उदयपुर का वो बाजार जहां कभी मेवाड़ की रानियां खरीदती थीं चूड़ियां, आज भी जिंदा है 100 साल पुरानी विरासत

Last Updated:August 24, 2026, 15:41 IST
Udaipur Hindi News: त्योहारों के समय लखारा चौक की गलियां रंग-बिरंगी चूड़ियों से सज जाती हैं.सावन, तीज और अन्य त्योहारों पर महिलाएं यहां चूड़ियां खरीदने पहुंचती हैं. स्थानीय दुकानदारों के मुताबिक पहले की तुलना में बाजार की रौनक कुछ कम हुई है. आधुनिक बाजारों और ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन का असर पारंपरिक बाजारों पर भी पड़ा है.
ख़बरें फटाफट
उदयपुर: उदयपुर शहर की पुरानी गलियों में कई ऐसे बाजार आज भी मौजूद हैं, जिनके साथ मेवाड़ के इतिहास और परंपराओं की गहरी कहानी जुड़ी हुई है. इन्हीं में से एक है लखारा चौक, जो वर्षों से अपनी खास लाख की चूड़ियों और चूड़ी बनाने वाले कारीगर परिवारों के लिए पहचाना जाता है.कहा जाता है कि पुराने समय में मेवाड़ की रानियां और राजकुमारियां भी यहां चूड़ियां खरीदने के लिए पहुंचती थीं. यही वजह है कि लखारा बाजार आज भी उदयपुर की पुरानी संस्कृति का अहम हिस्सा माना जाता है.
लखारा चौक में रहने वाले कई परिवार पीढ़ियों से चूड़ियां बनाने और बेचने के काम से जुड़े हुए हैं. यहां कभी गलियों में लाख को गर्म कर उसे आकार देने, रंग-बिरंगी चूड़ियां तैयार करने और उन्हें सजाने का काम बड़े स्तर पर होता था. समय के साथ बाजार में बदलाव आया और मशीनों से तैयार होने वाली चूड़ियों का चलन बढ़ा, लेकिन लखारा बाजार के पुराने परिवारों ने अपनी इस परंपरा को आज भी पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया.
परिवार के लोग चूड़ी बनाने का काम करतेलखारा चौक स्थित हिमानी बैंगल्स की संचालक बताती हैं कि उनका परिवार लंबे समय से इसी बाजार में रह रहा है. पुराने समय में उनके परिवार की पहचान खास लाख की चूड़ियां बनाने वाले कारीगरों के रूप में थी.आज भी परिवार के लोग चूड़ी बनाने का काम करते हैं, हालांकि बदलते दौर के साथ इस पारंपरिक कला का स्वरूप काफी बदल गया है. अब बाजार में लाख के साथ कांच, मेटल, डिजाइनर और कई तरह की रंग-बिरंगी चूड़ियां भी उपलब्ध हैं.
पारिवारिक और सामाजिक परंपराओं से जुड़ालखारा बाजार की सबसे खास पहचान आज भी शादी-ब्याह की चूड़ियां हैं. मेवाड़ में शादी के दौरान दुल्हन के लिए तैयार होने वाला खास चूड़ा यहां से बनवाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है.इतना ही नहीं, शादी के बाद जब दुल्हन की चूड़ा बदलवाने की रस्म होती है, तब भी परिवार इस बाजार में पहुंचते हैं.इस तरह बाजार सिर्फ खरीदारी की जगह नहीं, बल्कि कई पारिवारिक और सामाजिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है.
लखारा चौक की गलियां रंग-बिरंगी चूड़ियों से सज जातीत्योहारों के समय लखारा चौक की गलियां रंग-बिरंगी चूड़ियों से सज जाती हैं. सावन, तीज और अन्य त्योहारों पर महिलाएं यहां चूड़ियां खरीदने पहुंचती हैं. स्थानीय दुकानदारों के मुताबिक पहले की तुलना में बाजार की रौनक कुछ कम हुई है. आधुनिक बाजारों और ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन का असर पारंपरिक बाजारों पर भी पड़ा है.
पुराने शहर की संस्कृति की झलक दिखाई देतीइसके बावजूद लखारा बाजार आज भी अपनी पुरानी पहचान को संभाले हुए है.यहां की दुकानों, कारीगर परिवारों और चूड़ियों में उदयपुर के पुराने शहर की संस्कृति की झलक दिखाई देती है. यह बाजार सिर्फ चूड़ियों की खरीदारी का स्थान नहीं, बल्कि मेवाड़ की उस परंपरा की निशानी है, जिसे पीढ़ियों से लखारा परिवार अपने हुनर के जरिए आगे बढ़ाते आ रहे हैं.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
और पढ़ेंLocation :
Udaipur,Rajasthan
First Published :
August 24, 2026, 15:41 IST



