नीम के पेड़ पर चढ़ जाए गिलोय के बेल तो समझिए संजीवनी मिल गई

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नीम के पेड़ पर चढ़ जाए गिलोय के बेल तो समझिए संजीवनी मिल गई
नीम और गिलोय दोनों जबर्दस्त औषधीय गुणों से परिपूर्ण है. लेकिन अगर नीम के पेड़ पर गिलोय के बेल चढ़ गए तो समझिए यह संजीवनी से कम नहीं है. आयुर्वेद में गिलोय को अत्यंत गुणकारी और स्वास्थ्यवर्धक माना गया है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में सहायक है. इसे गुडुची और अमृतावली के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह लता कभी सूखती नहीं है. एक्सपर्ट रविकांत पांडे के अनुसार गिलोय जिस पेड़ पर चढ़ती है, उसके औषधीय गुणों को स्वयं में समाहित कर लेती है. नीम के पेड़ पर पनपने वाली गिलोय का काढ़ा या अर्क पीने से अनगिनत फायदे मिलते हैं. यह डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और पुराने वायरल बुखार में अत्यंत असरदार प्रमाणित होता है. अध्ययनों से स्पष्ट हुआ है कि नीम और गिलोय का यह संयोजन एंटीफंगल तथा एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है, जो संक्रमण और मौसमी बीमारियों से बचाकर मनुष्य को निरोगी जीवन प्रदान करता है.
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