अनुमति नहीं, फिर भी पाली में चालू है कपड़ा उद्योग, बेखौफ धड़क रही अवैध मशीनें, नियम भी बेअसर

पाली. एक तरफ सुप्रीम कोर्ट का सख्त फरमान, दूसरी तरफ अधिकारियों की खामोशी और बीच में घिसटता बांडी नदी का वजूद. पाली में प्रदूषण का यह खेल कोई नया नहीं है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि बिना अनुमति और तय क्षमता से ज्यादा मशीनें आज भी बेधड़क चल रही है. जब रिटायर्ड जस्टिस संगीत लोढ़ा चौथी बार बांडी नदी और ट्रीटमेंट प्लांट का जायजा लेने पहुंचे, तो जमीनी हकीकत देखकर वे भी दंग रह गए. सवाल सिर्फ इतना है कि जब अदालत का आदेश था कि क्षमता से अधिक लगी मशीनें हटाई जाएं, तो बिना अनुमति और बिना हायर अथॉरिटी से पूछे ये इकाइयां आज भी कैसे चल रही हैं?
पाली की लाइफलाइन कही जाने वाली बांडी नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने और CETP प्लांटों की मनमानी पर नकेल कसने के लिए निगरानी समिति के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस संगीत लोढ़ा एक्शन मोड में है. बांडी नदी में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण और ट्रीटमेंट प्लांटों की अव्यवस्थाओं को लेकर हाईकोर्ट द्वारा गठित निगरानी समिति के अध्यक्ष और रिटायर्ड जस्टिस संगीत लोढ़ा रविवार को चौथी बार स्थिति का जायजा लेने पाली पहुंचे. उन्होंने आउवा, फुलाद डैम, जोजावर, बोमादड़ा, हेमावास बांध और गढ़वाड़ा में बांडी नदी का सघन निरीक्षण किया. इसके बाद वे दोपहर में ट्रीटमेंट प्लांट-4 (CETP-4) पहुंचे, जहां खामियां मिलने पर उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RPCB) के अधिकारियों और CETP फाउंडेशन के पदाधिकारियों की जमकर क्लास ली.
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की उड़ रही धज्जियां
निरीक्षण के दौरान नेहड़ा गांव के किसान वागाराम विश्नोई ने लोढ़ा को बताया कि प्लांट छलकने से प्रदूषित पानी आसपास के खेतों में फैल रहा है. इस पर रिटायर्ड जस्टिस लोढ़ा ने RPCB के क्षेत्रीय अधिकारी राहुल शर्मा को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि जिन औद्योगिक इकाइयों में स्वीकृत केएलडी क्षमता से अधिक मशीनें लगी हैं, उन्हें तुरंत हटाया जाए. इसके बावजूद अतिरिक्त मशीनें क्यों नहीं हटाई जा रही हैं? बिना हायर अथॉरिटी से पूछे इतना बड़ा फैसला कैसे ले लिया गया? कोर्ट के आदेश को 6 महीने हो चुके हैं, फिर भी हालात जस के तस क्यों हैं?”
क्षमता नहीं तो इकाइयों से पानी क्यों ले रहे?
लोढ़ा ने CETP फाउंडेशन के सचिव संदीप मेहता और डायरेक्टर विनय बंब से तीखे सवाल करते हुए पूछा कि जब प्लांट की शोधन क्षमता ही नहीं है, तो फैक्ट्रियों से केमिकल युक्त पानी क्यों स्वीकार किया जा रहा है? किसान वागाराम ने मौके पर नया बनाया गया अतिरिक्त टैंक भी दिखाया. इस पर लोढ़ा ने RO को पूरे रिकॉर्ड का विश्लेषण करने के कड़े निर्देश दिए.
निरीक्षण के दौरान सामने आए मुख्य मुद्दे:
नदी में प्रदूषित पानी: प्लांट-4 के पीछे बांडी नदी में रसायनयुक्त पानी मिलने पर RO राहुल शर्मा ने सफाई दी कि यह पुराना पानी है और इस मामले में FIR दर्ज कराई जा चुकी है.
6 MLD क्षमता तक नहीं पहुंचा प्लांट: डायरेक्टर विनय बंब ने बताया कि प्लांट को 6 एमएलडी क्षमता पर चलाने का समय दिया गया था, लेकिन प्लांट संचालित करने वाली कंपनी इसे हासिल नहीं कर पाई है, जिसे नोटिस जारी किया गया है.
कार्रवाई में भेदभाव का आरोप: किसान वागाराम ने आरोप लगाया कि 24 जुलाई को RPCB की टीम ने मंडिया रोड स्थित जेके डाइंग और मेघा टैक्स प्रिंट्स की जांच की थी, लेकिन केवल जेके डाइंग पर कार्रवाई हुई. इस पर RO ने बताया कि वे उस समय छुट्टी पर थे और मेघा टैक्स प्रिंट्स की रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी गई है.
सूचना पर नाले से लिए गए सैंपल: निरीक्षण के दौरान ही जिला उद्योग केंद्र के पास एक फैक्ट्री के पाइप से सीधे नाले में केमिकल युक्त पानी बहाए जाने की सूचना मिली. सूचना मिलते ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और दूषित पानी के सैंपल सील किए.



