Desert Farming Success Story | रेगिस्तान में खेती का बिजनेस मॉडल और 15 लाख कमाई

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रेगिस्तान में खेती का ऐसा मॉडल, अनार-खजूर के साथ 500 भेड़ों से लाखों की कमाई
Last Updated:September 11, 2026, 10:17 IST
Farmer Hariram Bhakhar Success Story: बाड़मेर जिले के जानपालिया गांव के प्रगतिशील किसान हरिराम भाखर ने रेगिस्तान में खेती का एक अनूठा बिजनेस मॉडल तैयार किया है. उन्होंने 3000 अनार और 200 खजूर के पौधों के साथ-साथ नेपियर घास की खेती और 500 भेड़ों की पशुपालन इकाई को आपस में जोड़ा है. कृषि और पशुपालन से निकलने वाले गोबर से गोबर गैस और जैविक खाद का उपयोग किया जा रहा है. इस एकीकृत और आधुनिक खेती के मॉडल की बदौलत किसान हरिराम भाखर का सालाना टर्नओवर करीब 15 लाख रुपये तक पहुंच गया है, जो अन्य किसानों के लिए एक बेहतरीन मिसाल है.
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Barmer: सरहदी बाड़मेर जिले के सीमावर्ती जानपालिया गांव के किसान हरिराम भाखर ने रेगिस्तान की कठिन जलवायु, कम बारिश और पानी की कमी जैसी चुनौतियों को पूरी तरह अवसर में बदल दिया है. उन्होंने खेती को केवल जीवनयापन का साधन न मानकर एक बेहतरीन बिजनेस मॉडल के रूप में विकसित किया है. हरिराम भाखर अपने खेत में अनार, खजूर और बेर जैसी कम पानी में अधिक पैदावार देने वाली बागवानी फसलों की खेती कर रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने खेत में थार शोभा खेजड़ी, अजोला, चीकू और सहजन के पौधे भी लगाए हैं, जिससे कृषि में विविधता आई है और कम लागत में बेहतर आमदनी हासिल हो रही है.
किसान हरिराम भाखर ने खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी अपने इस बिजनेस मॉडल का मुख्य हिस्सा बनाया है. उन्होंने राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना के तहत 500 भेड़ों की एक बड़ी इकाई स्थापित की है. उनके फार्म हाउस पर करीब 3000 अनार के पौधे और 200 खजूर के पौधे लहलहा रहे हैं. इसके अलावा पशुओं के लिए एक हेक्टेयर भूमि पर विशेष रूप से नेपियर घास की खेती की जा रही है. नेपियर घास के उत्पादन से पशुओं के चारे पर बाहर से होने वाला भारी खर्च काफी हद तक कम हो जाता है, जिससे खेती की समग्र लागत में बड़ी बचत होती है.
गोबर गैस और जैविक ऊर्जा का उपयोग
इस अनूठे बिजनेस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत ऊर्जा और संसाधनों का चक्र है. खेती और पशुपालन से निकलने वाले गोबर का सही उपयोग करने के लिए बायोगैस प्लांट लगाया गया है. इस गोबर गैस प्लांट से फार्म पर ऊर्जा की दैनिक जरूरतें आसानी से पूरी हो जाती हैं. इसके साथ ही संयंत्र से निकलने वाली जैविक खाद का उपयोग खेतों और बागवानी में किया जाता है, जिससे पौधों की सेहत अच्छी रहती है और रासायनिक खादों पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाती है.
शानदार टर्नओवर और आर्थिक मजबूती
बागवानी, पशुपालन, चारा उत्पादन और ऊर्जा के इस मिले-जुले इंटीग्रेटेड मॉडल के दम पर किसान हरिराम भाखर का सालाना टर्नओवर करीब 15 लाख रुपये तक पहुंच गया है. रेगिस्तान की रेतीली जमीन पर इस प्रकार का सफल बिजनेस मॉडल अन्य किसानों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा बन गया है. यह साबित करता है कि सही योजना, नवाचार और संसाधनों के उचित प्रबंधन से बंजर या कम उपजाऊ भूमि से भी बंपर कमाई की जा सकती है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Barmer,Barmer,Rajasthan
First Published :
September 11, 2026, 10:17 IST



