एक चूल्हा, 55 सदस्य और 5 सगी बहनों की अनोखी कहानी, भरतपुर का यह परिवार एकजुटता की है मिसाल

Last Updated:September 06, 2026, 10:40 IST
Bharatpur Unique Family: आज के दौर में जहां संपत्ति और घरेलू जिम्मेदारियों को लेकर परिवारों में बंटवारे की खबरें आम हैं, वहीं भरतपुर के रमासपुर गांव का चौधरी परिवार एकजुटता की मिसाल बना हुआ है. परिवार में करीब 55 सदस्य हैं और सभी एक ही घर में साथ रहते हैं. यहां पांच भाइयों की शादी करौली के एक ही गांव की पांच सगी बहनों से हुई है. पांचों बहनें अब एक ही परिवार में देवरानी और जेठानी हैं. परिवार में खाना एक ही चूल्हे पर बनता है और बड़े फैसले आपसी सहमति से लिए जाते हैं. घर की व्यवस्था के लिए सदस्यों ने खेती, पशुपालन, बच्चों की पढ़ाई और आर्थिक प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियां बांट रखी हैं. परिवार के मुताबिक, रिश्तों में दूरी संपत्ति से नहीं बल्कि सोच से पैदा होती है. आपसी सम्मान और सहयोग ने परिवार को वर्षों से एकजुट रखा है.
भरतपुर. राजस्थान के भरतपुर जिले के हलैना क्षेत्र स्थित रमासपुर गांव एक ऐसे परिवार की वजह से चर्चा में है, जिसने बदलते दौर में भी संयुक्त परिवार की परंपरा को मजबूती से संभाल रखा है. जहां जमीन-जायदाद, पैसों और घरेलू जिम्मेदारियों को लेकर परिवारों में दूरियां बढ़ रही हैं. वहीं मुरारी चौधरी का परिवार आज भी एक साथ रहकर एकजुटता की अनोखी मिसाल पेश कर रहा है. इस परिवार में करीब 55 सदस्य हैं और सभी एक ही छत के नीचे मिल-जुलकर जीवन बिता रहे हैं.
इस परिवार की सबसे दिलचस्प बात इसकी रिश्तेदारी है. परिवार के पांच सगे भाइयों की शादी करौली जिले के एक ही गांव में रहने वाली पांच सगी बहनों से हुई है. यानी एक ही घर की पांच बेटियां रमासपुर के एक ही परिवार की पांच बहुओं के रूप में आई. आज ये पांचों बहनें देवरानी और जेठानी के रिश्ते में हैं और परिवार के हर सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ खड़ी रहती हैं.
आपसी सहमति से लिए जाते हैं घरेलू फैसले
मुरारी चौधरी ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उनके पिता के पांच बेटे और एक बेटी हैं. समय के साथ परिवार बढ़ता गया, लेकिन भाइयों के बीच बंटवारे की नौबत नहीं आई. आज भी घर में भोजन अलग-अलग रसोई में नहीं बल्कि एक ही चूल्हे पर तैयार होता है. परिवार के सदस्य साथ बैठकर खाना खाते हैं और घरेलू फैसले भी आपसी सहमति से लिए जाते हैं. परिवार की व्यवस्था भी अपने आप में खास है. घर के सदस्यों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियां तय कर रखी हैं.
परिवार में बटी हुई हैं सभी की जिम्मेदारियां
कोई खेती संभालता है तो कोई पशुपालन की जिम्मेदारी निभाता है. कोई बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देता है तो कोई घर के आर्थिक प्रबंधन में सहयोग करता है. परिवार के सबसे बड़े भाई की पत्नी ग्राम पंचायत गोविंदपुरा की सरपंच हैं. इसके बावजूद उनका व्यवहार परिवार के अन्य सदस्यों की तरह ही सहज है. परिवार का कहना है कि घर बड़ा होने से रिश्ते मुश्किल नहीं होते बल्कि सोच छोटी होने से दूरियां पैदा होती हैं.
सहयोग और भरोसे पर टिका है पूरा परिवार
आपसी सम्मान सहयोग और भरोसे ने इस परिवार को आज भी एक साथ जोड़े रखा है. रमासपुर का यह परिवार उन लोगों के लिए मिसाल है, जो छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते तोड़ लेते हैं. वहीं 55 लोगों का एक साथ रहना यह संदेश देता है कि परिवार की असली ताकत संपत्ति में नहीं बल्कि प्रेम, समझ और एक-दूसरे के लिए खड़े रहने में होती है.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Bharatpur,Rajasthan
First Published :
September 06, 2026, 10:40 IST



