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टच-मी-नॉट… कमाल की खूबसूरती लेकिन स्किन और बालों के लिए रामबाण, जानें गुलमेंहदी के अद्भुत फायदे

बलिया: आयुर्वेद का एक ऐसा खूबसूरत और चमत्कारिक पौधा, जो सेहत और खूबसूरती दोनों के लिए वरदान है. जी हां, जनपद बलिया के बांसडीह रोड थाना क्षेत्र के मझौली स्थित शांति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में सेवाएं दे रहे उड़ीसा निवासी अनुभवी आयुर्वेदाचार्य डॉ. सरत कुमार पाणिग्रही ने गुलमेहंदी पौधे के कई अद्भुत फायदों से पर्दा उठाया है. सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद डॉक्टर पाणिग्रही बलिया के लोगों को अपनी लंबी चिकित्सा का लाभ दे रहे हैं और आयुर्वेद के जरिए गंभीर समस्याओं का समाधान बता रहे हैं. आगे पढ़िए…

गुलमेहंदी का खूबसूरत पौधा औषधीय गुणों से भरपूर

इस पौधे को आम बोलचाल में टच मी नॉट यानी गुलमेहंदी के नाम से जाना जाता है. यह विभिन्न रंगों से भरपूर एक बेहद खूबसूरत फूल वाला पौधा है, जो न केवल बगीचे की शोभा बढ़ाता है, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर है. इस पौधे को टच मी नॉट इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसकी फलियों को छूते ही इसके बीज चटककर तेजी से बाहर निकल जाते हैं. इसके प्राकृतिक राल और एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल भी सदियों से होता आ रहा है.

मांसपेशियों के खिंचाव और जोड़ों के दर्द में फायदेमंद

डॉक्टर पाणिग्रही ने कहा कि इस पौधे में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. इसी के कारण इसका तेल मांसपेशियों के खिंचाव, जोड़ों की अकड़न और गठिया के दर्द को कम करने में मदद करता है. इसके अलावा, इसमें मौजूद कफ निस्सारक गुण सर्दी, खांसी, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं में भी मरीजों को तुरंत आराम देते हैं. इसकी पत्तियों का काढ़ा यानी चाय के रूप में सेवन करने से शरीर की इम्युनिटी पावर भी मजबूत होती है.

त्वचा की देखभाल और घाव भरने में उपयोगी

त्वचा की देखभाल में भी यह पौधा किसी संजीवनी से कम नहीं है. इसमें मौजूद एंटीसेप्टिक और जीवाणुरोधी गुण शुष्क, चिड़चिड़ी और मुंहासे वाली त्वचा को ठीक करते हैं. यह घावों, कट्स और हल्की जलन को तेजी से ठीक करने में सहायक होता है और इसके पंचांग का पेस्ट बनाकर थोड़ा गर्म करके नारियल तेल मिलाकर लगाया जा सकता है. अरोमाथेरेपी में इसके तेल की सुगंध का प्रयोग मन को शांत करने, तनाव दूर करने और भावनात्मक संतुलन को सही करने के लिए किया जाता है.

घर की दुर्गंध दूर करने और लकड़ी को सुरक्षित रखने में उपयोग

एक जरूरी बात, यह पर्यावरण और घर की शुद्धता के लिहाज से भी बेहद उपयोगी है. इससे निकलने वाले राल का उपयोग लकड़ी को सड़ने, खराब होने और कीड़ों से बचाने के लिए किया जाता है. इसकी प्राकृतिक और मनमोहक खुशबू घर की दुर्गंध को दूर कर वातावरण को पूरी तरह शुद्ध बनाती है. यह बगीचे को लाल, गुलाबी, बैंगनी और सफेद रंगों से भर देता है.

औषधि के इस्तेमाल से पहले बरतें सावधानी

लेकिन सावधानी बहुत जरूरी है, क्योंकि हर औषधि का अपना अलग साइड इफेक्ट होता है. इसलिए बिना आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह के किसी भी औषधि का सेवन अपने मन से नहीं करना चाहिए, वरना यह हानिकारक भी साबित हो सकता है.

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