जवाई के ‘देशी डॉक्टर’ अनुपाराम हैं बेजुबानों के मसीहा, एक पुकार पर दूर करने पहुंचते हैं जानवरों का दर्द

Last Updated:September 10, 2026, 18:14 IST
Pali Hindi News: पाली के जवाई इलाके में अनुपाराम बेजुबान जानवरों की सेवा के लिए अपनी अलग पहचान बना चुके हैं. लोग उन्हें प्यार से ‘देशी डॉक्टर’ कहते हैं. किसी जानवर के घायल या दर्द में होने की सूचना मिलते ही अनुपाराम मदद के लिए पहुंच जाते हैं. उनकी पशु सेवा और संवेदनशीलता ने उन्हें इलाके में बेजुबानों का मसीहा बना दिया है. जानवरों के प्रति उनका समर्पण लोगों के लिए प्रेरणादायक मिसाल बन गया है.
हाथ में छोटा सा इंजेक्शन सर पर पगडी और ग्रामीण वेशभुषा में देखकर हर कोई इन व्यक्ति को गांव का कोई आम आदमी ही समझेगा मगर आप नही जानते हमारे इन पुराने समय के बुजुर्गो के हाथ में आज भी तजुर्बे का वह जादू है जो शायद आज की पीढी में देखने को नही मिलता. अनुपाराम इसी अंदाज में जब भी किसी जानवर को सहायता की आवश्यकता होती है तो उनका इलाज करने निकल पडते है.
एक समय था जब सुदूर ग्रामीण इलाकों में जानवरों तो क्या, इंसानों के इलाज के लिए भी डॉक्टर नहीं हुआ करते थे. उस दौर में वैद्य और गाँव के बुजुर्ग ही जड़ी-बूटियों और देशी नुस्खों के माध्यम से इलाज किया करते थे. आधुनिक दौर में भी अनुपाराम इसी पुरानी परंपरा और ज्ञान को जीवित रखे हुए हैं. वे जंगलों से दुर्लभ जड़ी-बूटियाँ और पत्तियाँ एकत्र कर ऐसा लेप व दवा तैयार करते हैं, जिससे जानवरों के गहरे से गहरे घाव और बीमारियाँ बहुत जल्द ठीक हो जाती हैं.
राजस्थान का जवाई क्षेत्र अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. यह इलाका मुख्य रूप से ग्रेनाइट की विशाल पहाड़ियों के बीच रहने वाले लेपर्ड्स (तेंदुओं) के लिए पहचाना जाता है. लेपर्ड्स के अलावा यहाँ मगरमच्छ, नीलगाय, लोमड़ी, लकड़बग्घे और कई दुर्लभ प्रजातियों के प्रवासी पक्षी निवास करते हैं. अनुपाराम न केवल पालतू मवेशियों बल्कि जरूरत पड़ने पर इन वन्यजीवों की देखभाल और मदद के लिए भी हमेशा तत्पर रहते हैं
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जवाई क्षेत्र की सबसे बड़ी खासियत यहाँ रहने वाला देवासी (रबारी) समुदाय और लेपर्ड्स के बीच का अनोखा संबंध है. देवासी परिवार सदियों से इन खूंखार माने जाने वाले लेपर्ड्स के साथ बेहद आत्मीयता और शांति से रहते आ रहे हैं. इस इलाके में कभी इंसानों पर लेपर्ड अटैक की घटना देखने को नहीं मिलती. अनुपाराम भी इसी देवासी संस्कृति का हिस्सा हैं, जहाँ वन्यजीवों को डर का कारण नहीं बल्कि अपना साथी और प्रकृति का अनमोल उपहार माना जाता है.
अनुपाराम की यह निस्वार्थ सेवा केवल जानवरों का इलाज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को प्रकृति और जीव-दया से जोड़ने का बड़ा संदेश देती है. बिना किसी सरकारी सहायता या आर्थिक लाभ की परवाह किए, दिन हो या रात, अनुपाराम की एक पुकार पर बेजुबानों का दर्द दूर हो जाता है. आज के आधुनिक युग में अनुपाराम जैसी हस्तियाँ जवाई के वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक मजबूत ढाल बनी हुई हैं.
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September 10, 2026, 18:14 IST



