अगस्त में दो बड़े ग्रहण, पहला आज शाम तक प्रभावी; जानिए कब लगेगा दूसरा और भारत में क्या होगा असर

Last Updated:August 13, 2026, 08:43 IST
Solar and Lunar Eclipse August 2026: अगस्त 2026 में दो ग्रहण लग रहे हैं. पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगा, जिसका प्रभाव आज शाम तक माना जा रहा है. दूसरा आंशिक चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगेगा. दोनों ही ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे. इसलिए भारत में इनका सूतक काल मान्य नहीं होगा. देश के सभी मंदिरों में पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रहेंगी. श्रद्धालु बिना किसी सूतक नियम के अपनी दैनिक पूजा और साधना कर सकते हैं.
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Solar Lunar Eclipse 2026: अगस्त में दो ग्रहण, भारत में नहीं दिखेंगे; जानें सूतक का नियम
Solar and Lunar Eclipse August 2026: अगस्त 2026 का महीना खगोलीय और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहा है. इस महीने एक ही पखवाड़े के भीतर दो बड़े ग्रहण का योग बन रहा है. पहला ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण के रूप में लगा और दूसरा आंशिक चंद्र ग्रहण के रूप में लगने जा रहा है. इन खगोलीय घटनाओं को लेकर देशभर में ज्योतिषीय और आध्यात्मिक चर्चाएं तेज हैं. हालांकि, भारतीय श्रद्धालुओं के लिए सबसे राहत की बात यह है कि ये दोनों ही ग्रहण भारत की सीमा में दिखाई नहीं देंगे.
अगस्त का पहला ग्रहण 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण के रूप में घटित हुआ. यह खगोलीय घटना भारतीय समयानुसार रात्रि में 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू हुई और देर रात 1 बजकर 28 मिनट तक चली. रात्रि का समय होने के कारण भारत में यह ग्रहण पूरी तरह अदृश्य रहा. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, रात्रि कालीन सूर्य ग्रहण का प्रभाव अगले दिन की शाम तक वातावरण में सूक्ष्म रूप से माना जाता है. हालांकि, दृश्यता न होने के कारण किसी भी शहर में इसका प्रत्यक्ष सूतक काल प्रभावी नहीं हुआ.
28 अगस्त को लगेगा आंशिक चंद्र ग्रहणअगस्त महीने की दूसरी बड़ी खगोलीय घटना 28 अगस्त 2026 को घटित होगी. इस दिन आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा. भारतीय समयानुसार इस चंद्र ग्रहण की कुल अवधि सुबह 6 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगी. अगर इसके मुख्य चरण की बात करें, तो चंद्र ग्रहण की मुख्य आंशिक अवस्था सुबह 8 बजकर 4 मिनट पर शुरू होकर 11 बजकर 22 मिनट तक बनी रहेगी. यह ग्रहण मुख्यतः पश्चिमी गोलार्ध के देशों में दिखाई देगा.
भारत में क्यों मान्य नहीं होगा सूतक काल?धार्मिक ग्रंथों और ज्योतिषीय सिद्धांतों के अनुसार, सूतक काल का नियम केवल उसी भौगोलिक क्षेत्र पर लागू होता है जहां ग्रहण नग्न आंखों से या प्रत्यक्ष रूप से दृश्यमान हो. करौली के आध्यात्मिक गुरु पंडित हरिमोहन शर्मा के अनुसार, चूंकि सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों ही भारत में दिखाई नहीं देंगे, इसलिए देश में इनका सूतक काल मान्य नहीं होगा. मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे और दैनिक पूजा-पाठ, आरती तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठान बिना किसी बाधा के सामान्य रूप से संपन्न किए जा सकते हैं.
ग्रहण के दौरान जप, तप और दान का महत्वभले ही ग्रहण का सूतक काल भारत में मान्य न हो, लेकिन सनातन परंपरा में ग्रहण काल को आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है.
मंत्र जाप: इस दौरान इष्ट देव के मंत्रों का जाप करना मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है.
दान कार्य: ग्रहण समाप्त होने के बाद जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और तिल का दान करना शुभ माना जाता है.
स्नान व शुद्धि: ग्रहण काल के बाद किसी पवित्र नदी में स्नान करने या घर में गंगाजल छिड़क कर शुद्धि करने की परंपरा है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Karauli,Karauli,Rajasthan
First Published :
August 13, 2026, 08:43 IST



