आंखों से नहीं कानों से खोजिए घना के इस दुर्लभ पक्षी को, मानसून में फिर गूंज रही सुरीली आवाज

Last Updated:September 06, 2026, 06:47 IST
Keoladeo Ghana National Park Rare Birds: भरतपुर के केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान में मानसून के साथ दुर्लभ ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड की मौजूदगी एक बार फिर महसूस की जा रही है. घना की घनी और ऊंची घास के बीच इन दिनों इस पक्षी की तेज और मधुर आवाज पक्षी प्रेमियों का ध्यान खींच रही है. ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड बेहद शर्मीला पक्षी है, इसलिए इसे देखना आसान नहीं होता. इंसानों की हलचल महसूस होते ही यह घास में छिप जाता है. हालांकि, अनुभवी बर्ड वॉचर इसकी आवाज से इसकी मौजूदगी का अंदाजा लगा लेते हैं. मानसून में घना की हरियाली और घास के मैदान इस पक्षी के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं. बर्ड फोटोग्राफर इसकी एक झलक कैमरे में कैद करने के लिए घंटों इंतजार करते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, इसे देखने के लिए शांत रहना जरूरी है, क्योंकि हल्की आहट से भी यह घनी घास में छिप सकता है.
भरतपुर. राजस्थान के भरतपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान में मानसून के साथ एक बार फिर दुर्लभ और शर्मीले पक्षी ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड की मौजूदगी महसूस की जा रही है. घना की हरी-भरी घास और कांस के बीच इन दिनों इस पक्षी की मधुर और तेज आवाज पक्षी प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है. खास बात यह है कि इस पक्षी को देखना जितना मुश्किल है, उसकी आवाज सुनकर उसकी मौजूदगी का पता लगाना उतना ही आसान होता है.
ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड आमतौर पर घनी और ऊंची घास वाले क्षेत्रों में रहना पसंद करता है. यह बेहद शर्मीला पक्षी माना जाता है और इंसानों की हलचल महसूस होते ही घास के बीच छिप जाता है. यही कारण है कि घना आने वाले पर्यटकों और बर्ड वॉचर्स को कई बार इसकी आवाज तो सुनाई देती है. लेकिन पक्षी नजर नहीं आता. मानसून के दौरान केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान में हरियाली बढ़ जाती है और घास वाले क्षेत्रों में पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होता है.
ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड की मौजूदगी बर्ड वॉचर का बढ़ा रहा है रोमांच
इसी बीच ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड की आवाज भी घना के अलग-अलग घास वाले हिस्सों में सुनाई दे रही है. इसकी आवाज इतनी स्पष्ट होती है कि अनुभवी बर्ड वॉचर दूर से ही इसकी मौजूदगी का अंदाजा लगा लेते हैं. पक्षी प्रेमियों के लिए यह अनुभव किसी रोमांच से कम नहीं है. कई बर्ड फोटोग्राफर इसकी एक झलक कैमरे में कैद करने के लिए घास वाले इलाकों में घंटों इंतजार करते हैं. हालांकि, पक्षी को देखने के लिए घास के क्षेत्र में अनावश्यक हलचल करने के बजाय शांत रहना जरूरी होता है, क्योंकि जरा सी आहट से यह पक्षी दोबारा घनी घास में छिप सकता है.
अपनी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान
केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान अपनी जैव विविधता और सैकड़ों प्रजातियों के पक्षियों के लिए दुनियाभर में पहचान रखता है. यहां मौसम के साथ पक्षियों की गतिविधियों में भी बदलाव देखने को मिलता है. मानसून के दौरान घना का प्राकृतिक वातावरण और घास के मैदान कई स्थानीय और दुर्लभ पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आवास बन जाते हैं. ऐसे में अगर आप मानसून में घना घूमने जाएं तो सिर्फ आंखों से पक्षियों को तलाशने के बजाय अपने कानों को भी खुला रखिए हो सकता है. क्या पता घनी घास के बीच दिखाई न देने वाला यह दुर्लभ ब्रिस्टल्ड ग्रासबर्ड अपनी सुरीली आवाज से आपको अपनी मौजूदगी का संकेत दे रहा हो.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Bharatpur,Rajasthan
First Published :
September 06, 2026, 06:47 IST



