अलवर के ‘ऐप गुरु’ इमरान खान की अनोखी कहानी, 112 ऐप बनाकर 3 करोड़ यूजर्स तक पहुंचे, ऐसे रचा इतिहास

Last Updated:September 08, 2026, 15:28 IST
Alwar News: अलवर के खारेड़ा गांव के शिक्षक इमरान खान को देशभर में ‘ऐप गुरु’ के नाम से जाना जाता है. उन्होंने अब तक 100 से अधिक शैक्षिक ऐप तैयार किए हैं. अलवर के तत्कालीन कलेक्टर आशुतोष पेडणेकर ने उन्हें ऐप के बढ़ते महत्व को देखते हुए इस दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया. यही प्रेरणा इमरान के जीवन का लक्ष्य बन गई.
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Alwar News: अलवर के खारेड़ा गांव के शिक्षक इमरान खान को देशभर में ‘ऐप गुरु’ के नाम से जाना जाता है. उन्होंने अब तक 100 से अधिक शैक्षिक ऐप तैयार किए हैं. अलवर के तत्कालीन कलेक्टर आशुतोष पेडणेकर ने उन्हें ऐप के बढ़ते महत्व को देखते हुए इस दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया. यही प्रेरणा इमरान के जीवन का लक्ष्य बन गई. वर्ष 2012 में उन्होंने विज्ञान से जुड़ा पहला ऐप बनाया और इसके बाद ऐप निर्माण उनका जुनून बन गया. वहीं अलवर का इमरान खान द्वारा भारत सरकार के अलावा मॉरीशस में फिलिपींस के लिए भी ऐप्स तैयार कर रहे हैं.
संस्कृत स्कूल के साधारण टीचर अलवर के ऐप गुरु शिक्षक इमरान खान की साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंदन में इमरान खान का जिक्र करते हुए कहा था कि मेरा भारत अलवर के इमरान में बसता है. इमरान खान ने बताएं कि 2015 में 50 ऐप बनाकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय को समर्पित किए थे. उन्होंने बताया कि यह शुरुआत गांव के स्कूल से हुई जब साल 2009 में अकेले स्कूल में संस्कृत टीचर थे, उनको चुनौती थी कि इतने सारे बच्चों को एक साथ कैसे पढ़ाएं. इस दौरान उन्होंने सोचा कि शिक्षा के क्षेत्र में मोबाइल और कंप्यूटर का भी उपयोग किया जाए.
शुरुआत करते हुए पहले वेबसाइट बनाईइस दौरान उन्होंने शुरुआत करते हुए पहले वेबसाइट बनाई, उसके बाद ऐप बनाने शुरू किए. साल 2015 में 50 ऐप बनाकर देश को दिए. इसके बाद ऐप निर्माण उनका जुनून बन गया. लगातार काम करते हुए अब तक करीब 112 ऐप तैयार कर चुके इमरान के करीब 100 ऐप प्ले स्टोर पर उपलब्ध हैं. उनके ऐप्स की पहुंच करीब 3 करोड़ यूजर्स तक है. उन्हें राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार सहित कई सम्मान मिल चुके हैं.
कक्षा में 180 बच्चों को अकेले पढ़ने का काम वह करते इमरान खान ने बताया कि साल 1999 में संस्कृत विभाग में गणित शिक्षक के तौर पर उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की. इस दौरान एक कक्षा में 180 बच्चों को अकेले पढ़ने का काम वह करते थे. इस दौरान उन्होंने वेबसाइट बनाई ताकि बच्चे कंप्यूटर पर पढ़ाई कर सकें. उसके बाद साल 2012 में उन्होंने अपना पहला अप तैयार किया, जो अब तक करीब 12 अप तैयार कर चुके हैं और इनमें करीब 100 एप प्ले स्टोर पर भी उपलब्ध हैं, सभी निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं.
ऐप बनाने का सिलसिला लगातार आगे बढ़ताइमरान खान को अलवर में कलेक्टर रहे आशुतोष पेडणेकर ने ऐप बनाने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने बताया कि उस समय एंड्रॉयड फोन का चलन नया था और ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्टफोन रखने वालों की संख्या भी काफी कम थी. तत्कालीन कलेक्टर से प्रेरणा लेकर इमरान खान ने गूगल और उपलब्ध संसाधनों की मदद से ऐप डेवलपमेंट सीखना शुरू किया. वर्ष 2012 में उन्होंने विज्ञान विषय से जुड़ा अपना पहला ऐप तैयार किया. इसके बाद ऐप बनाने का सिलसिला लगातार आगे बढ़ता गया.
विभिन्न स्तरों पर कई सम्मान और प्रशस्ति पत्र मिल चुके उन्होंने बताया कि उनका केंद्र और राज्य सहित विभिन्न स्तरों पर कई सम्मान और प्रशस्ति पत्र मिल चुके हैं. लगातार बदलती तकनीक के दौर में वे खुद अपने आप को बदलते रहते हैं और नए-नए तकनीक में काम करते हैं. दौरान रोजाना 13 से 14 घंटे तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एप डेवलपमेंट से जुड़ी नई चीज़ सीखने और उन्हें वास्तविक जीवन में लागू करने में व्यस्त रहते हैं. इमरान खान को अब तक राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, राष्ट्रीय आईसीटी पुरस्कार, जमनालाल बजाज पुरस्कार, भामाशाह सम्मान पुरस्कार समेत अनेक सम्मान मिल चुके हैं.
अलवर के अप गुरु इमरान खान ने बताया कि अभी AI शिक्षा के क्षेत्र में गेम चेंजर साबित हो सकती है. इस वक्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विद्यार्थी अच्छे से इस्तेमाल करें तो इससे अच्छा सीखने का अवसर बढ़ सकता है.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Alwar,Rajasthan
First Published :
September 08, 2026, 15:28 IST



