Sports

कोई टीचर तो कोई बैंक में क्लर्क… क्रिकेट में तबाही मचाने से पहले चंद रुपए की नौकरी करने को मजबूर थे दिग्गज, एक ने तो 2-2 विश्व कप जीत लिया

Last Updated:August 25, 2026, 05:01 IST

मॉडर्न क्रिकेट में आज यह खेल सिर्फ एक पैशन ही नहीं, बल्कि दौलत और शोहरत पाने का एक जरिया भी बन चुका है. कोई खिलाड़ी किसी एक मैच के परफॉर्मेंस से रातों-रात स्टार बन जाता है, तो कुछ ऐसे भी खिलाड़ी होते हैं जो गुमनामी के अंधेरे से निकलकर अचानक पूरी दुनिया में छा जाते हैं. आइए जानते हैं ऐसे ही 5 दिग्गज खिलाड़ियों के बारे में.

क्रिकेट के खेल में कई ऐसी कहानियां हैं जिन पर यकीन कर पाना मुश्किल होता है. जेंटलमैन गेम कहे जाने वाले इस खेल में कुछ खिलाड़ी ऐसे भी हुए जो स्टार बनने से पहले मुफलिसी में अपना जीवन बिता रहे थे, लेकिन किस्मत ने ऐसी पलटी मारी कि इस खेल ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी. आइए जानते हैं ऐसे ही 5 क्रिकेटरों के बारे में, जो स्टार बनने से पहले चंद रुपयों की नौकरी किया करते थे.

इस लिस्ट में पहला नाम ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज खिलाड़ी माइकल हसी का है. माइकल हसी क्रिकेटर बनने के साथ-साथ टीचर बनने की ट्रेनिंग भी ले रहे थे. वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के लिए घरेलू क्रिकेट में ढेर सारे रन बनाने के बावजूद, उन्हें ऑस्ट्रेलियाई टीम में जगह पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा. इस दौरान उन्होंने टीचिंग का प्रोफेशन अपना लिया था, लेकिन 30 साल की उम्र में उन्हें नेशनल टीम से डेब्यू करने का मौका मिल गया, जिसके बाद उन्होंने टीचिंग छोड़ दी.

साउथ अफ्रीका के दिग्गज ऑलराउंडर शॉन पोलॉक के बारे में भी कहा जाता है कि वह क्रिकेटर बनने से पहले टीचिंग प्रोफेशन में थे. इसके पीछे वजह यह थी कि उनके माता-पिता भी टीचर थे, लेकिन पोलॉक का मन क्रिकेट में ज्यादा लगता था. यही कारण है कि कुछ समय इस प्रोफेशन में रहने के बाद उन्होंने फुल-टाइम क्रिकेट में कदम रखने का फैसला किया. हालांकि, उन्होंने स्पोर्ट्स साइंस और टीचिंग में अपनी पढ़ाई पूरी कर ली थी.

Add as Preferred Source on Google

लिस्ट में तीसरा नाम ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज जॉर्ज बेली का है. तस्मानिया के जॉर्ज बेली ने अपने शुरुआती दिनों में बैंक क्लर्क के रूप में काम किया था. बैंकिंग के काम के साथ-साथ उन्होंने अपनी बल्लेबाजी और कप्तानी के हुनर को निखारा. घरेलू क्रिकेट में तस्मानिया की कप्तानी करते हुए उन्होंने टीम को कई खिताब दिलाए. 2012 में बिना एक भी टेस्ट खेले वह सीधे ऑस्ट्रेलिया की टी-20 टीम के कप्तान बन गए थे.

न्यूजीलैंड के दिग्गज ब्रेंडन मैकुलम भी क्रिकेटर बनने से पहले बैंक में काम करते थे. नौकरी के साथ-साथ उन्होंने क्लब क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई. एक विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में राष्ट्रीय टीम में आने के बाद, उन्होंने अपने आक्रामक खेल से वर्ल्ड क्रिकेट को एक नई दिशा दी. बैंक की नौकरी छोड़कर मैकुलम ने न्यूजीलैंड क्रिकेट के लिए कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं.

इस लिस्ट में 5वां और सबसे बड़ा नाम भारत के दिग्गज महेंद्र सिंह धोनी का है. धोनी इंटरनेशनल क्रिकेट में धूम मचाने से पहले भारतीय रेलवे में टिकट कलेक्टर (TTE) का काम करते थे. नौकरी के दबाव के बावजूद उन्होंने अपने क्रिकेट के सपने को कभी नहीं छोड़ा. 2004 में भारत के लिए डेब्यू करने के बाद, उन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और चतुर कप्तानी से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया. 2007 टी-20 विश्व कप, 2011 वनडे विश्व कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर वह भारत के सबसे सफल कप्तान और इतिहास के महानतम फिनिशर बने.

First Published :

August 25, 2026, 05:01 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj