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किंग कोबरा भी काट लें तो भी अब मौत नहीं होगी, IIsc के वैज्ञानिकों ने बनाया नया एंटीवैनम दवा, देर का जहर भी होगा बेअसर

Last Updated:September 11, 2026, 13:22 IST

New Antivenom for King Cobra: भारत में जहरीले सांपों के काटने से हर साल 50 हजार लोगों की जान चली जाती हैं. इनमें से 80 प्रतिशत मौतें सिर्फ किंग कोबरा के कारण होती है. किंग कोबरा सबसे खतरनाक सांप है जो देश के हर हिस्से में पाया जाता है. जब जहर ज्यादा हो जाता है तो इस पर एंटीवैनम दवा का असर कम हो सकता है. इसलिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिकों ने पहली बार रिकंबिनेंट एंटी-वैनम दवा तैयार की है जो कितना भी विषैले किंग कोबरे के जहर को बेअसर कर सकती है.किंग कोबरा भी काट लें तो भी अब मौत नहीं होगी, IIsc के वैज्ञानिकों ने बनाई दवा Zoomकिंग कोबरा के जहर का इलाज.

भारत में सबसे ज्यादा किंग कोबरा पाया जाता है. भारत में 50 हजार लोगों की मौत जहरीले सांपों के काटने से होती है. इनमें से 80 प्रतिशत मौतें कोबरा के काटने से होती है. इसका जहर सबसे विषैला माना जाता है. कभी-कभी जहर इतना खतरनाक हो जाता है कि एंटी-वैनम दवा भी बेअसर होने लगती है. ऐसे मामलों में मौत को नहीं रोका जा सकता है. इसलिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिकों ने रिकंबिनेंट एंटीवैनम तैयार किया है जिससे किंग कोबरा के जहर को शरीर से खत्म किया जा सकता है. वैज्ञानिकों ने डेनमार्क टेक्निकल यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर लैब में यह नया और आधुनिक एंटीवेनम तैयार किया है. यह नया एंटीवेनम विशेष रूप से बेहद जहरीले नाग और किंग कोबरा के जानलेवा जहर को बेअसर करने के लिए बनाया गया है. इसमें 5 अलग-अलग तरह की कृत्रिम नैनो-बॉडीज को मिलाया गया है. यह शरीर के अंदर जाकर अलग-अलग प्रकार के कोबरा जहर को सफलतापूर्वक खत्म कर देती हैं. सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह दवा सांप काटने के बहुत देर बाद भी जहर को खत्म करने में सक्षम है. प्रतिष्ठित साइंस पत्रिका साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है.

अभी इंसानों पर ट्रायल किया जाएगा

नैनोबॉडी एंटीबॉडी का एक बहुत ही छोटा और आधुनिक रूप है. यह प्राकृतिक रूप से ऊंट प्रजाति के जानवरों जैसे कि ऊंट, लामा और अल्पाका आदि में पाए जाने वाले विशेष एंटीबॉडी से प्रेरित होकर बनाया जाता है. अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता कार्तिक सुनागर के अनुसार आधुनिक बायोटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके तैयार किया गया यह नया नैनोबॉडी कॉकटेल भारत के सबसे खतरनाक सांपों के जहर को बेअसर करने में बेहद सक्षम है. यह भारत में पाए जाने वाले सामान्य नाग, मोनोसेलेट कोबरा और पश्चिमी घाट व उत्तर-पूर्वी हिस्सों में पाए जाने वाले किंग कोबरा की दोनों प्रजातियों के जहर को खत्म करता है. भारत और दुनिया भर में सांप के काटने से होने वाली सबसे ज़्यादा मौतों और विकलांगता के लिए सामान्य नाग ही जिम्मेदार है. इस एंटीवेनम को आम मरीजों के इलाज में इस्तेमाल करने से पहले इसका इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल किया जाएगा. शोधकर्ता का कहना है कि इंसानों पर होने वाले इन ट्रायल के लिए काफी फंडिंग और केंद्र सरकार के सहयोग की जरूरत होगी.

भविष्य में हर सांप के जहर का इलाज

शोधकर्ताओं ने पाया कि उनके द्वारा विकसित की गई यह नई एंटीबॉडी करैत सांपों के जहर से बचाव नहीं करती है. यह एंटीवैनम वाइपर प्रजाति के सांपों पर काम नहीं करेगी. इसका मतलब यह हुआ कि वर्तमान में वैज्ञानिकों द्वारा बनाई गई नई नैनो एंटीबॉडी कोबरा के अलावा अन्य जहरीले सांपों का जहर नहीं मिटाएगा लेकिन इसकी संरचना इस तरह से बनाई गई है कि इसमें अन्य सांपों के खिलाफ काम करने वाली अतिरिक्त एंटीबॉडीज को आसानी से जोड़ा जा सकता है. यानी यह तकनीक भविष्य में और अधिक प्रभावी एंटीवेनम बन सकता है जो किसी भी जहरीले सांप के जहर को खत्म कर सकता है. इसलिए यह एक उम्मीद की किरण है.

सांप काटने के बहुत देर बाद भी इलाज

आईआईएससी बेंगलुरु में सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज के एसोसिएट प्रोफेसर और मुख्य शोधकर्ता कार्तिक सुनागर ने बताया कि इस लैब-मेड एंटीवेनम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सांप काटने के बहुत देर बाद भी असरदार होगा और इसकी छोटी खुराक भी बेहतरीन परिणाम दे सकती है. अभी इसका चूहों पर प्रयोग किया गया है. इस प्री-क्लीनिकल अध्ययनों के परिणाम बेहद उम्मीद जगाने वाले रहे हैं. स्पेक्टेकल्ड कोबरा जैसे प्रमुख इलापिड प्रजाति के जहरीले सांपों के मामलों में यह प्रगति बेहद महत्वपूर्ण है. डेनमार्क टेक्निकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एंड्रियास हॉगार्ड लॉस्टसन ने बताया कि इस शोध का सबसे रोमांचक पहलू यह है कि हम अफ्रीका के सांपों के जहर से लड़ने के लिए मूल रूप से बनाई गई नैनोबॉडीज को भारतीय सांपों के जहर को बेअसर करने में इस्तेमाल कर सकते हैं.

About the AuthorLakshmi Narayan

मीडिया में 20 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले लक्ष्मी नारायण पत्रकारिता के हर विधा में माहिर हैं. भविष्य की आहट और ट्रेंड्स को समय से पहले भांपने की अद्भुत कला उनके अंदर समाहि…

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September 11, 2026, 13:22 IST

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