Rajasthan

खंडहरों के बीच आज भी जल रही आस्था की लौ, पाली के प्राचीन ‘पानी दरवाजा’ पर विराजे शिव, शनि और हनुमान

Last Updated:September 07, 2026, 14:36 IST

Pali Hindi News: पाली का प्राचीन ‘पानी दरवाजा’ ऐतिहासिक विरासत के साथ धार्मिक आस्था का भी खास केंद्र है. खंडहरों के बीच स्थित इस स्थान पर भगवान शिव, शनिदेव और हनुमान जी के मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े हैं. ऐतिहासिक माहौल के बीच बने ये धार्मिक स्थल लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. पाली की विरासत और धार्मिक परंपराओं को करीब से जानने के लिए यह स्थान खास महत्व रखता है.

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पाली. राजस्थान के पाली शहर का ऐतिहासिक ‘पानी दरवाजा’ इलाका अपने आप में सदियों का इतिहास और गहरी धार्मिक आस्था समेटे हुए है. कभी ऐतिहासिक हलचलों का गवाह रहा यह स्थान आज भले ही खंडहरों के रूप में नजर आता हो, लेकिन इसके बीच स्थित एक प्राचीन और अनोखा मंदिर आज भी लाखों श्रद्धालुओं की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है. पुराने पत्थरों और खंडहरों के सन्नाटे को चीरती हुई यहां जल रही अखंड ज्योति इस बात का प्रमाण है कि वक्त बदल गया, लेकिन बाबा के दरबार का चमत्कार और भक्तों का विश्वास आज भी वैसा ही कायम है.

पानी दरवाजा स्थित इस दिव्य स्थान की सबसे बड़ी खासियत यहां की धार्मिक व्यवस्था है. मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को सबसे पहले देवों के देव महादेव के पावन दर्शन होते हैं. भगवान शिव के दर्शन कर आगे बढ़ने पर न्याय के देवता शनिदेव अपने भव्य रूप में विराजमान नजर आते हैं. ठीक आगे भक्तों के तमाम कष्ट और बाधाएं दूर करने वाले संकटमोचक हनुमानजी का दिव्य स्वरूप स्थापित है. एक ही प्राचीन परिसर में शिव, शनि और हनुमानजी की यह मौजूदगी इस मंदिर को बेहद दुर्लभ और फलदायी बनाती है.

पाली का ऐतिहासिक ‘पानी दरवाजा’ और इसका धार्मिक महत्वपाली का यह पानी दरवाजा क्षेत्र अपने आप में बेहद प्राचीन और ऐतिहासिक माना जाता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पुराने परिसर में स्थित मंदिर में जो भी भक्त सच्चे मन से अपनी प्रार्थना लेकर आता है, हनुमानजी उसके सभी संकट हर लेते हैं और शनिदेव की कृपा से न्याय और शांति मिलती है. खंडहरों के बीच बसा यह शांत, पावन और प्राचीन धाम आज भी पाली शहर की जीवंत आध्यात्मिक विरासत का एक अटूट हिस्सा बना हुआ है.

अतीत और वर्तमान को जोडने वाला वह दरवाजापानी दरवाजा केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि पाली के अतीत और वर्तमान को जोड़ने वाला एक मजबूत सूत्र है. इसके विशाल पुराने पत्थर और जर्जर दीवारें भले ही बीते दौर की दास्तान बयां करती हों, लेकिन इसके परिसर में गूंजती घंटियों की ध्वनियाँ और मंत्रोच्चार पूरे माहौल में एक अलौकिक ऊर्जा भर देते हैं. शहर की भागदौड़ और शोर-शराबे से दूर, खंडहरों की ओट में बसा यह शांत कोना श्रद्धालुओं को मानसिक सुकून और असीम आत्मिक शांति प्रदान करता है, जहाँ आते ही भक्त अपनी हर चिंता भूलकर भक्ति के भाव में लीन हो जाते हैं.

About the AuthorJagriti Dubey

मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

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September 07, 2026, 14:36 IST

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