सांभर झील में बारिश से पहले क्यों श्रमिकों की तेज हो जाती है हलचल? जान लीजिए नमक उत्पादन का पूरा गणित

Last Updated:July 02, 2026, 14:03 IST
Sambhar Lake Salt Production: राजस्थान में मानसून की दस्तक से पहले देश की सबसे बड़ी अंतर्देशीय लवणीय झील सांभर झील में नमक उत्पादन से जुड़े श्रमिकों की गतिविधियां तेज हो गई हैं. बारिश शुरू होने से पहले तैयार नमक को क्यारियों से निकालकर सुरक्षित भंडारण स्थलों तक पहुंचाया जा रहा है, ताकि वर्षा का पानी आने पर नमक खराब न हो. हर साल मानसून से पहले यह प्रक्रिया युद्धस्तर पर पूरी की जाती है. जयपुर, नागौर और अजमेर जिलों में फैली सांभर झील करीब 230 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है और देश के सबसे बड़े नमक उत्पादन केंद्रों में शामिल है. यहां उत्पादित नमक घरेलू उपयोग के साथ-साथ विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में भी इस्तेमाल होता है. हजारों परिवारों की आजीविका इस झील से जुड़ी हुई है, इसलिए मानसून से पहले नमक को सुरक्षित निकालना उत्पादकों और श्रमिकों के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाता है.
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जयपुर: मानसून की दस्तक से पहले देश की सबसे बड़ी अंतर्देशीय खारे पानी की झील सांभर झील में नमक उत्पादन से जुड़े श्रमिकों की गतिविधियां तेज हो गई हैं. बारिश शुरू होने से पहले तैयार नमक को क्यारियों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है. झील क्षेत्र में इन दिनों सुबह से शाम तक श्रमिक नमक की ढुलाई और भंडारण के कार्य में जुटे हुए हैं, ताकि वर्षा का पानी क्यारियों में भरने से तैयार नमक खराब न हो. हर वर्ष मानसून आने से पहले यही प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिससे पूरे सीजन की मेहनत सुरक्षित रह सके.
सांभर झील राजस्थान के जयपुर, नागौर और अजमेर जिलों की सीमा में फैली हुई है. लगभग 230 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैली यह झील भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय लवणीय झील मानी जाती है. यहां का नमक अपनी गुणवत्ता और शुद्धता के कारण देशभर में प्रसिद्ध है. लंबे समय से यह क्षेत्र राजस्थान की अर्थव्यवस्था और हजारों परिवारों की आजीविका का आधार रहा है. झील से उत्पादित नमक घरेलू उपयोग के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों में भी बड़ी मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है.
क्या है झील में नमक बनाने की प्रक्रिया
सांभर झील में नमक बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक और वैज्ञानिक तरीकों का मिश्रण है. यहां सबसे पहले झील के खारे पानी को पंपों या प्राकृतिक प्रवाह के माध्यम से छोटी-छोटी क्यारियों में पहुंचाया जाता है. इन क्यारियों में सूर्य की तेज गर्मी और शुष्क मौसम के कारण पानी धीरे-धीरे वाष्पित होने लगता है. जैसे-जैसे पानी सूखता है, उसमें मौजूद नमक के कण नीचे जमने लगते हैं. कई सप्ताह तक चलने वाली इस प्रक्रिया के बाद मोटी परत के रूप में नमक तैयार हो जाता है. इसके बाद श्रमिक विशेष औजारों की सहायता से नमक को इकट्ठा कर ढेर बनाते हैं और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों या अन्य वाहनों के जरिए भंडारण स्थलों तक पहुंचाते हैं.
मानसून से पहले नमक की क्यारियां की जाती है खाली
मानसून से पहले नमक की क्यारियों को खाली करना बेहद जरूरी माना जाता है. यदि समय पर तैयार नमक नहीं निकाला जाए तो बारिश का पानी क्यारियों में भरने से नमक दोबारा घुल सकता है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होते हैं. यही कारण है कि इन दिनों झील क्षेत्र में काम की रफ्तार सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है. श्रमिकों के साथ नमक उत्पादक भी लगातार निगरानी रखते हैं ताकि बारिश शुरू होने से पहले पूरा उत्पादन सुरक्षित कर लिया जाए.
बारिश के मौसम में नमक उत्पादन हो जाता है बंद
बारिश के मौसम में नमक उत्पादन लगभग बंद हो जाता है, क्योंकि क्यारियां पानी से भर जाती हैं. मानसून समाप्त होने और मौसम साफ होने के बाद फिर से क्यारियों की मरम्मत, समतलीकरण और खारे पानी के प्रबंधन का कार्य शुरू किया जाता है. इसके बाद नए उत्पादन सत्र की शुरुआत होती है. इस तरह सांभर झील में नमक उत्पादन का पूरा चक्र मौसम के अनुसार संचालित होता है.
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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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