भूरे अंडे ज्यादा हेल्दी या सफेद? खरीदने से पहले जानिए दोनों के बीच असली फर्क क्या है?

Eggs Difference: अंडे का डिब्बा खरीदते समय कई लोगों की नजर सफेद और भूरे अंडों पर टिक जाती है. अक्सर मन में सवाल आता है कि इनमें से कौन सा अंडा ज्यादा पौष्टिक है और क्या भूरे अंडे सफेद अंडों से बेहतर होते हैं. कुछ लोग मानते हैं कि भूरे खोल वाले अंडे ज्यादा देसी, शुद्ध या हेल्दी होते हैं. वहीं सफेद अंडों को कई लोग सामान्य विकल्प समझते हैं.
इसी वजह से दोनों को लेकर बाजार में अलग-अलग धारणाएं देखने को मिलती हैं, लेकिन अंडे के खोल का रंग देखकर उसकी गुणवत्ता तय करना सही तरीका नहीं है. असल फर्क कहां होता है और खरीदारी करते समय किन बातों पर ध्यान देना चाहिए, यह समझना ज्यादा जरूरी है.
सफेद और भूरे अंडों में असली अंतर क्या है
सफेद और भूरे अंडों के बीच सबसे बड़ा अंतर उनकी खोल के रंग का है. यह रंग मुख्य रूप से अंडा देने वाली मुर्गी की नस्ल पर निर्भर करता है. अलग-अलग नस्ल की मुर्गियां अलग रंग के अंडे दे सकती हैं. कुछ मुर्गियां सफेद खोल वाले अंडे देती हैं तो कुछ भूरे खोल वाले. इसका मतलब यह नहीं है कि भूरा अंडा अपने आप ज्यादा पौष्टिक हो जाता है. इसी तरह सफेद अंडे को कम गुणवत्ता वाला मानना भी सही नहीं है, अगर दोनों अंडे समान परिस्थितियों में उत्पादित हुए हैं तो केवल खोल के रंग के आधार पर उनके पोषण में बड़ा अंतर मानना ठीक नहीं होगा.
क्या भूरे अंडे ज्यादा पौष्टिक होते हैं
भूरे अंडों को लेकर सबसे आम धारणा यही है कि इनमें सफेद अंडों की तुलना में ज्यादा पोषण होता है. हालांकि, अंडे का रंग अपने आप उसके पोषण मूल्य को तय नहीं करता. अंडे में मौजूद प्रोटीन, वसा, विटामिन और दूसरे पोषक तत्वों पर मुर्गी का आहार और पालन-पोषण जैसी चीजों का असर पड़ सकता है. इसलिए अगर आप सिर्फ यह सोचकर भूरे अंडे खरीद रहे हैं कि उनका खोल भूरा है तो वे निश्चित रूप से ज्यादा हेल्दी होंगे, तो इस धारणा को बदलने की जरूरत है. अंडे की गुणवत्ता का आकलन करने के लिए सिर्फ रंग पर निर्भर नहीं रहना चाहिए.
अंडे खरीदते समय किन बातों पर दें ध्यान
जब आप बाजार से अंडे खरीदने जाएं तो खोल का रंग देखने के बजाय उनकी ताजगी और सही रखरखाव पर ध्यान देना ज्यादा उपयोगी है. साफ और बिना दरार वाले अंडे चुनना बेहतर रहता है, अगर खोल टूटा हुआ हो तो ऐसे अंडे लेने से बचना चाहिए. अंडों को खरीदने के बाद उन्हें सही तरीके से स्टोर करना भी जरूरी है. घर में उन्हें ऐसी जगह रखें जहां तापमान बहुत ज्यादा न हो और वे गंदगी या तेज गंध वाली चीजों के संपर्क में न आएं. पैकेट पर दी गई जानकारी और इस्तेमाल की तारीख भी देख लेना अच्छी आदत है.
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मुर्गी का आहार भी रखता है मायने
अंडे की गुणवत्ता की बात हो तो मुर्गी को मिलने वाला आहार भी महत्वपूर्ण कारक है. मुर्गी क्या खाती है और उसका पालन किस तरह किया जाता है, इन बातों का अंडे की कुछ पोषण संबंधी विशेषताओं पर असर पड़ सकता है. इसलिए सिर्फ सफेद या भूरा रंग देखकर किसी एक विकल्प को बेहतर मान लेना सही नहीं है. यही वजह है कि दो अंडों की तुलना करते समय उनका रंग देखने के साथ लेबल, ताजगी और उत्पादन से जुड़ी जानकारी पर भी नजर डालनी चाहिए, अगर किसी खास तरह के अंडे में अतिरिक्त पोषण का दावा किया गया है तो उस दावे की जानकारी पैकेट पर जरूर पढ़ें.
फिर सफेद या भूरा, कौन सा अंडा खरीदें
अगर आपके सामने सफेद और भूरे अंडों के दो डिब्बे हैं और दोनों की गुणवत्ता, ताजगी और रखरखाव समान है तो केवल रंग के आधार पर किसी एक को बेहतर चुनने की जरूरत नहीं है. दोनों में से अपनी पसंद और उपलब्धता के हिसाब से अंडे खरीदे जा सकते हैं.
कई बार भूरे अंडे महंगे भी दिखाई दे सकते हैं. ऐसे में यह मान लेना जरूरी नहीं कि ज्यादा कीमत का मतलब ज्यादा पोषण है. कीमत पर नस्ल, उत्पादन लागत, ब्रांड और बाजार जैसे कई कारकों का असर हो सकता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)



