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‘जमानत के हकदार नहीं उमर खालिद और शरजील इमाम’, दिल्ली पुलिस ने UAPA की सख्त शर्तों का दिया हवाला

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‘उमर खालिद और शरजील इमाम ही थे दिल्ली दंगों के असली मास्टरमाइंड’

Last Updated:August 27, 2026, 14:32 IST

साल 2020 के पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश के मामले में दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में कड़ा रुख अपनाते हुए उमर खालिद और शरजील इमाम को पूरे उपद्रव का मुख्य सूत्रधार करार दिया है. पुलिस ने दोनों आरोपियों की ताजा जमानत याचिकाओं का पुरजोर विरोध करते हुए अपना जवाब दाखिल किया. पुलिस ने अदालत को बताया कि उनके पास दंगे की योजना तैयार करने, भीड़ जुटाने और पर्दे के पीछे से रणनीतिक कमान संभालने के पुख्ता और अहम सबूत मौजूद हैं.'उमर खालिद और शरजील इमाम ही थे दिल्ली दंगों के असली मास्टरमाइंड'Zoomउमर खालिद और शरजील इमाम जेल में बंद है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को मास्टरमाइंड बताया है. अदालत में पुलिस ने अपना जवाब दाखिल करते हुए उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं का भी विरोध किया. 31 जुलाई को पिछली सुनवाई में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस ने जवाब दाखिल करने को कहा था. गुरुवार को सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में कहा, “शरजील इमाम और उमर खालिद दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड थे. पुलिस के पास इनके खिलाफ दंगों की योजना बनाने, लोगों को जुटाने और दंगों में रणनीतिक भूमिका निभाने से जुड़े अहम सबूत है.”

दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि दोनों की नई जमानत याचिकाएं अपने आप में ही ‘गैरकानूनी’ और कोर्ट को गुमराह करने वाली हैं. दिल्ली पुलिस ने कहा कि जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में सहआरोपियों को जमानत दे दी थी, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम को यह कहते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया था कि दिल्ली दंगों में इनकी भूमिका अलग है. पुलिस ने यह भी जिक्र किया कि उस समय सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि इस केस में यूएपीए की धारा 43डी(5) लागू होती है, जिसमें जमानत की सख्त शर्तों का प्रावधान है.

दिल्ली पुलिस का कहना है कि जनवरी के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते समय नए सिरे से जमानत के लिए दो शर्त लगाई थीं. पुलिस ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर और शरजील इस मामले में अहम गवाहों के बयान होने या फिर इस फैसले के एक साल पूरी होने पर नए सिरे से फिर जमानत की याचिकाएं लगा सकते है.

पुलिस का कहना है कि अभी यह दोनों ही शर्त पूरी नहीं हुई है. लिहाजा इस स्तर पर दोनों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए. बता दें कि यह मामला 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर हुए दंगों से जुड़ा है, जिनमें 50 से अधिक लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए थे. इस मामले में गिरफ्तारी के बाद से खालिद और शरजील जेल में बंद हैं.

About the AuthorRakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…

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New Delhi,Delhi

First Published :

August 27, 2026, 14:32 IST

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