Rajasthan

11 किलो चांदी, 8 किलो सोना… जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर का नया दिव्य रूप देख रह जाएंगे दंग

Last Updated:July 02, 2026, 09:12 IST

Jaipur Moti Dungri Ganesh Temple: जयपुर के प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नया अष्टविनायक द्वार तैयार किया गया है. करीब तीन महीने की मेहनत से बने इस 15×12 फीट के भव्य कपाट में 11 किलो चांदी का उपयोग किया गया है. अब मंदिर के पट बंद रहने पर भी श्रद्धालु अष्टविनायक स्वरूपों के दर्शन कर सकेंगे. इसके साथ ही गर्भगृह में 8 किलो सोने से गोल्डन वर्क भी पूरा हो चुका है. आधुनिक तकनीक से तैयार इस व्यवस्था के बाद मंदिर की भव्यता और श्रद्धालुओं के दर्शन का अनुभव पहले से अधिक आकर्षक हो गया है.

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जयपुर. राजधानी जयपुर अपने ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिरों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. यहां देश-विदेश से लोग दर्शन के लिए आते हैं. यही वजह है कि मंदिरों में भक्तों के लिए तरह-तरह के नवाचार भी किए जाते हैं. ऐसे में जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में अब हर समय भक्तों को भगवान गणपति के दर्शन होंगे. हाल ही में मोती डूंगरी गणेश मंदिर के मुख्य द्वार को भगवान गणेश के अष्टविनायक स्वरूपों से सजाया गया है, जिसके चलते अब मंदिर के कपाट बंद होने पर भी भक्तों को भगवान गणपति के दुर्लभ दर्शन होंगे और उन्हें खाली हाथ नहीं लौटना पड़ेगा.

लगभग तीन महीने की मेहनत से मंदिर प्रशासन ने भगवान गणपति के गर्भगृह के मुख्य कपाट को सोने-चांदी से जड़कर भव्य स्वरूप दिया है. यह विशेष द्वार प्रथम पूज्य आराध्य मोती डूंगरी गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था और अध्यात्म को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. मंदिर में किए गए इस नए बदलाव की सबसे बड़ी खूबी यह है कि दोपहर में जब मंदिर के पट बंद हो जाते हैं, तब भक्त भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं कर पाते और उन्हें कपाट खुलने का इंतजार करना पड़ता है. ऐसे में अब श्रद्धालु कपाट पर अंकित भगवान गणपति के अष्टविनायक स्वरूपों के दिव्य दर्शन कर सकेंगे.

11 किलो चांदी से बनाया गया 15 फीट का भव्य दरवाजा

मोती डूंगरी गणेश मंदिर में भक्तों के दर्शन के लिए बनाया गया यह द्वार बेहद खास और सुंदर है, जिसे शिल्पकारों ने करीब 15×12 फीट आकार में तैयार किया है. इस कलात्मक दरवाजे के निर्माण में 11 किलो चांदी का उपयोग किया गया है. दरवाजे पर सुंदर नक्काशी के रूप में अष्टविनायक के स्वरूपों के साथ मूषकराज, ध्वज की मनोहारी आकृतियां, पारंपरिक कलात्मक चित्रकारी तथा सूक्ष्म नक्काशी की गई है. मोती डूंगरी गणेश मंदिर के इस विशेष कपाट का निर्माण प्रसिद्ध कलाकार सत्यनारायण कश्यप एवं उनकी टीम ने लगभग तीन माह की कड़ी मेहनत से किया है. इस सुंदर द्वार को बनाने के लिए कलाकारों ने पहले डिजाइन तैयार कर उसे धातु पर उकेरा, फिर विशेष तकनीक से चांदी की परत चढ़ाकर प्रत्येक आकृति को जीवंत स्वरूप प्रदान किया. पांच से छह सदस्यीय टीम प्रतिदिन पांच से छह घंटे कार्य कर इस उत्कृष्ट शिल्प को आकार देने में जुटी रही, तब जाकर यह द्वार तैयार हुआ.

मंदिर के गर्भगृह में हुआ गोल्डन वर्क

मंदिर में भक्तों के लिए भव्य कपाट के अलावा गर्भगृह में भी लंबे समय से गोल्डन वर्क का कार्य चल रहा था, जो अब पूरा हो चुका है. गोल्डन वर्क के तहत गर्भगृह के भीतर 1 किलो और बाहरी हिस्सों में 7 किलो सहित कुल 8 किलो सोने का कार्य पूरा किया जा चुका है. गोल्डन वर्क के अलावा मंदिर के गर्भगृह में आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीक से ऐसी व्यवस्था की गई है, जिससे रात्रि में भगवान के मुख्य विग्रह पर कोई परछाई नहीं पड़ेगी और श्रद्धालुओं को स्पष्ट दर्शन होंगे. मोती डूंगरी गणेश मंदिर में कपाट, गोल्डन वर्क सहित विभिन्न सुविधाओं के विकास पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं. अब मंदिर में इस विशेष द्वार और गोल्डन वर्क को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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