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जान से मारने की थी मंशा, स्मित के सिर पर हुआ था ताबड़तोड़ प्रहार, पर बच गई हड्डी, सर्जरी की 1 चूक पड़ जाती भारी

Last Updated:October 29, 2026, 18:51 IST

Smit Machchhar Brain Surgery: अपने अदम्य कारनामे से दुनिया के हीरो बने कैप्टन स्मित मच्छर को पूरी तरह से मारने की मंशा थी. को-पायलट उन्हें बेहोश करने के लिए नहीं बल्कि पूरी तरह से मारने की मंशा रखता था. यह सारे राज उनके सिर पर सर्जरी के बाद उभरे निशान से खुले हैं. फोर्टिस अस्पताल में न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. विनीत बांगा ने यह अनुमान लगाया है. उन्होंने कैप्टन स्मित मच्छर की ब्रेन की हुई सर्जरी में जटिलताओं के बारे में भी विस्तार से बताया है.जान से मारने की थी मंशा, स्मित के सिर पर हुआ था ताबड़तोड़ प्रहार, पर बच गई जानZoomकैप्टन स्मित मच्छर की सिर की फोटो @RanvirShorey के X पोस्ट से साभार.

Smit Machchhar Brain Surgery: कैप्टन स्मित मच्छर के अदम्य साहस और हौसले ने पूरी दुनिया का दिल जीत लिया. वे आज इस पूरे संसार के हीरो बन चुके हैं. लेकिन कैप्टन स्मित को किन-किन मुसीबतों से गुजरना पड़ा, ये शायद ही कोई जानता होगा. उन्हें संयुक्त अरब अमीरात में ‘फर्स्ट क्लास ऑर्डर ऑफ जायद II’ से नवाजा गया है. इस सम्मान को ग्रहण के दौरान उनके सिर की फोटो सामने आई है. उनके सिर पर उभरे गहरे निशान से उनकी मुसीबतों का पता लगाया जा सकता है. चूंकि स्मित मच्छर के सिर पर पीछे से कुल्हाड़ी से तेज प्रहार किया गया. इसलिए हमने ब्रेन के डॉक्टर यानी फोर्टिस अस्पताल फरीदाबाद में न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. विनीत बांगा से यह जानना चाहा कि उनके दिमाग में किन-किन तरह की तकलीफें सामने आई होंगी. स्मित मच्छर की मेडिकल कंडीशन को जानते हैं कि वास्तव में किस तरह से चोट लगी.

कुल्हाड़ी का प्रहार कहां हुआ

डॉ. विनीत बांगा ने बताया कि सिर की जो तस्वीरें सामने आई हैं, उनमें पीछे से कई कांटें और धंसा हुआ सिर है. इसका सीधा मतलब है कि उस दुष्ट को-पायलट की मंशा स्मित को जान से मारने की थी. निशान से यह साफ पता चलता है कि उसने कुल्हाड़ी के धार वाले तरफ से बहुत तेज प्रहार किया है. यह एक बार नहीं बल्कि दो-तीन बार से ज्यादा किया है. इतना ही नहीं उसने कुल्हाड़ी के कुंद वाले हिस्से की तरफ से भी वार किया है. इस वार के कारण कैप्टन स्मित को कंप्रेस्ड कंपाउड फ्रेक्चर हो गया. इसका मतलब है कि सिर के पीछे ऑक्सीपेटल बोन वाले एरिया में कुल्हाड़ी के वार से हड्डियां धंस गई. कैप्टन स्मित की तस्वीर में जिस एरिया में आप सर्कल बना देख रहे हैं, एग्जेक्टली वहीं कुल्हाड़ी मारी गई. इससे हड्डियां धंस गई. गनीमत यह रही है कि हड्डिया आर-पार नहीं हुई. अगर आर-पार हो जाती तो वहीं पर मौजूद खून की शिराएं साइनस भी फट जाती और बेहिसाब खून निकलने लगता. पर ऐसा नहीं हुआ.

प्रहार लगने के बाद ब्रेन में क्या हुआ

जिस हड्डियों पर प्रहार किया गया, उसे ऑक्सीपेटल बोन कहा जाता है. डॉ. विनीत बांगा ने बताया कि चूंकि हड्डियां आर-पार नहीं हुई लेकिन प्रहार इतना ज्यादा था कि ब्रेन का वह हिस्सा धंस गया. धंसने का मतलब यह हुआ कि ब्रेन अंदर ही सिकुड़ गया. जब हड्डी दिमाग के अंदर धंसती है तो ब्रेन कंट्यूजन या कनकशन मोड में आ जाता है. इस स्थिति में दिमाग के अंदर सूक्ष्म खून की नलियां फटने लगती है और उससे तरल पदार्थ निकलकर बाहर जमा होने लगता है. इसी समय दिमाग रक्षात्मक उपाय को सक्रिय कर देता है. वहां मस्तिष्क की कोशिकाएं ऑक्सीजन और पोषण की कमी को पूरा करने के लिए व्हाइट ब्लड सेल्स और हीलिंग फ्लूइड भेजता है, जिससे उस हिस्से में सूजन उभर आती है. चूंकि खोपड़ी एक बंद कंपार्टमेंट है. इसलिए जब सूजन के कारण दिमाग का आयतन बढ़ता है, तो अंदर दबाव यानी इंट्राक्रैनियल प्रेशर बहुत तेजी से बढ़ने लगता है. यह बढ़ा हुआ दबाव पूरे दिमाग को चारों तरफ से भींच देता है. इस दबाव के कारण आर्टरीज और वेंस पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है जिसके कारण नलियां सिकुड़ जाती है. अगर कुछ मिनट तक ऐसा हो तो वहां ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण दिमाग की कोशिकाएं मरने लगती है. जब दिमाग की कोशिकाएं एक बार मर जाती है तो वह दोबारा नहीं बनती है. जब सूजन का दबाव बढ़ने लगेगा तो दिमाग के टिशूज अपनी जगह से खिसक कर नीचे की ओर जाने लगेंगे. इस स्थिति को ब्रेन हर्निएशन कहते हैं. यह जानलेवा साबित हो सकता है. इसलिए इन स्थितियों से निपटने के लिए तत्काल सर्जरी की जरूरत पड़ती है.

जिस एरिया में हमला वह बेहद सेंसेटिव

डॉ. विनीत बांगा बताते हैं कि जो स्थिति कैप्टन स्मित मच्छर की थी. उसमें तत्काल अस्पताल पहुंचना अत्यंत आवश्यक है. हर मिनट की देरी भारी पड़ती है. कैप्टन स्मित के ब्रेन में हमले के बाद जब सूजन बढ़ने लगी तो वे धीरे-धीरे बेहोश होने लगे लेकिन इस आंशिंक बेहोशी की हालत में भी वे कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया. इसके बाद वे और बेहोश हो गए. वास्तव में हमारे दिमाग का सबसे बाहरी हिस्सा स्किन का होता है. स्किन के नीचे मांसल फैट होता है जो कुशन का काम करता है. इसके बाद मजबूत हड्डियां ब्रेन को ढकी रहती है. इन हड्डियों के नीचे ब्रेन होता है. ब्रेन की सतह पर खून की नलियों का चैनल बना होता है. जो खून शरीर से ब्रेन में आता है वह आर्टरीज के माध्यम से आता है. वहीं जो खून ब्रेन से शरीर में आता है वह वेंस के माध्यम से जाता है. कई सारे वेंस के चैनल जब एक जगह मिलते हैं और मोटी वेंस बनाते हैं तब उसे साइनस कहते हैं. जहां स्मित पर वार किया गया था वह ऑक्सीपिटल एरिया है. इसमें सुपरियर सजिटल साइनस स्थित होता है. इस अत्यंत सेंसेटिव होता है. अगर कुल्हाड़ी ऑक्सीपेटल बोन को चीरते हुए इस साइनस तक पहुंच जाती तो अनहोनी निश्चित थी. इस साइनस से अगर खून लीक होता है तो इसमें तीन चीजों के होने का डर रहता है-खून के लीक होने का, उसमें एयर भरने का और खून का थक्का बनने का. यह तीनों ही स्थिति घातक है. मगर स्मित की किस्मत ने यहां काम किया.

सर्जरी में एक चूक जिंदगी पर भारी

डॉ. विनीत बांगा ने बताया कि इस स्थिति में रत्ती भर चूक की गुंजाइश नहीं है. क्योंकि मरीज के सिर के अंदर सूजन बहुत बढ़ गई है. अब इसे हाल में खोलना होगा. ऐसे में बेहद काबिल सर्जन की जरूरत होती है. क्योंकि यह बेहद जटिल सर्जरी है. सबसे पहले जो हड्डी धंस गई है उसे उठानी पड़ती है. चूंकि वहीं साइनस भी है, इसलिए इसमें हल्का सा भी छेड़छाड़ घातक हो सकता है. इसके साथ ही बगल की हड्डी को भी खोलना होता है ताकि ब्रेन में सूजन के कारण जो वॉल्यूम बढ़ा है, उसे जगह मिले और सूजन को कम होने का मौका मिले. डॉक्टर ने इस बात का ख्याल रखते हुए बेहद सूझबूझ से कैप्टन स्मित की सर्जरी की. ब्रेन के धंसे हुए हिस्से को ऊपर उठाते वक्त यह जोखिम रहता है कि वेंस कट-फट जाए. अगर वेंस कट गया तो एक मिनट के भीतर ही 2 लीटर खून निकल सकता. इसलिए यह अपने आप में बेहद चुनौती भरा काम था. चाहे जो भी हो लेकिन जिस सूझ-बूझ से कैप्टन स्मित ने दुनिया को बचा लिया उसके बाद डॉक्टरों को यह काम करना ही था और उन्होंने इसे बखूबी ऐसा किया.

About the AuthorLakshmi Narayan

With 20 years of extensive experience in Hindi journalism, Lakshmi Narayan is a distinguished media professional and digital team leader at Network18, managing edit…

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October 29, 2026, 18:51 IST

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