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उधर उन्नाव में स्वाइल फ्लू से देवर-भाभी की मौत, इधर कानपुर अस्पताल हुआ अलर्ट, 40 बेड का स्पेशल वार्ड तैयार

Last Updated:September 11, 2026, 18:19 IST

Kanpur News: कानपुर मेडिकल कॉलेज स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट मोड पर है, जहां दो वार्ड तैयार किए गए हैं और 40 बेड आरक्षित रखे गए हैं. बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने की सलाह दी गई है.

कानपुर: शहर से करीब 28 किलोमीटर दूर उन्नाव में देवर-भाभी की स्वाइन फ्लू से मौत के बाद गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (जीएसवीएम) के डॉक्टर्स अलर्ट हो गए हैं. मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एलएलआर अस्पताल में स्वाइन फ्लू के मरीजों के इलाज के लिए दो अलग वार्ड तैयार किए गए हैं. दोनों वार्ड में 10-10 बेड हैं. इसके अलावा चार-चार वेंटीलेटर वाले 20 बेड भी गंभीर मरीजों के लिए रिजर्व रखे गए हैं. इस तरह अस्पताल में कुल 40 बेड स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए तैयार किए गए हैं.

मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अस्पताल के अंदर जगह-जगह स्वाइन फ्लू के लक्षणों और बचाव के उपायों की जानकारी देने वाली स्टैंडीज लगाई हैं. प्राचार्य डॉ. संजय काला खुद तैयारियों पर नजर रख रहे हैं. उन्होंने सभी डॉक्टर्स और कर्मचारियों को अपनी सुरक्षा के साथ मरीजों का इलाज करने के निर्देश दिए हैं. उनका कहना है कि गंभीर मरीजों को घर पर इलाज करने के बजाय बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

बच्चों के लिए सीरप, बड़ों के लिए तीन तरह की टेबलेट्सजीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में स्वाइन फ्लू के मरीजों के इलाज के लिए दवाओं का भी पर्याप्त इंतजाम किया गया है. प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि बच्चों के लिए सीरप और वयस्कों के लिए 30, 45 और 75 मिलीग्राम की टेबलेट्स उपलब्ध हैं. सीएमओ कार्यालय से 25 वैक्सीन भी अस्पताल पहुंच चुकी हैं. जरूरत के अनुसार और वैक्सीन खरीदी जा रही है.

उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीज एलएलआर अस्पताल पहुंचते हैं, तो उनका इलाज तुरंत शुरू किया जाएगा. अस्पताल में गंभीर मरीजों के लिए जरूरी सुविधाएं तैयार रखी गई हैं. डॉक्टर्स को निर्देश दिए गए हैं कि मरीजों की हालत पर लगातार नजर रखें और जरूरत पड़ने पर उन्हें वेंटीलेटर की सुविधा उपलब्ध कराएं.

ये लक्षण दिखे तो तुरंत पहुंचें अस्पतालप्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि स्वाइन फ्लू की शुरुआत कई बार सामान्य सर्दी-जुकाम जैसी लग सकती है, लेकिन कुछ लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए. तेज बुखार, कई दिनों तक लगातार खांसी, गले में खराश, सांस फूलना और छाती में तेज दर्द इसके प्रमुख लक्षण हैं. नाक बहना और उल्टी आना भी हो सकता है.

उन्होंने कहा कि अगर बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी हो रही है या खांसी लगातार बढ़ रही है तो मरीज को तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए. खासकर गंभीर निमोनिया से पीड़ित मरीजों को इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए. समय पर इलाज मिलने से मरीज की हालत बिगड़ने से बचाई जा सकती है.

डॉक्टर्स भी रखें अपनी सुरक्षा का ध्यानडॉ. संजय काला ने लोगों से सर्दी-जुकाम से बचाव के लिए सावधानी बरतने की अपील की है. भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाते समय मास्क पहनें और हाथों की साफ-सफाई का ध्यान रखें. उन्होंने कहा कि स्वाइन फ्लू के मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर्स और कर्मचारियों की सुरक्षा भी बहुत जरूरी है. अस्पताल में काम करने वाले सभी लोगों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं.

About the Authorआर्यन सेठ

आर्यन सेठ, Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…

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Kanpur Nagar,Uttar Pradesh

First Published :

September 11, 2026, 18:19 IST

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