काम के चक्कर में सेहत से समझौता? जानिए क्यों डॉक्टर ‘बिजी लाइफस्टाइल’ को मान रहे हैं बीमारियों की नई लहर

Sedentary Lifestyle Side Effects : “मेरी सेहत ठीक नहीं चल रही है और मुझे अपना ध्यान रखना चाहिए, लेकिन क्या करूं, मेरे पास बिल्कुल टाइम नहीं है.” यह एक ऐसा वाक्य है जो आजकल हर डॉक्टर के क्लिनिक में सबसे ज्यादा सुनने को मिलता है. पहली बार में यह बात एकदम जायज और समझने लायक लगती है. लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स इसी ‘बिजी लाइफस्टाइल’ को आजकल तेजी से बढ़ रही गंभीर बीमारियों की सबसे बड़ी और खतरनाक वजह मान रहे हैं.
परेशानी यह नहीं है कि लोग जानबूझकर अपनी सेहत को नजरअंदाज करते हैं. असल में काम की व्यस्तता के बीच सेहत बहुत खामोशी से हमारी प्राथमिकताओं की लिस्ट से बाहर होती चली जाती है. कभी समय पर खाना न खाना या उसकी जगह रेडी-टू-ईट जंक फूड से पेट भर लेना, तो कभी काम का बोझ खत्म करने के लिए नींद की बलि चढ़ा देना और एक्सरसाइज को अनिश्चित समय के लिए टाल देना.
शुरुआत में ये छोटी-छोटी लापरवाहियां बहुत मामूली लगती हैं, लेकिन देखते ही देखते यही हमारी जिंदगी का नया नॉर्मल बन जाती हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसी बिजी रूटीन को एक साइलेंट किलर मान रहे हैं, जो बिना किसी शुरुआती लक्षण के शरीर को अंदर से खोखला कर रहा है.
दिक्कत समय की नहीं, प्राथमिकताओं की हैज्यादातर लोगों के पास समय की कमी नहीं होती, बल्कि सही और व्यवस्थित आदतों की कमी होती है. दिन में 10-15 मिनट टहलना, समय पर भोजन करना और 7-8 घंटे की गहरी नींद लेना कोई बहुत बड़ा काम नहीं है. लेकिन चूंकि इन छोटी-छोटी आदतों का फायदा तुरंत दिखाई नहीं देता, इसलिए लोग इन्हें आसानी से टाल देते हैं.
इसके विपरीत, ऑफिस का काम पूरा करने पर तुरंत नतीजा या सराहना मिलती है, जिससे हम अनजाने में अपनी सेहत से समझौता कर बैठते हैं. हमारा शरीर बहुत धीमी रफ्तार से खराब लाइफस्टाइल पर अपनी प्रतिक्रिया देता है.
ब्लड प्रेशर का धीरे-धीरे बढ़ना, ब्लड शुगर का अनियंत्रित होना और मेटाबॉलिज्म का सुस्त पड़ना—इनके शुरुआती दौर में कोई लक्षण नजर नहीं आते. जब तक बीमारियां सामने आती हैं, तब तक अंदर ही अंदर काफी नुकसान हो चुका होता है.
‘व्यस्त’ होने का मतलब ‘एक्टिव’ होना नहीं-एक बहुत बड़ी गलतफहमी यह है कि अगर आपका कैलेंडर फुल है, तो आप शारीरिक रूप से भी एक्टिव हैं. जबकि हकीकत यह है कि आज की बिजी लाइफस्टाइल बेहद निष्क्रिय (Sedentary) हो चुकी है.
लोग घंटों एक ही जगह बैठकर स्क्रीन के सामने काम करते हैं. अगर आप दिन के 8-10 घंटे चेयर पर बिताते हैं, तो कभी-कभी की गई एक्सरसाइज भी आपको पूरी तरह बीमारियों से बचा नहीं सकती. कम मूवमेंट से शरीर शुगर और फैट को ठीक से नहीं पचा पाता, जिससे डायबिटीज, फैटी लिवर और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
नींद की कमी और तनाव का चक्र-भागदौड़ भरी जिंदगी में सबसे पहले नींद और मानसिक शांति की बलि चढ़ती है. पर्याप्त नींद न मिलने से शरीर के हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे बेवजह भूख लगती है और थकान बनी रहती है. वहीं, लगातार बना रहने वाला वर्क स्ट्रेस शरीर में कॉर्टिसोल (Stress Hormone) का स्तर बढ़ा देता है, जो पेट के आसपास फैट जमा करता है.
यह एक खतरनाक चेन रिएक्शन बन जाता है-कम नींद से तनाव बढ़ता है, तनाव से खान-पान बिगड़ता है और बिगड़ा खान-पान मेटाबॉलिज्म को बर्बाद कर देता है. बिजी लाइफस्टाइल का बहाना भले ही आज सही लगे, लेकिन इसके नतीजे बेहद गंभीर होते हैं. अगर आज आप अपनी सेहत के लिए थोड़ा सा वक्त नहीं निकालेंगे, तो कल बीमारी के इलाज के लिए आपको न चाहते हुए भी वक्त निकालना ही पड़ेगा.
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है. इसमें दी गई सलाह किसी भी तरह से पेशेवर डॉक्टरी परामर्श या इलाज का विकल्प नहीं है. अपनी सेहत या डाइट से जुड़ा कोई भी बदलाव करने से पहले किसी विशेषज्ञ डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह जरूर लें.



