Health

सिर्फ शौक नहीं, डिप्रेशन-स्ट्रेस की दवा है गार्डनिंग! इसलिए सेलिब्रिटीज को भा रही खेती, जानें मानसिक सेहत के 10 बड़े फायदे

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, स्क्रीन टाइम की भरमार और काम के बोझ के बीच डिप्रेशन और स्ट्रेस बेहद आम समस्या बन चुके हैं. ऐसे में खुद को तरोताजा और शांत रखने के लिए लोग तरह-तरह के तरीके अपनाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके घर के आंगन, बालकनी या गार्डन में उगे हरे-भरे पौधे मानसिक तनाव की सबसे बेहतरीन और नेचुरल दवा हैं?

यही वजह है कि बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक के सेलिब्रिटीज अपनी व्यस्त और चकाचौंध भरी जिंदगी से ब्रेक लेकर गार्डनिंग और खेती का रुख कर रहे हैं. बडे बड़े शोधों में यह साबित हो चुका है कि प्रकृति के बीच समय बिताना सिर्फ एक शौक नहीं, बल्कि दिमाग और शरीर दोनों के लिए एक जादुई थेरेपी का काम करता है.

यह सोच हमारी जिंदगी में ‘ग्रोथ माइंडसेट’ को बढ़ावा देती है, जिससे हम असफलताओं से घबराने के बजाय आगे बढ़ना सीखते हैं.(Canva)

आइए समझते हैं कि गार्डनिंग आपकी मेंटल हेल्थ के लिए कैसे एक कमाल की संजीवनी साबित हो सकती है, जिसके 10 मुख्य फायदे कुछ इस प्रकार हैं:

मेंटल हेल्‍थ के लिए गार्डनिंग के फायदे- 
1.स्वीकार करना सिखाती है (Practicing Acceptance)-साइकोलॉजी टुडे के मुताबिक, हमारी आधी से ज्यादा मानसिक परेशानियां उन चीजों को कंट्रोल करने की कोशिश से आती हैं, जो हमारे हाथ में नहीं होतीं. गार्डनिंग हमें सिखाती है कि सब कुछ हमारे नियंत्रण में नहीं है. मौसम, कीड़े या अनपेक्षित बदलावों के बावजूद पौधों को अपनी रफ्तार से बढ़ते देखना हमें जीवन की परिस्थितियों को स्वीकार (Accept) करना सिखाता है.

2.परफेक्ट बनने के तनाव से राहत (Moving Beyond Perfectionism)-अगर आप हर काम में परफेक्शन (सटीकता) की तलाश करते हैं, तो यह आदत आपको चिंता और डिप्रेशन में डाल सकती है. बगीचे में कभी भी सब कुछ बिल्कुल ‘परफेक्ट’ नहीं होता—कभी कोई पत्ता कीड़ा खा जाता है तो कभी बेमौसम बारिश पौधे को नुकसान पहुंचाती है. गार्डनिंग हमें सिखाती है कि कमियों के साथ भी चीजें खूबसूरत हो सकती हैं.

Image: Instagram-laughingcoloursL

3.’ग्रोथ माइंडसेट’ का विकास (Developing a Growth Mindset)-पौधा लगाते समय कोई गलती हो जाए या पौधा सूख जाए, तो इसे एक ‘विफलता’ मानने के बजाय एक नया अनुभव माना जाता है. गार्डनिंग करने वाले लोग गलतियों से सीखते हैं. यह सोच हमारी जिंदगी में ‘ग्रोथ माइंडसेट’ को बढ़ावा देती है, जिससे हम असफलताओं से घबराने के बजाय आगे बढ़ना सीखते हैं.

4.दूसरों से जुड़ने का जरिया (Connecting with Others)-पौधों और गार्डनिंग का प्यार लोगों को बहुत जल्दी आपस में जोड़ देता है. जब आप दूसरे लोगों के साथ अपने गार्डनिंग के अनुभव, बीज या फल-सब्जियां शेयर करते हैं, तो इससे रिश्तों में गर्माहट आती है और अकेलापन दूर होता है.

5.कुदरत और अपनी जड़ों से जुड़ाव (Connecting to Your World);जब आप मिट्टी में हाथ डालते हैं और अपने उगाए हुए फल या सब्जियां खाते हैं, तो आप खुद को धरती और कुदरत के करीब पाते हैं. मौसम के बदलाव, धूप और बारिश को करीब से महसूस करना हमें जीवन के चक्र से जोड़ता है और मन में एक गहरा सुकून भर देता है.

6.’ग्रीन बाथिंग’ और मानसिक शांति (Bathing in Green)-जापान में ‘शिनरिन-योकु’ यानी ‘फॉरेस्ट बाथिंग’ (हरियाली के बीच समय बिताना) काफी लोकप्रिय है. रिसर्च से पता चला है कि सिर्फ हरी-भरी वनस्पतियों को देखने या उनके बीच रहने से भी एंग्जायटी, स्ट्रेस और डिप्रेशन में भारी कमी आती है.

7.वर्तमान में जीना सिखाती है (Being Present)-जब आप बगीचे में निराई या पानी देने का काम कर रहे होते हैं, तो आपका ध्यान पूरी तरह उसी पल में होता है. चिड़ियों की चहक सुनना, पत्तियों की सरसराहट महसूस करना मन को शांत करता है. यह एक तरह का ‘नेचुरल मेडिटेशन’ (ध्यान) है जो दिमाग को फालतू के विचारों से मुक्त रखता है.

8.बेहतरीन शारीरिक कसरत (Physical Exercise)-पौधों की देखभाल करने में उठना-बैठना, झुकना और खुदाई करना शामिल होता है. यह एक बेहतरीन हल्की-फुल्की एक्सरसाइज है, जो शरीर में हैप्पी हॉर्मोन्स (Endorphins) को रिलीज करती है. नियमित शारीरिक हलचल से डिप्रेशन के लक्षणों में तेजी से सुधार होता है.

9.तनाव और चिंता में तुरंत कमी (Reducing Stress)-मिट्टी की खुशबू, गुनगुनी धूप और हवा में झूमते रंग-बिरंगे फूल किसी भी इंसान का मूड पल भर में बदल सकते हैं. दिनभर के तनाव के बाद जब आप अपने गार्डन में बैठते हैं, तो शरीर की थकान और मानसिक स्ट्रेस अपने आप गायब होने लगता है.

10.शुद्ध और पौष्टिक खानपान (Eating Healthfully)-गार्डन से मिली ताजी और केमिकल-फ्री सब्जियां और फल न सिर्फ पेट, बल्कि आपके दिमाग की सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं. शोध बताते हैं कि ताजी और प्राकृतिक डाइट डिप्रेशन के इलाज में बेहद मददगार होती है. खुद उगाई हुई चीज खाने की खुशी अलग ही होती है!

अगर आप भी तनाव, डिप्रेशन या रोजमर्रा की भागदौड़ से परेशान हैं, तो दवाइयों के बजाय प्रकृति का हाथ थामकर देखिए. अपने घर में छोटे-छोटे गमलों से गार्डनिंग की शुरुआत करें. यकीन मानिए, जैसे-जैसे आपके पौधे बढ़ेंगे और फलेंगे-फूलेंगे, वैसे-वैसे आपकी मानसिक सेहत भी निखरती चली जाएगी.

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