इस बार घर लाएं पन्ना के गणपति, कौन-सी प्रतिमा रहेगी मंगलकारी? जानें स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Last Updated:September 12, 2026, 17:31 IST
Ganesh Chaturthi Special 2026: भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के अवसर पर देशभर में घर-घर गणपति की स्थापना की जाएगी. श्रद्धालु अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार मिट्टी, पीतल, चांदी, सोने सहित अलग-अलग धातुओं से बनी गणेश प्रतिमाएं घर लेकर आते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश की पूजा से शुभ कार्यों में आने वाले विघ्न दूर होते हैं और बुद्धि, विवेक तथा समृद्धि की कामना की जाती है.
विघ्नहर्ता भगवान गणेश के जन्मोत्सव का पर्व गणेश चतुर्थी इस बार 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा. भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के अवसर पर देशभर में घर-घर गणपति की स्थापना की जाएगी. श्रद्धालु अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार मिट्टी, पीतल, चांदी, सोने सहित अलग-अलग धातुओं से बनी गणेश प्रतिमाएं घर लेकर आते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश की पूजा से शुभ कार्यों में आने वाले विघ्न दूर होते हैं और बुद्धि, विवेक तथा समृद्धि की कामना की जाती है.
इस वर्ष गणेश चतुर्थी सोमवार को पड़ रही है. हिन्दू पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे से शुरू होकर 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे तक रहेगी. ऐसे में इस बार गणेश पूजन का मध्याह्न मुहूर्त लगभग 11:08 बजे से दोपहर 1:36 बजे तक बताया गया है. स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है.
करौली के भागवत आचार्य पंडित रमेश चंद्र शास्त्री के अनुसार भगवान गणेश की उपासना में श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है. किसी भी सात्त्विक और विधि-विधान से स्थापित गणेश प्रतिमा की पूजा शुभ मानी जाती है. हालांकि ज्योतिषीय मान्यताओं में पन्ना का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है और बुध को बुद्धि, वाणी तथा विवेक से जोड़ा जाता है.
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शास्त्री के अनुसार भगवान गणेश स्वयं बुद्धि और विवेक के देवता माने जाते हैं. इसलिए पन्ना से बनी गणेश प्रतिमा को घर के पूजा स्थान पर स्थापित करना विशेष फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि ऐसी प्रतिमा की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से बुद्धि, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है.
हालांकि पन्ना एक महंगा रत्न है, इसलिए हर व्यक्ति के लिए इसकी प्रतिमा खरीदना जरूरी नहीं है. श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार मिट्टी, पंचधातु, पीतल, चांदी या अन्य धातु की गणेश प्रतिमा स्थापित कर सकते हैं. पं रमेश शास्त्री बताते हैं कि गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा, पुष्प, अक्षत, रोली, धूप-दीप और मोदक या लड्डू अर्पित करना शुभ माना जाता है. गणेश जी को दूर्वा विशेष प्रिय मानी जाती है.
उन्होंने कहा कि पूजा के लिए सबसे जरूरी वस्तु महंगी प्रतिमा या भव्य सजावट नहीं, बल्कि स्वच्छ मन, श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई उपासना है. परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए गणेश जी से प्रार्थना करनी चाहिए.
गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार गणपति को अलग-अलग अवधि के लिए घर में विराजित करते हैं कोई डेढ़ दिन तो कोई पांच, सात या दस दिन तक पूजा करता है. इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को होगी और इसी दिन कई स्थानों पर गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा. ऐसे में आप इस बार गणेश चतुर्थी पर अपनी श्रद्धा अनुसार श्री गणेश को विधि विधान से विराजमान कर सकते है.
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September 12, 2026, 17:31 IST



