Rajasthan

पिंक सिटी के बीच ‘येलो मोहल्ला’! जानिए क्यों अलग दिखता है जयपुर का यह इलाका, रोचक है कहानी

Last Updated:July 05, 2026, 14:13 IST

Jaipur Unique Peela Mohalla: जयपुर की पहचान दुनियाभर में गुलाबी शहर के रूप में है, लेकिन चारदीवारी क्षेत्र में स्थित ठठेरों का रास्ता और नटनियों का रास्ता इस पहचान से अलग नजर आते हैं. यहां की हवेलियां, मकान और दुकानें गुलाबी नहीं, बल्कि पीले रंग में रंगी हुई हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार इस परंपरा के पीछे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कारण हैं. कुछ इसे राजा-महाराजाओं के समय की पहचान बताते हैं, जबकि कुछ लोग यूनेस्को के संरक्षण और सौंदर्यीकरण कार्यों से जोड़ते हैं. यही अनोखी पहचान देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित करती है.

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जयपुर. गुलाबी शहर के नाम से दुनियाभर में मशहूर जयपुर अपनी हवेलियों, ऐतिहासिक भवनों, प्राचीन इमारतों और बाजारों के गुलाबी रंग के लिए जाना जाता है. शहर की चारदीवारी के भीतर स्थित अधिकांश इमारतें, दुकानें, दीवारें और भव्य प्रवेश द्वार गुलाबी रंग में रंगे हुए हैं, जो जयपुर की पहचान को दुनिया भर में अलग बनाते हैं. लेकिन इसी चारदीवारी क्षेत्र में एक ऐसा मोहल्ला भी है, जहां प्रवेश करते ही गुलाबी नहीं, बल्कि पीले रंग की छटा दिखाई देती है. चारदीवारी क्षेत्र के ठठेरों का रास्ता और नटनियों का रास्ता ऐसे मोहल्ले हैं, जहां पुरानी हवेलियों से लेकर लोगों के घर और दुकानें तक गुलाबी रंग के बजाय पीले रंग में रंगी हुई हैं.

यही विशेषता इस क्षेत्र को जयपुर के अन्य इलाकों से अलग पहचान दिलाती है. लोकल-18 ने ठठेरों के रास्ते में पहुंचकर स्थानीय लोगों से बातचीत की तो उन्होंने इस पीले रंग के पीछे अलग-अलग कारण बताए. कुछ लोगों का कहना है कि राजा-महाराजाओं के समय यहां लोगों के रोजगार के लिए विभिन्न कारखाने स्थापित किए गए थे. उनकी अलग पहचान बनाए रखने के उद्देश्य से पूरे क्षेत्र को पीले रंग से रंगवाया गया था. तभी से यहां पुरानी हवेलियों और भवनों को पीले रंग में रंगने की परंपरा चली आ रही है.

यूनेस्को से मिली मोहल्ले को पीले रंग की सौगात

स्थानीय लोगों ने लाेकल 18 को बताया कि जब जयपुर को यूनेस्को की ओर से विश्व विरासत शहर (वर्ल्ड हेरिटेज सिटी) का दर्जा मिला, तब चारदीवारी क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों के संरक्षण, विकास और सौंदर्यीकरण के लिए विशेष बजट उपलब्ध कराया गया. इसी दौरान इस मोहल्ले की रंगाई के लिए पीले रंग का चयन किया गया. वहीं, कुछ अन्य लोगों का कहना है कि जयपुर घूमने आने वाले विदेशी पर्यटक चारदीवारी की संकरी गलियों, मोहल्लों और उनके हेरिटेज स्वरूप को देखने के लिए यहां तक पहुंचते हैं. इसी कारण स्थानीय लोगों ने अपने मोहल्ले की अलग पहचान बनाए रखने के लिए घरों और हवेलियों को गुलाबी रंग के बजाय पीले रंग में रंगना शुरू किया. आज भी जब यहां किसी भवन की रंगाई कराई जाती है, तो परंपरा के अनुसार पीले रंग का ही उपयोग किया जाता है.

बर्तन और हस्तकला से है पूरे मोहल्ले की पहचान

स्थानीय लोगों के अनुसार, ठठेरों का रास्ता और नटनियों का रास्ता जयपुर की चारदीवारी के सबसे पुराने और ऐतिहासिक इलाकों में शामिल हैं. ठठेरों के रास्ते में पीढ़ी-दर-पीढ़ी कारीगर पीतल और तांबे के बर्तन बनाने का काम करते आ रहे हैं. वहीं, नटनियों के रास्ते में स्वादिष्ट व्यंजन, सिलाई, बुनाई और हस्तकला से जुड़े विभिन्न पारंपरिक व्यवसाय आज भी संचालित हो रहे हैं. इस मोहल्ले के चारों ओर जयपुर के प्रमुख बाजार जुड़े होने के कारण यहां दिनभर लोगों और पर्यटकों की चहल-पहल बनी रहती है.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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Jaipur,Rajasthan

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