अमेरिका युद्ध में उलझा रहा, उधर चीन ने किया ऐसा खेल, होर्मुज का काम होगा तमाम – China Kyrgyzstan Uzbekistan railway project First tunnel completed

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अमेरिका युद्ध में उलझा रहा, उधर चीन ने किया ऐसा खेल, होर्मुज का काम होगा तमाम
Last Updated:September 06, 2026, 12:10 IST
China Railway Project: अमेरिका और इजरायल ने जबसे ईरान के साथ जंग की शुरुआत की है, पूरी दुनिया एनर्जी क्राइसिस से जूझ रही है. एशिया से लेकर यूरोप तक में तेल और गैस को लेकर हाहाकार मच गया. होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बाधित होने के बाद चीन और भारत जैसे देशों ने अब एनर्जी सप्लाई के लिए अल्टरनेटिव रूट की तलाश शुरू कर दी है.चीन एनर्जी और रेयर अर्थ मिनरल्स के गढ़ सेंट्रल एशिया के साथ जमीनी संपर्क बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है. रेल से उज्बेकिस्तान के जरिये किर्गिस्तान पहुंचने के लिए पहली सुरंग बना ली गई है. (फाइल फोटो)
China Railway Project: पश्चिम एशिया में महीनों से जंग चलने के कारण पैदा हुआ एनर्जी क्राइसिस खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. ईरान जंग की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से LPG और तेल से लदे टैंकर्स का आना-जाना सुचारू नहीं हो पा रहा है. जब लगने लगता है कि स्थिति सामान्य होगी, तभी ईरान और अमेरिका फिर से एक-दूसरे पर अटैक करने लगते हैं. होर्मुज में एक बार फिर से ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई है. वॉशिंगटन और तेहरान की तरफ से एक-दूसरे के जहाजों पर अटैक करने के दावे किए जा रहे हैं. अमेरिका जहां युद्ध में उलझा हुआ है, वहीं चीन ने बड़ा खेल कर दिया है. चीन धीरे-धीरे लैंड रूट के जरिये ईरान और पश्चिम एशिया के करीब पहुंच रहा है. बीजिंग फिलहाल किर्गिस्तान-उज्बेकिस्तान तक रेलवे कॉरिडोर बना रहा है. चीन ने किर्गिस्तान सेक्शन में पहली सुरंग बनाने का काम पूरा कर लिया है. यह अपने आप में बड़ी सफलता है.
जानकारी के अनुसार, चीन-किर्गिस्तान-उज्बेकिस्तान रेलवे प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है. किर्गिस्तान सेक्शन में नंबर-2 नॉर्थ कोश्तोबे सुरंग को सफलतापूर्वक आर-पार कर दिया गया है. चीन-किर्गिस्तान-उज्बेकिस्तान रेलवे कंपनी के मुताबिक, यह किर्गिस्तान खंड में पूरी होने वाली पहली सुरंग है. इसके साथ ही प्रोजेक्ट के कई अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों में भी निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है. कंपनी के एक अधिकारी के अनुसार, नॉर्थ कोश्तोबे नंबर-2 सुरंग की लंबाई 209.6 मीटर है और इसकी अधिकतम गहराई 41 मीटर तक है. इसे सिंगल-ट्रैक रेलवे सुरंग के तौर पर डिजाइन किया गया है. निर्माण टीम ने सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का पालन करते हुए निर्धारित समयसीमा में इसका निर्माण पूरा किया.
27 सुरंगों, 43 पुलों और 88 रोडबेड सेक्शन पर काम शुरू
‘ग्लोबल टाइम्स’ की रिपोर्ट को मानें तो इस परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है. रेलवे मार्ग को इस तरह तैयार किया गया है कि साइमैल्यु-ताश नेशनल पार्क और अन्य पर्यावरण रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से बचा जा सके. वन्यजीवों की आवाजाही और स्थानीय पशुपालकों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए मार्ग में कलवर्ट भी बनाए जा रहे हैं. कंपनी के मुताबिक, किर्गिस्तान खंड में निर्माण के लिए जरूरी प्रमुख अस्थायी सड़कें और बिजली सुविधाएं तैयार कर चालू की जा चुकी हैं. रेलवे के निर्माण के तहत अब तक 27 सुरंगों, 43 पुलों और 88 रोडबेड सेक्शन पर काम शुरू हो चुका है. इनमें एक सुरंग पूरी हो चुकी है. इसके अलावा 20 स्टेशनों के लिए नींव का काम भी चल रहा है.
ईरान जंग के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस की आवाजाही बाधित होने के बाद चीन अब सेंट्रल एशिया के साथ ही पश्चिम एशिया तक जमीनी पहुंच बनाने का प्रयास कर रहा है. इसके लिए रेलवे प्रोजेक्ट पर लगातार काम चल रहा है. (फाइल फोटो)
तुर्कमेनिस्तान के बाद ईरान
दिलचस्प बात है कि किर्गिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के बाद ईरान है, ऐसे में चीन भविष्य में तुर्कमेनिस्तान के रास्ते ईरान तक अपनी पहुंच बना सकता है. यदि चीन का यह प्रोजेक्ट सफल होता है तो चीन को ईरान समेत पश्चिम एशिया के अन्य देशों से तेल और गैस लाने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज या फिर बाब अल-मंदेब का जरूरत नहीं होगी. ईरान जंग और समुद्री लुटेरों की वजह से ये दोनों एनर्जी कॉरिडोर बेहद संवेदनशील हो चुके हैं.
चीन की रणनीति
अफ्रीका से मिली सीख के बाद चीन सेंट्रल एशिया में लोकल सेंटिमेंट का खास ख्याल रख रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर उसके प्रोजेक्ट के खिलाफ असंतोष न हो. इसलिए परियोजना में स्थानीय स्तर पर खरीदारी पर भी जोर दिया जा रहा है. कंपनी के अनुसार, अब तक 10 अरब सोम (करीब 11.4 करोड़ डॉलर) मूल्य की सामग्री और उपकरण स्थानीय स्तर से खरीदे गए हैं. परियोजना के लिए इस्तेमाल होने वाला पूरा ईंधन किर्गिस्तान से खरीदा जा रहा है, जबकि सीमेंट समेत प्रमुख निर्माण सामग्री का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा स्थानीय स्रोतों से लिया जा रहा है. इसके अलावा 1,700 से अधिक स्थानीय मशीनें किराये पर ली गई हैं. स्थानीय समुदायों के विकास के लिए कंपनी ने करीब 15.6 करोड़ सोम खर्च किए हैं. इसमें गांवों की सड़कों का उन्नयन, पानी और बिजली की आपूर्ति, दूरसंचार सुविधाएं, चिकित्सा सेवाएं और शिक्षा संबंधी सहायता शामिल है.
बेल्ट एंड रोड का नया चेहरा
चीन-किर्गिस्तान-उज्बेकिस्तान रेलवे तीनों देशों के बीच बेल्ट एंड रोड सहयोग की प्रमुख परियोजना है. यह रेलवे चीन के शिनजियांग स्थित काशगर से शुरू होकर तोरुगार्ट दर्रे के रास्ते किर्गिस्तान में प्रवेश करेगा. इसके बाद यह जलाल-अबाद से होते हुए उज्बेकिस्तान के पूर्वी हिस्से में स्थित अंदीजान तक पहुंचेगा. यह रेल संपर्क मध्य एशिया में चीन के साथ परिवहन और व्यापारिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली अहम परियोजना माना जा रहा है.
About the AuthorManish Kumar
बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…
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September 06, 2026, 11:46 IST



