हल्का, ताजा तथा आसानी से पचने वाला भोजन लेने की सलाह दी जाती है.
बैंगन से दूरी की वजह क्या है?सावन में बैंगन न खाने की परंपरा कई घरों में आज भी देखने को मिलती है. बारिश के मौसम में बैंगन की फसल पर कीटों और अन्य समस्याओं का प्रकोप बढ़ सकता है. इसलिए पुराने समय में इसे सावधानी के तौर पर भोजन से दूर रखने की सलाह दी जाती रही होगी. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सावन में बैंगन खाना अपने आप में हर व्यक्ति के लिए नुकसानदायक है. अच्छी तरह धोकर, ताजा और सही तरीके से पकाकर खाया गया भोजन सामान्य खाद्य-सुरक्षा नियमों के अनुसार ही देखा जाना चाहिए.
हरी पत्तेदार सब्जियों को लेकर भी सावधानीसावन में पालक, मेथी जैसी पत्तेदार सब्जियों से बचने की सलाह भी कई परिवारों में दी जाती है. बारिश और नमी के कारण पत्तियों पर मिट्टी, कीड़े और सूक्ष्मजीव चिपकने की संभावना बढ़ सकती है. इसलिए इन्हें अच्छी तरह साफ करके और पकाकर खाना जरूरी है.
दही और दूध पर क्यों लगती है रोक?दही को लेकर भी सावन में अलग-अलग परिवारों की परंपराएं हैं. मानसून में उमस और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण डेयरी उत्पादों को सही तापमान पर रखना ज्यादा जरूरी हो जाता है. दही भी जल्दी खराब हो सकता है, इसलिए ताजा और सुरक्षित तरीके से रखा हुआ दही ही खाना चाहिए. कुछ आयुर्वेदिक परंपराएं वर्षा ऋतु में दही से बचने की सलाह देती हैं.
असली बात है ताजा और साफ खानासावन में खान-पान से जुड़ी पुरानी परंपराओं को समझने का एक तरीका यह भी है कि उस समय आधुनिक फ्रिज, साफ-सफाई की सुविधाएं और खाद्य संरक्षण के साधन आज जैसे आसानी से उपलब्ध नहीं थे. इसलिए मौसम के हिसाब से कुछ खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना एक व्यावहारिक सावधानी भी रही होगी.
हालांकि आज हर खाद्य पदार्थ को केवल सावन के नाम पर पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है. ताजा भोजन करें, सब्जियों को अच्छी तरह धोएं, दूध-दही को उचित तापमान पर रखें और बासी या संदिग्ध भोजन से बचें. इस तरह परंपरा का सम्मान करते हुए वैज्ञानिक और सुरक्षित खान-पान की आदत भी अपनाई जा सकती है
About the AuthorAmit Singh
8 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. क्राइम, खेल, …
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August 12, 2026, 08:29 IST



