छोटी पार्टियां बीजेपी-कांग्रेस को दे रही बड़ी चुनौती, वोटों के बंटवारे ने उलझाए समीकरण

Last Updated:September 09, 2026, 16:23 IST
Rajasthan Nikay Chunav 2026 : राजस्थान में निकाय चुनाव के पहले चरण में आज मतदान के प्रति मतदाताओं में खासा उत्साह दिखाई दे रहा है. कई निकायों में बंपर वोटिंग हुई है. इससे बीजेपी और कांग्रेस चौकन्नी हो गई है. यह वोटिंग किसके पक्ष में और किसके खिलाफ है इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है. लेकिन इस बीच छोटी राजनीतिक पार्टियों आरएलपी, बसपा, आप बीएपी और एआईएमआईएम भी इस बार कई निकायों के वार्डों में कांग्रेस और बीजेपी को कड़ी टक्कर दे रही हैं. राजस्थान में निकाय चुनाव दो चरणों में हो रहे हैं.
जयपुर. राजस्थान में निकाय चुनावों के लिए पहले चरण में शानदार वोटिंग हो रही है. मतदाता शहरी सरकार को चुनने के लिए पूरे उत्साह में है. हालांकि पूरे प्रदेश में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ बीजेपी और कांग्रेस में ही है लेकिन कई निकायों में इन पार्टियों के बागियों के साथ-साथ अन्य छोटी पार्टियां भी जोरदार टक्कर दे रही हैं. कई निकायों में हुई बंपर वोटिंग ने कांग्रेस और बीजेपी की टेंशन बढ़ा दी है. वह इसलिए कि यह बंपर वोटिंग किसके फेवर में है और किसके खिलाफ इसका अभी अनुमान लगा पाना मुश्किल हो रहा है. कई निकायों में हुई बंपर वोटिंग से खासकर कांग्रेस की टेंशन ज्यादा बढ़ी हुई है. क्योंकि पंरपरागत रूप से शहरों में बीजेपी का प्रभाव ज्यादा माना जाता है. कांग्रेस ग्रामीण इलाकों में हावी रहती है.
राजस्थान में इस बार निकाय चुनाव काफी रोचक हो गए हैं. इसकी वजह अन्य छोटी पार्टियों बसपा, बीएपी और आरएलपी के अलावा असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम की इन चुनावों में बढ़ी हुई सहभागिता है. हालांकि प्रदेश में एआईएमआईएम को अभी तक सिंबल नहीं मिला है. इसके चलते उसने अधिकृत रूप से किसी प्रत्याशी को खड़ा नहीं किया है लेकिन निर्दलीयों को अपना बताकर उन पर हाथ रख रखा है. उनके लिए बाकायदा ओवैसी ने जयपुर में सभा भी की. राजस्थान में यूं तो संगठित रूप से कोई तीसरा मोर्चा नहीं है लेकिन निकाय चुनाव में जिस तरह से बीजेपी और कांग्रेस में बगावत हुई है और बागियों की फौज चुनाव मैदान में डटी है उसके कारण छोटी पार्टियों के प्रत्याशियों के जीत के अवसर बढ़ गए हैं. इसकी वजह यह है कि वार्डों में सीमित संख्या में वोट होते हैं. अगर उन वोटों का कई प्रत्याशियों में बंटवारा हो जाता है तो हार जीत का अनुमान लगाना बड़ा मुश्किल हो जाता है.
आदिवासी बेल्ट में बीएपी ने फूला रखी हैं कांग्रेस-बीजेपी की सांसेंहालांकि राजस्थान में लोकसभा और विधानसभा जैसे बड़े चुनावों में ये पार्टियां ज्यादा जलवा नहीं दिखा पाती है लेकिन स्थानीय निकाय चुनाव में इनकी भूमिका अहम हो जाती है. इसमें जातीय समीकरण प्रभावी हो जाते हैं. राजस्थान में पिछले कुछ समय से आदिवासी बेल्ट डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ क्षेत्र में भारत आदिवासी पार्टी (BSP) बीजेपी और कांग्रेस के लिए चिंता का सबब बनी हुई है. यह पार्टी इस इलाके में लगातार अपना जनाधार बढ़ा रही है. इस बार बाप ने इन जिलों में बड़ी संख्या में अपने प्रत्याशी उतारकर बीजेपी और कांग्रेस के लिए कड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. डूंगरपुर में तो पिछली बार भी भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) के सात पार्षद जीते थे. बाद में यही BTP टूटकर BAP बनी थी. इस बार उसने पिछले बार के मुकाबले बड़ी संख्या में अपने प्रत्याशी उतारे हैं.
आरएलपी ने निकाय चुनावों में बढ़ा दी अपनी भागीदारीवहीं बसपा का प्रभाव प्रदेश के अन्य इलाकों के मुकाबले पूर्वी राजस्थान में भरतपुर और धौलपुर इलाके में ज्यादा है. बहुजन समाज पार्टी ने पूर्वी राजस्थान के कई निकायों में अच्छी खासी संख्या में अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है. जबकि साल 2018 में अस्तित्व में आई नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) का प्रभाव पश्चिमी राजस्थान में ठीकठाक है. जातीय समीकरणों पर आधारित आरएलपी ने भी पिछले निकाय चुनाव के मुकाबले इस बार बड़ी संख्या में अपने प्रत्याशी उतारे हैं. जाट समाज में अपनी पैठ रखने वाली इस पार्टी ने भी इस बार जाट बाहुल्य इलाकों में पूरे दमखम के साथ निकाय चुनाव के मैदान में ताल ठोक रखी है.
एआईएमआईएम ने बढ़ाई कांग्रेस की टेंशनरही सही कसर असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने चुनाव मैदान में कूदकर पूरी कर दी है. उसने सूबे के कई मुस्लिम बहुल इलाकों में निर्दलीयों को अपना समर्थन देकर कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है. खासकर जयपुर में एआईएमआईएम जिस तरह से मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में अपनी बिसात बिछाई है उससे कांग्रेस खासी परेशान बताई जा रही है. राजस्थान में पार्टी की जड़ें गहरी करने के लिए ओवैसी ने जयपुर में दस्तक दी तो वहां आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल भी पहुंच गए. दोनों नेताओं ने बीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ एक मंच से हुंकार भरकर तीसरे मोर्चा की संभावनाओं को जवां कर दिया. इन सबका मिलाजुला असर यह हुआ है कि बहुत से निकायों में बीजेपी और कांग्रेस की परेशानियां बढ़ गई हैं. उन्हें वोट बैंक बिखरने का खतरा सता रहा है. कई जगह इन पार्टियों के प्रत्याशी दोनों प्रमुख पार्टियों के प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं.
About the Authorसंदीप राठौड़
संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…
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Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
September 09, 2026, 16:23 IST



