Agriculture: 1.20 लाख की लागत, 15 लाख तक कमाई, 70 साल के किसान ने पॉलीहाउस में खोजा मुनाफे का मॉडल

Last Updated:August 25, 2026, 07:07 IST
Farmer Sonaram Yadav Success Story: 70 साल की उम्र में जब कई लोग खेती से दूरी बनाने लगते हैं, तब जयपुर के किशनगढ़ रेनवाल के किसान सोनाराम यादव खेती को आधुनिक एग्री-बिजनेस में बदल रहे हैं. उन्होंने पॉलीहाउस में जैविक तरीके से खीरे की खेती का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसमें कम लागत और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से लाखों रुपए की कमाई हो रही है. करीब 4048 वर्गमीटर पॉलीहाउस में वे 90 दिन में 40 टन तक खीरा पैदा करते हैं. एक फसल पर करीब 1.20 लाख रुपए खर्च आता है, जबकि बाजार भाव अच्छा रहने पर 13.50 से 15 लाख रुपए तक आय हो जाती है. साल में दो फसल से 20-30 लाख रुपए तक कमाई होती है. खारे पानी की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने तीन फार्म पौंड बनवाए हैं, जिनमें बारिश का पानी जमा होता है. 10 राठी गाय और पांच भैंसों से मिलने वाले गोबर-गोमूत्र से जैविक खाद भी तैयार करते हैं.
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जयपुर: राजधानी जयपुर के किशनगढ़ रेनवाल क्षेत्र के 70 वर्षीय किसान सोनाराम यादव ने खेती में कम लागत से अधिक मुनाफे का सफल मॉडल तैयार किया जाता. उन्होंने आधुनिक तकनीक और पारंपरिक जैविक पद्धति को अपनाकर यह मॉडल तैयार किया है. सोनाराम पॉलीहाउस में खेती करते हैं और अपनी पारंपरिक खेती में भी रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करते हैं. करीब तीन साल पहले उन्होंने लगभग 4048 वर्गमीटर क्षेत्र में पॉलीहाउस लगाकर जैविक तरीके से खीरे की खेती शुरू की थी. आज उनका खेत आस-पास के किसानों के लिए जैविक खेती की मिसाल बन चुका है.
सोनाराम फसल की जरूरत के अनुसार घर पर ही करीब 15 प्रकार के कृषि जैविक जीवों और सूक्ष्मजीवों के घोल तैयार करते हैं. इनका उपयोग फसल पर छिड़काव और मिट्टी के जैविक चक्र को मजबूत करने में किया जाता है. उनका कहना है कि खेती में यूरिया समेत किसी भी रासायनिक खाद या कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं करते. वे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए केंचुआ खाद, वर्मीवॉश, डीकंपोजर और जैविक एनपीके का प्रयोग करते हैं. वहीं फफूंद और कीट प्रबंधन के लिए ट्राइकोडर्मा, ब्युवेरिया बेसियाना, स्यूडोमोनास, माइकोराइजा और पिकोनिया जैसे जैविक उत्पादों का सहारा लेते हैं.
खारे पानी के बीच बचाई हर बूंद
सोनाराम के खेत की सबसे बड़ी चुनौती पानी का खारा होना था. इसके बावजूद उन्होंने पानी की समस्या को खेती की राह में बाधा नहीं बनने दिया. सिंचाई के लिए उन्होंने तीन फार्म पौंड बनवाए हैं. इनमें बारिश के पानी को संरक्षित किया जाता है. दो फार्म पौंड का पानी पूरे साल पॉलीहाउस की खेती के लिए पर्याप्त हो जाता है. ड्रिप सिंचाई के जरिए पौधों तक जरूरत के मुताबिक पानी पहुंचाया जाता है, जिससे पानी की एक-एक बूंद का उपयोग होता है.
90 दिन में 40 टन तक उत्पादन
जैविक खेती और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण सोनाराम करीब 90 दिनों में लगभग 40 टन तक खीरे का उत्पादन प्राप्त करते हैं. एक फसल तैयार करने में करीब 1.20 लाख रुपए की लागत आती है, जबकि अच्छी बाजार कीमत मिलने पर इससे करीब 13.50 से 15 लाख रुपए तक की आय हो जाती है. साल में दो फसल लेकर वे खीरे की खेती से करीब 20 से 30 लाख रुपए तक कमाई कर रहे हैं. यानी वे कम लागत में अधिक कमाई करते हैं.
खेती के साथ डेयरी भी बनी सहारा
सोनाराम ने जैविक खेती को मजबूत करने के लिए डेयरी फार्मिंग को भी खेती से जोड़ा है. उनके पास 10 राठी नस्ल की देसी गायें और पांच भैंसें हैं. पशुओं से मिलने वाले गोबर और गोमूत्र का उपयोग जैविक खाद तैयार करने में किया जाता है. इससे बाहर से इनपुट खरीदने का खर्च घटता है और खेत का जैविक चक्र भी मजबूत होता है. इसके अलावा दूध बिक्री से अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है. कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन और वर्षों के अनुभव से सोनाराम ने खारे पानी जैसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए खेती को एक एग्री-बिजनेस हब का रूप दे दिया है.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Jaipur,Rajasthan
First Published :
August 25, 2026, 07:07 IST



