Rajasthan

पीलिया के मरीज क्यों करते हैं बाबा की समाधि की परिक्रमा? वजह जानकर चौंक जाएंगे

Last Updated:August 22, 2026, 09:50 IST

Bharatpur Alakh Jhalak Mahadev Temple: भरतपुर का अलख-झलक महादेव मंदिर भगवान शिव की पूजा के साथ अपनी अनोखी लोकमान्यता के लिए प्रसिद्ध है. स्थानीय विश्वास के अनुसार, मंदिर में स्थित अलख-झलक बाबा की समाधि की परिक्रमा करने और प्रार्थना करने से पीलिया रोग से राहत मिलती है. इसी आस्था के कारण दूर-दराज से श्रद्धालु पीलिया पीड़ितों को लेकर यहां आते हैं. मंदिर के पुजारी के अनुसार यह परंपरा वर्षों पुरानी है. हालांकि, डॉक्टरी उपचार भी उतना ही महत्वपूर्ण है, लेकिन यह स्थान जन-आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

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Bharatpur: राजस्थान का भरतपुर शहर धार्मिक धरोहरों और प्रसिद्ध आस्था केंद्रों के लिए जाना जाता है. इन्हीं में से एक बेहद खास स्थान है ‘अलख-झलक महादेव मंदिर’. यह मंदिर न केवल श्रद्धालुओं की भक्ति का केंद्र है, बल्कि अपनी एक अनूठी और अद्भुत लोकमान्यता के लिए भी पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है. मंदिर में भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना के साथ-साथ अलख-झलक बाबा की समाधि की परिक्रमा करने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है.

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि अलख-झलक बाबा की तपस्थली और समाधि में एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा है. ऐसी मान्यता है कि पीलिया (Jaundice) रोग से पीड़ित व्यक्ति यदि यहां आकर सच्चे मन से भगवान शिव के दर्शन करता है और बाबा की समाधि की परिक्रमा कर प्रार्थना करता है, तो उसे बीमारी से राहत मिलती है. इसी आस्था के चलते केवल भरतपुर शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों, पड़ोसी जिलों और दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग पीलिया से ग्रसित अपने परिजनों को लेकर यहां पहुंचते हैं. श्रद्धालु पहले भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और उसके बाद बाबा की समाधि की परिक्रमा कर आरोग्यता की कामना करते हैं.

पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है परंपरामंदिर के पुजारी बताते हैं कि अलख-झलक बाबा की तपस्या से जुड़ी यह धार्मिक परंपरा सदियों पुरानी है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी आस्था के साथ निभाई जा रही है. लोगों का मानना है कि सच्चे भाव से की गई प्रार्थना से यहां मनोकामनाएं पूरी होती हैं और असाध्य कष्टों से मुक्ति मिलती है. यही अनूठा लोकविश्वास इस मंदिर को भरतपुर के अन्य शिवालयों से अलग और विशिष्ट पहचान दिलाता है.

आस्था के साथ डॉक्टरी सलाह भी है जरूरीमंदिर से जुड़ी यह परंपरा पूरी तरह से स्थानीय लोकविश्वास और जन-आस्था पर आधारित है. हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि पीलिया एक गंभीर चिकित्सकीय बीमारी (Medical Condition) है. इसलिए इस धार्मिक मान्यता को आस्था का विषय मानते हुए बीमारी के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह और उचित डॉक्टरी उपचार लेना भी बेहद जरूरी है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Bharatpur,Bharatpur,Rajasthan

First Published :

August 22, 2026, 09:48 IST

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